भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध पर (चौंकाने वाले तथ्य)

दोस्तो, आज हम भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध को विस्तृत मे जानेगे ।

यह निबंध आपको स्कूल के हर क्लास ओर कॉलेज मे काम आने वाला है । हम इस निबंध मे भारत की शिक्षा प्रणाली के महत्व, फायदे ओर नुकसान के बारे मे जानेंगे ।

लेकिन पहले मे आप से एक प्रश्न पूछना चाहता हु की, क्या भारतीय शिक्षा प्रणाली अच्छी या बुरी है ?

अगर बुरी हे तो इस को सुधारने के लिए हमे क्या कार्य करने चाहिए जिस्से हम अगले 10 या 15 वर्ष तक इसे मे सुधार कर सके । ये हम आगे जानेंगे ।

हम पर भरोसा करें, भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध को पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह या प्रश्न रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है ।

Education system of India- भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध

 

प्रस्तावना :

शिक्षा ओर मेहनत एक एसी सुनहरी चाबी हे, जो बंद भाग्य के दरवाजे को आसानी से खोलदेती हे ।

किसी भी देश की शक्ति ओर विकास बहुत हद तक उस देश की शिक्षा की पद्धति पर निर्भर करता है । क्योकि शिक्षा इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली हथियार है ।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं हे की, आप शिक्षा पाकर पूरी दुनिया को उल्टी कर सकते हो या आप तारो को जमीन पर ला सकते हो  ।

इसका मतलब यह हे की आप शिक्षा से टेक्नालजी, ई – कॉमर्स ओर एसे कई क्षेत्रों मे बदलाव लाकर दुनिया को एक नयी ओर ले जा सकते हो ।

मे आपको भारत की शिक्षा प्रणाली का प्राचीन से लेकर आज तक का पूरा नक्शा संक्षेप मे बताना चाहूँगा ।

भारत में प्राचीन शिक्षा प्रणाली की उत्पत्ति कैसे हुई ?

प्राचीन काल में भारत में गुरुकुल शिक्षण पद्धति थी । यदि विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करना चाहता तो वह गुरु के आश्रम में आकर शिक्षा ग्रहण करता और वहीं रहकर अपना सारा काम करता था ।  

इस से छात्रो को सबसे बड़ा फाइदा यह होता था की, वो अहंकार के बिना शिक्षा ग्रहण करते थे ।

ब्रिटिश काल में भारत में शिक्षा प्रणाली :

प्राचीन काल से हमें जो शिक्षाएं मिली वो मध्य युग में कुछ स्थानों पर अंधविश्वास बन गईं । क्योंकि उस समय कुछ लोग आपने फायदे के लिए शिक्षा को अंधविश्वास बना देते थे ।  

एसे कई अंधविश्वास को हटाने के लिए राजा राम मोहनराय ओर ब्रिटिशर लॉर्ड विलियम बेंटिक ने बहोत कोशिस की ओर कुछ हद तक सफल भी रहे । 

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उसके बाद लॉर्ड थॉमस बबिंगटन माउ काउली ने 1830 में शिक्षा को भारत लाये और वहां से आधुनिक शिक्षा प्रणाली भारत में आई । 

इस शिक्षा की वजह से भारत मे विज्ञान, गणित आदि जैसे विषयों को लाया गया ओर तत्त्वमसा, दर्शन और उपनिषद जैसे प्राचीन विषयों को अनावश्यक बना दिया गया ।

भारतीय शिक्षा प्रणाली के 6 चौंकाने वाली वास्तविकता :

अब्दुल कलाम जी ने कहा था की, भारतीय शिक्षा प्रणाली को पूर्ण रूप से सुधार करने की आवश्यकता है । लेकिन हम ने आज तक इसमे कोई बदलाव नहीं किया ।

तो चलिये बढ़ते है रोचक तथ्यो की तरफ ।

(1) भारत में शिक्षा की प्रणाली कितने प्रकार की है ?

भारत में दो प्रकार की शिक्षा की प्रणाली है, सार्वजनिक और निजी । यदि हम पब्लिक स्कूल को कई हिस्सों में विभाजित करते हैं, तो आज कुछ राज्यों को छोड़कर अधिकांश राज्यों में शिक्षा प्रणाली बहुत खराब है ।

चूंकि राज्य सरकार और केंद्र सरकार में दो अलग-अलग दल हैं, इसलिए दोनों के बीच समन्वय इतना अच्छा नहीं है ।

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इस के कारण जीतने छात्र कक्षा 1 मे आते हे लेकिन उन्मेसे आधे से भी कम छात्र नोकरी के लिए आवेदन करते है ।  

नहीं समजे चलो उदाहरण से समझते हैं,

क्लास-1 में कुल 100 छात्र शामिल हैं । उसमे से 78% छात्र क्लास-10 पूरा करते हैं । उसके बाद 56% 12 तक और अंत मे यही लोग नौकरी के लिए आवेदन करते है ।

इस प्रकार शुरुआत से 100 छात्रों में से 56 छात्रों ने नौकरी के लिए आवेदन किया तो बाकी के छात्र कहा गए ?

(2) भारतीय शिक्षा की जो प्रणाली हे वो कितनी बड़ी है उसको हमे समजना पड़ेगा ।

भारत एक युवा देश हे और हमारे देश में युवाओं की औसत आयु 27 वर्ष है ।

भारत मे वर्तमान मे कुल 970 विश्वविद्यालय, 52000 कॉलेज ओर 36 मिलियन छात्र भारत में पढ़ रहे हैं । ओर हर साल 90 लाख से भी ज्यादा छात्र अपने कॉलेज के अंतिम वर्ष को पूरा करके नौकरि के लिए आवेदन करते हैं ।

(3) आपके पास किस प्रकार की सामग्री है ?

आप सायद नहीं जानते होंगे की हम जो पढ़ रहे हे ओर पढ़ा रहे हे, वह सामग्री कितनी पुरानी है । क्या आपको पता हे ?

आज दुनिया के कई विकसित देश अपनी स्कूल मे पढ़ाई जाने वाली सामाग्री हर 2 साल मे बदल देते हे ।

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इस का मतलब ये नहीं हे की हमे हमारा इतिहास हमारे बच्चो को पता नहीं चलना चाहिए बल्कि कुछ प्रेक्टिकल जीवन मे जो काम आए एसे विषयो को लाना चाहिए ।

आइए उदाहरण से समझते हैं, हमारे पास 19 वीं सदी का पाठ्यक्रम है, 19 वीं सदी की स्थापत्य, 20 वीं सदी पद्धति ओर 21 वीं सदी के छात्र है ।

इस प्रकार, पाठ्यक्रम और आधुनिक छात्रों के बीच एक बड़ी खाई है । इस लिए दुनिया के हर क्षेत्र मे हमारे छात्र पिछड़ जाते हैं ।

(4) शिक्षा को पढ़ाने की हमारी पद्धति :

कुछ शीर्ष विश्वविद्यालय जैसे IIm, IIt को छोड़कर लगभग सभी एक ही विधि का उपयोग करते हैं । शिक्षक क्लास के रूम में आते हे, सिद्धांत का संचालन करते हे ओर वर्ष के अंत में छात्र का मूल्यांकन करते है ।

उसके आधार पर ही छात्र का भविष्य तय किया जाता है । आज उसकी वजह से ही छात्र का तनाव बढ़ता ही चला जा रहा है । इसीलिए तो आज छोटा सा ब्च्चा भी आत्महत्या कर लेता ।

(5) छात्र को अंधाधुन अनुसरण :

आप सोच रहे होंगे की हमारी शिक्षण प्रणाली मे ही दोष हे । इसीलिए हमारे बच्चे विश्व मे आगे नहीं आ रहे । लेकिन एसा बिलकुल भी नहीं है । इसमे थोड़ी गलती हमारे छात्र की भी है ।

क्योंकि आज भारत के ज़्यादातर बच्चो का आदर्श हमारे हीरो ओर हीरोइन है । बल्के उनको अपना प्रेरणास्रोत भी मानते है ।

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आइए इसको भी एक उदाहरण से समझते हैं, आज भारत मे जिन छात्रों के पास 4G कार्ड है । अगर हम उनके पूरे दिन का डेटा निकले तो 100 % मे से 90% डेटा एक छात्र मनोरंजन के लिए उपयोग करता है ।

लेकिन कोई नयी कला या शिक्षा के लिए छात्र 10% डेटा का ही उपयोग करता हे । इसीलिए तो आज भारत में टिक टॉक, fb ओर Instagram के उपयोग कर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है ।

कुछ रिपोर्ट के मुताबिक, गेमिंग की जो एप हे वो शिक्षा की एप के मुक़ाबले 100 गुना ज्यादा डाउन्लोड होती हे ।

यू-ट्यूब पर मनोरंजन की चैनले एजुकेशन चैनल के मुक़ाबले 50 गुना ज्यादा subscribe होती हे । आखिर क्यू ?

(6) मार्क के प्रति छात्रों में बढ़ता तनाव :

मे इस टॉपिक पर बात करने से पहले इसके कुछ परिमाण आपको दिखा देना चाहता हु |

कुछ रिपोर्टों और समाचार साइट के अनुसार, आज भारत में हर 1 घंटे में 1 छात्र आत्महत्या कर रहा है ।

एक स्कूल में परीक्षा के तनाव मे आकर बच्चे ने उसके दोस्त को मार डाला । उसका कारण जानकार आपको बड़ी हेरनी हो की वो सिर्फ अपनी परीक्षा को स्थगित कराना चाहता था ।

एक ओर किस्से मे, विद्यालय में मासिक परीक्षा में असफल होने के कारण 4 छात्र कुँए के अंदर कूद कर अपनि जान दे दी । और ऐसे कई मामले हर दिन आते हैं ।

इसलिए इन सब को देखते हुए हमें शिक्षा प्रणाली के, बुनियादी ढांचे ओर सामग्री में बदलाव लाना होगा जिससे एसी घटनाए कम हो ।

उपाय :

आप ने अबतक भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध को पढ़ा ओर समजा की कितनी ओर कैसी खामी हमारे प्रणाली मे हे । ओर अब हम जानने वाले हे की क्या हम इसमे सुधार ला सकते हें ।

तो जी हा दोस्तो, देश के महत्वपूर्ण अधिकारियों द्वारा दिए गए समाधान और नीतियों के साथ, हम अगले 10 वर्षों में भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार कर सकते हैं । इसके लिए हमने नीचे कुछ उपाय बताए है ।

शिक्षा के पीछे राज्य सरकार का महत्वपूर्ण योगदान :

अगर हम राज्य के बारे में बात करते हैं, तो शिक्षा की दर दक्षिण के राज्य में अधिक है । लेकिन अगर हम अन्य राज्यों के बारे में बात करते हैं, तो इसकी गुणवत्ता बहुत कम है ।

2018 की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु में कॉलेज नामांकन दर 46% है । केरल, चेन्नई आदि में भी अच्छी दरें हैं ।

लेकिन बिहार का कॉलेज नामांकन दर 16% ओर पश्चिम बंगाल 19% है । इसमे केवल अंतर यह है कि सरकार शिक्षा पर कितना खर्च करती है ।

आंकड़े हमें बताते हैं कि परिणाम कहां मिले लेकिन वे हमें यह भी बताते हे की कहा परिमाण नहीं मिले । इसलिए राज्य सरकार ने शिक्षा पर अधिक से अधिक खर्च करना चाहिए ।

हमें एसी कोन कोन सी  नीति लानी चाहिए जिससे इसमे बदलाव हो :

यदि हम एक बदलाव लाना चाहते हैं, तो हमें एक राष्ट्रीय छात्रवृत्ति कार्यक्रम लाना होगा । जिसमें हर साल 20,000 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति रखी जानी चाहिए ।

भारत सरकार को इसमें 2 भाग रखेने होंगे । (1) केंद्र सरकार (2) राज्य सरकार।

इसमें प्रतिभाशाली छात्रों को लिया जाना चाहिए जो महंगी फीस नहीं दे सकते । इससे छात्रों के सिर पर ऋण का तनाव कम होगा और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनेगे ।

आधारभूत संरचना लाने के लिए क्या परिवर्तन किए जाने चाहिए :

हमारे देश में हर साल 90 लाख छात्र कॉलेज पूरी करते हैं और नौकरियों की तलाश में निकलते हैं । लेकिन यह सभी छात्र होशियार नहीं है ।

इस में 30 लाख उच्च गुणवत्ता वाले छात्र हैं । उसके बाद बाकी बचे 60 लाख मे से 20 लाख एसे छात्र हे जिनको अगर तैयार किया जाए ओर सही मार्गदर्शन दिया जाए तो वे एक अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं । और बाकी छात्र की गुणवत्ता अच्छी नहीं है ।

यानि की बाकी बचे 40 लाख की गुणवत्ता अच्छी नहीं है । तो अब जो हमे जो 50 लाख छात्र मिले हे उनको अगर सब व्यावहारिक ओर प्रेक्टिकल तरीके से सिखाया जाए तो शिक्षा प्रणाली बदली जा सकती है ।

इसके अलावा हमे ओर हमारी सरकार को मिलकर हल्की ओर कम गुणवतावली कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को बंद करना होगा । तभी हम इस प्रणाली को 10 साल में बादल सकते है ।

उसके साथ हमे शिक्षा को अधिक-से-अधिक डिजिटली करना होगा । इसके अलावा हमे कुकिंग, कंटेंट राइटिंग और सबसे महत्वपूर्ण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी शिक्षा की भी जानकारी देनी होंगी ।

ताकि हमारे युवा सिर्फ नौकरी के भरोसे न बेठे । हमे यहा पे समाज के निव मे जाकर उसको बदलने की जरूरत है ।

निष्कर्ष :

भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध का पूरा निष्कर्ष यह नहीं हे की आपको सिर्फ ओर सिर्फ पढ़ाई से ही आगे बढना है ।

बल्के आप को खुद एक अच्छा व्यक्ति बनाना है । ओर उसके बाद हमारे जीवन मे काम आने वाली चीज़ों लो प्राप्त करना है |

कुछ अच्छी कंपनियां आजकल बिना डिग्री के भी एक व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ शोध छात्रों को नियुक्त करती हैं । Facebook, Google, Microsoft जैसी बड़ी कंपनी भी इस मे शामिल है ।

हमे भारत के छात्रो को यह सिखाना होगा की कैसे सोचे ? ना की क्या सोचे ?

आइंस्टीन ने बड़ी आची बात काही थी की, Education is not the study of facts, but the training of the mind to think.

अब मे आखिर मे आपसे पूछना चाहता हु की आपको ये भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध को दे सके ।

लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email जरूर करे । आपको और भी किसी विषय पर निबंध चाहिए तो कॉमेंट मे जरूर बताए ।

ओर इसे अपना कर्तव्य समजकर अपने दोस्त-परिवार मे जरूर शेर करे । (please share)

Thanks for reading भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध

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