होली पर निबंध – Essay on Holi in Hindi (रंगीन त्यौहार)

आज हम  essay on holi in hindi के बारे मे विस्तृत मे जानकारी हासिल करेंगे ।

मेरी आपसे बिनती हे की इस essay on holi in hindi को पढ़ने से पहले नीचे दियी गयी माहिती पढ़ कर ही आगे बढ़े क्यूकी बाद मे हम नहीं चाहते की आपको कोई प्रोब्लेम हो ।

आप लोग इस लेख को

होली पर निबंध 100, 200, 300 शब्दो मे (essay on holi in hindi of 250 words)

होली का महत्व पर निबंध  (holi essay in hindi for child)

essay on eco-friendly holi in hindi इन सभी के लिए उपयोग कर सकते हे ।

लेकिन आपके मनमे प्रश्न होता होगा की आखिर इन सब के लिए एक ही लेख कैसे काफी हे ?

तो मे आपको बता देना चाहता हु की हमने इसको अच्छी तरह जांच कर लिखा हे ताकि आपको निबंध, स्पीच, लेख ओर प्रोजेक्ट इन सभी के लिए अलग-अलग ढुढ्ना ओर कही ओर जाना न पड़े ।

तो चलिये शुरू करते हे ।

Introduction:

एक त्यौहार किसी भी व्यकती को उसके अंदर दबे हुए आंतरिक आनंद को पहचानने मे मदद करता है । ओर एसा ही एक त्यौहार होली का त्यौहार है ।

भारत के मुख्य त्यौहारों में होली एक लोकप्रिय त्यौहार है । होली देश के हर क्षेत्र में खुशियों का रंग भर देती है । इसीलिए तो होली को रंगो का त्योहार भी कहा जाता है ।

होली एक सांस्कृतिक त्यौहार के साथ-साथ हिंदू समुदाय का पारंपरिक त्योहार भी है ।

holi par ek nibandh

लेकिन एसा नहीं है की सिर्फ हिंदू धर्म के लोग ही होली को मनाते है । भारत मे सभी धर्म के लोग बहुत उत्साह और खुशी के साथ होली को मनाते है ।

क्योकि ये त्यौहार दुश्मनों को भी दोस्त बना देता है । होली के दिन हर व्यक्ति अपना ग़म भुला कर खुसी और उत्साह के साथ गले लगते हैं ओर इस से लोगों के बिच प्रेम बढ़ता है ।

इसीलिए तो पुरानी दुश्मनी भुला कर नए रिश्ते बनाने के त्यौहार को होली कहते है । होली प्रमुख रूप से भारत ओर नेपाल मे मनायी जाती है ।

होली का पर्व अधर्म पर धर्म की ओर असत्य पर सत्य की विजयी घोषणा करता है ।

होली कब मनाई जाती है ?

आप सभी के मनमे प्रश्न होता होगा की, होली कब मनाई जाती है ? कोनसे महीने मे मनाई जाती है ? तो चलिये जानते है ।

हिंदू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन महीने की पुर्णिमा को मनायी जाती है । फाल्गुन महीने में होली को मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहा जाता हैं ।

होली हर साल लगभग मार्च के महीने में होती है । लेकिन हमारे भारतीय लोग बसंत पंचमी की आरंभ से ही होली की तैयारी शुरू कर देते है ।

होली दो दिन का पर्व है, जिसमे पहले दिन को छोटी ओर दूसरी दिन को धुलेती कहा जाता है । छोटी के दिन होली को जलाई जाती है । इसीलिए छोटी को होलिका दहन भी कहा जाता है ।

धुलेती के दिन लोग एक दुसरे पर रंग लगाते हैं, लोग ढोल बजा कर होली के गीत गाते हैं ओर शाम को एक-दूसरे के घर जाकर मिठाई बाटते है ।

मावा और मैदा से बना गुझिया नामक पकवान होली का प्रमुख पकवान है । इस दिन चंदन ओर आम्र मंजरी को मिलाकर खाने का भी बड़ा माहात्म्य है ।

सही मे होली खुशहाली और मस्ती का प्रतीक ओर रंग और गुलाल का पर्व है ।

होली का इतिहास क्या है ?

हम सब को पता है की होली भारत का सबसे प्राचीन पर्व मे से एक है । होली त्योहार को प्राचीन काल मे काममहोत्सव, होलाका, वसंतोत्सव ओर होलिका नाम से भी जाना जाता था ।

भारत के कई इतिहासकारों का मानना है कि, आर्यों में भी होली पर्व का बहुत प्रचलन था । पुरातन धार्मिक पुस्तकों में हमे होली का वर्णन मिलता है । इसमे दो धार्मिक पुस्तके मुख्य है पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र

holi ka mahatva par nibandh

विंध्य क्षेत्र मे रामगढ़ नामक जगह पर ३०० वर्ष पुराने एक अभिलेख में होली का उल्लेख किया गया है ।

मुगल काल में भी इस त्यौहार के किस्से बड़े उत्सुकता जगाने वाले हैं । जैसे मुगल कल के सबसे बेहतरीन राजा अकबर का जोधाबाई के साथ ओर जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है ।

मंदिरों की दीवारों पर, प्राचीन चित्रों मे तथा भित्ति चित्रों मे भी मुगल कल से संबन्धित उत्सव के चित्र मिलते हैं ।

विजयनगर की राजधानी हंपी ओर अहमदनगर के कई जगहो पर राजकुमारों और राजकुमारियों को दासियों सहित होली के रंग में रंगते हुए दिखाया गया है ।

होली क्यों मनाई जाती है ?

अगर कोई भी व्यक्ति होली के बारे मे जानना चाहे तो उनका पहला प्रश्न यही योगा की आखिर होली क्यो मनाई जाती है ? होली की असलियत क्या है ? होली मनाने के कारण क्या है ?  

सबसे ज्यादा हिन्दू धर्म के लोग बड़े धूम-धाम से इस त्यौहार को मनाते है । बुराई पर अच्छाई की जीत ओर शैतानी शक्ति पर ईश्वरीय शक्ति की विजय के रूप में होली मनाई जाती है ।

holi manane ka karan

लेकिन गोपियों के साथ रासलीला करके कृष्ण ने होली के पर्व को रंगों के त्यौहार में बदल दिया था । इसीलिए होली का त्यौहार मनाया जाता है । लेकिन इस त्यौहार के पीछे ओर भी कई कहानिया शामिल है, जुड़ी हुई है । चलो बारी-बारी इन सब को जानते है ।

हिरण्यकशिपु ओर प्रहलाद :

इन में सबसे पहली ओर प्रसिद्ध कहानी प्रह्लाद की है । प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नामक एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था ।

वो अपने बल पर बहोत ज्यादा अहंकार करने लगा था ओर खुद को ही ईश्वर मानने लगा था । इसीलिए उसने अपने राज्य मे हाहाकार मचा दिया ओर अंत मे तो ईश्वर का नाम लेने पर भी पाबंदी लगा दी ।

लेकिन इसी राक्षस का एक पुत्र था जिसका नाम प्रहलाद था । हुआ यू की राक्षसी पुत्र प्रहलाद ईश्वर भक्ति था । जब ये बात हिरण्यकशिपु को पता चली तो उसने प्रहलाद को कठोर दंड दिए ।

ताकि वो ईश्वर की भक्ति छोड़ कर उसकी तरह शेतान बन जाए । किन्तु अब प्रहलाद के दिल मे ईश्वर बेठ चुके थे । इसीलिए उसने इतना कठोर दंड सह कर भी ईश्वर भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा ।

हिरण्यकशिपु ने प्रहलाद को मारने का काम अपनी बहन होलिका को सोंपा । होलिका को वरदान था की वो कभी भी आग में भस्म नहीं हो सकती ।

इसलिए वो प्रहलाद को गोद मे लेकर आग मे बेठेगी जिससे प्रहलाद तो जल जाएगा किन्तु होलिका को कुछ नहीं होगा ।

लेकिन जब होलिका आग मे बेठी तो प्रहलाद के बजाए वो जल गयी ओर प्रहलाद बच गया । उस दिन असत्य पर सत्य की जीत हुई ओर लोग प्रह्लाद की याद में होली को जलाते है ।

राधा और कृष्ण की कहानी :

कई लोगो का मानना है की होली का यह त्यौहार राधा और कृष्ण की प्रेम कहानी से जुडा हुआ है । मथुरा और वृन्दावन मे वसंत ऋतु मे कृष्ण ओर राधा एक दूसरे पर रंग डाला करते थे ।

लठमार होली जो बरसाने और नंदगाँव की होली देश विदेश में प्रसिद्ध है ।

होली उत्सव पर हम होली के साथ-साथ ईर्ष्या, द्वेष, संशय, अंहकार, अहम ओर वैर को भी जलाते है ।  

शिव, पार्वती और कामदेव की कहानी :

हिमालय पुत्री यानि पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी लेकिन शिवजी अपनी तपस्या में लीन थे । इसीलिए उन्होने कामदेव से सहायता मांगी ।

कामदेव बिना हिच-किचये तुरंत तैयार होगाए । कामदेव ने भगवान शिव पर पुष्प बाण चलाने का सोचा जिस से उनकी तपस्या भंग हो जाएगी । ओर कामदेव के पुष्प बान चलाने से उनकी तपस्या भंग हो गयी ।

शिवजी को तपस्या भंग हो जाने से बड़ा क्रोध आया और उन्होंने तीसरी आँख खोल दी जिस से कामदेव भस्म हो गये । लेकिन पार्वती की आराधना सफल हो गयी थी ।

इसीलिए उनको अपनी पत्नी के स्वरूप में स्वीकार कर लिया । बाद मे पार्वती ने विलाप कर लिया, जिस से शंकर भगवान ने कामदेव को जीवित कर दिया । इस अवसर को याद करके भी होली मनाई जाती है ।

कंस और पूतना की कहानी :

कुष्णभूमि मथुरा के राजा वसुदेव थे । कंस ने उन पर हमला कर राज्य को अपने अधीन कर लिया ओर स्वयं शासक बन गया ।

उसने लोगो पर कई आत्याचार किए । लेकिन एक भविष्यवाणी के मुताबिक वसुदेव और देवकी का आठवाँ पुत्र उसका विनाश करेगा ओर ये बात उसे पता चल गयी ।

यह बात जानकर कंस बड़ा व्याकुल हुआ और उसने वसुदेव तथा देवकी को जेल में डाल दिया । ताकि जब भी उनका कोई भी पुत्र जन्म ले तो इसे तुरंत मार दिया जाए । कंस ने इस तरह सात पुत्रों को मार दिया ।

किन्तु उनके आठवें पुत्र के रूप में कृष्ण का जन्म हुआ ओर उसी वक्त कारागार के सब द्वार खुल गए । वसुदेव ने रात को ही उनको गोकुल में नंद और यशोदा के घर रख दिया ओर उनकी नवजात कन्या को अपने साथ ले आए ।

जब कंस को पता चला की वसुदेव ओर देवकी के आठवे पुत्र ने जन्म ले लिया है तो उसने ने पुत्र को मारना चाहा लेकिन वो तो कन्या थी । फिर भी कंस ने बिना दया दिखाये उसको भी मारना चाहा ।

लेकिन वो अचानक अदृश्य हो गई और आकाश मे से आवाज़ आई कि कंस को मारने वाले वसूदव का पुत्र गोकुल में जन्म ले चुका है ।

कंस ने यह आकाशवाणी सुनते ही एक पूतना नामक राक्षसी को बुलाया ओर कहा की उस दिन गोकुल में जीतने भी बच्चो ने जन्म लिया हो उन सबको मार दो ।

उसने गोकुल मे कई बच्चो को मार दिया लेकिन जब उसने कुष्ण को मारने गयी तो वो जान गए की ये एक रक्षासी हे । फिर उन्होने उस राक्षसी का ही वध कर दिया ।

ओर एसी कई कहानिया-कथा होली जैसे प्यारे त्यौहार के साथ जुड़ी हुई है ।

होली कैसे मनाई जाती है ?

सामान्य तोर पर होली दो दिनों का त्यौहार है । पहले दिन होलिका जलाई जाती है ओर दुसरे दिन रंगो-गुलाल का खेल खेला जाता है ।

भारतवासी कई दिन पहले से ही इस पर्व की तैयारियाँ शुरू कर देते है । उपलों ओर लकड़ियों से बनी होली का सुबह से ही पूजन शुरू हो जाता है ।

holi ka itihas

होली के दिन किसी सार्वजनिक स्थल या घर के चोराहे पर झंडा या बड़ा डंडा गाड़ा जाता है । इसके बाद इसी डंडे को पूजा जाता है ओर जब होली का मुहूर्त हो जाए तब डंडे को निकाला जाता है ।

इस डंडे के चारों तरफ उपले ओर लकडियाँ जमा करके लकड़ियों पर आग लगाई जाती है । ओर इस तरह लोग होलिका का दहन करते है ।

कुछ प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक, जब हम होली को जलाते हे तब जिस दिशा मे होलि का धुआ जाता हे उस दिशा में फसल बहुत अच्छी होती है ।

होली का दहन करने के बाद बची हुई राख को अगर हम अपने माथे पर लगाए तो उसे धूलिवंदन कहा जाता है ।

किसान अपने खेत के कुछ दानें को इसी आग में सेकते हैं और सब में बांट देते हैं । कई लोग मानते हे की इस से मनुष्यो के बीच मिलन और भाईचारा बढ़ता है ।

दूसरे दिन की होली को हम धुलेती के नाम से जानते हैं । अगले दिन सुबह से ही हर उम्र के लोग रंगों के खेल खेलते हे ओर एक दूसरे पर रंग, अबीर, गुलाल आदि लगाते हैं । सभी जगह ढोल-नगारे बजा कर होली-धुलेटी के गीत गाये जाते हैं ।

उस दिन घरों में पकवान, खीर-पूरी, दही भल्ले, गुजिया, गुलाब जामुन और मिठाई बनाई जाती हैं ओर वही पकवानों से भोग लगाया जाता है ।

कुछ लोग अपने सबंधी, मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने निकल पड़ते हैं । उस दिन जब भी कोई व्यक्ति घर आए तो उसका स्वागत रंगों से करते है ।

होली के दिन सबसे ज्यादा मज़ा ओर सबसे ज्यादा खुश बच्चे ही होते है । बच्चे सुबह से ही पिचकारियों को अपने सिने से लगाए पूरा दिन सब पर रंग-बिरंगी पानी छोड़कर मस्ती करते हैं । उस दिन भारत के सारे स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों में छुट्टी होती है ।

होलि का दहन हमारे कुटुंब, समाज ओर देश की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक समान है ओर ये त्यौहार हमारे जीवन मे बहुत सारी खुशियां भर कर जाता है । होली यानि बुराइयों पर अच्छाइयों का विजय ।

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भारत की विभिन्न प्रसिद्ध होलियाँ :

भारत में कई राज्य है ओर सभी राज्यो मे कई सारे शहर ओर गाव है । इसीलिए होली का उत्सव भी भिन्नता के साथ मनाया जाता है ।

भारत मे सबसे लोकप्रिय ओर आकर्षण लेने वाली होली उत्तर प्रदेश की ब्रज की बरसाना लठमार होली है । यहा पे होली एक प्रेम का प्रतीक है ।

holi ki visheshtaye

इसमे पहले पुरुष महिलाओ पर रंग डालते हैं ओर पिचकारी से महिलाओं को भिगाते है । लेकिन महिलाएँ अपने बचाव के लिए उन्हें लाठियों से मारती हैं ।

जब ये होली खेली जाती है तब एक अद्भुत दृश्य रचाता है । मथुरा और वृंदावन में 15 दिनों तक इस तरह होली का त्यौहार मनाया जाता है ।

भारत के कई प्रदेशों मे ये प्रथा भी मोजूद जिसमे भाभी के द्वारा देवर को सताया जाता है उसमे हरियाणा राज्य की धुलंडी होली प्रथम स्थान पर है ।

होली के दिन भारत के कई राज्यो मे अलग-अलग कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है ।

होली के दिन गुजरात ओर महाराष्ट्र मे एक मक्खन से भरी मटकी को महिलाए बहोत ऊँचाई पर लगा देती हैं, उसके बाद पुरुष उस मटकी को फोड़ने का प्रयास करता हैं ।

इस तरह नांच गानो के साथ होली का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता हैं ।

महाराष्ट्र के कई प्रदेशों मे होली के पर्व पर सूखा गुलाल खेला जाता है । जब कि गोवा के शिमगो प्रदेश में उसी दिन जलूस निकाला जाता है ओर उसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है ।

पंजाब मे होली को होला मोहल्ला कहा जाता है । उस दिन पंजाब मे पुरुषो द्वारा शक्ति प्रदर्शन किया जाता है । दूसरे दिन से ही उनके धर्मस्थानो पर 6 दिवसीय मेला लगता है । इस मेले में पुरुष तीरंदाजी ओर घोड़े सवारी जैसे करतब दिखाते हैं ।

बंगाल और उड़ीसा जैसे राज्यो मे होली को डोल पूर्णिमा कहा जाता है । होली के दिन राधा ओर कृष्ण के भजन कीर्तन करते हुए पूरे गाव मे यात्रा निकाली जाती है ।

मणिपुर में होली को योसांग कहा जाता है । होली के त्यौहार पर मणिपुर में थबल चैंगबा नामक नृत्य का किया जाता है। यह पर्व अनेक तरह के प्रतियोगिता ओर नाच-गाने के साथ 6 दिन तक चलता रहता है ।

राजस्थान में तमाशा होली खेली जाती है । इसमें कुछ कलाकार नाटक की शैली में अपने हुनर प्रदर्शन करते हैं। मुख्य रूप से एसे नाटक सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर व्यंग्य करते है ।

छत्तीसगढ़ मे भी होली के दिन लोक गीत गाये जाते है ।

इस तरह होली देश में हर जगह, हर प्रांत, हर गाव, हर शहर, हर कबीला, हर समाज ओर हर कुटुंब मे मनाई जाती है । होली का पर्व भेदभाव को भुला कर खुशी और मित्रता को अपनाता है ।

(किस लिए बालदिन को मनाया जाता है जानने के लिए – clickhere)

भारत के अलग-अलग प्रदेशों में होली नाम :

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश – रंग पंचमी

उत्तर प्रदेश – लठ मार होली

उत्तराखंड – खड़ी होली

ओड़ीशा – दोल पुर्णिमा

पंजाब – होला मोहल्ला

मणिपुर – याओसांग

असम –फगुवाह

गोवा – शिगमों

होली जैसे विदेशी त्यौहार :

आपको लगता होगा की होली का त्यौहार सिर्फ भारत तक ही सीमित है, लेकिन एसा नहीं है । पूरे विश्व मे इस पर्व को धूम-धाम से मनाया जाता है । तो चलो कुछ देशो को जानते हे जहा होली की तरह ही कुछ उत्सवो को मनाया जाता है ।

उसमे सबसे पहला न्‍यूजीलैंड मे मनाया जाता वानाका उत्‍सव हे जो होली के जैसा ही है ।

वानाका उत्सव के दिन एक पार्क में शहर के सभी लोग जमा होते हैं ओर एक-दूसरे के शरीर पर पेंटिंग करते हैं । ये लोग खूब मस्ती भी करते है । ये उत्सव करीब 6 दिन तक चलता है ।

holi ki asliyat

थाईलैंड मे जब नया साल आता हे तब वहा के लोग सोंगकरन नामक एक पर्व को मानते है । इस पर्व के दौरान सभी लोग तालाब या नदी के पास जमा होकर एक-दूसरे पर पानी डालते हैं ।

वहा मोजूद सभी लोगो मे पता नहीं चल पाता की कोन बच्चा है या कोन बूढ़ा, कोन स्‍त्री है या कोन पुरुष । क्योकि सभी लोग एक रंग में रंग जाते हैं । ये पर्व सुबह के 3 बजे से शुरू होकर देर शाम तक चलता है ।

जापान मे भी मार्च-अप्रैल के महीने में चेरी ब्‍लॉसम सीजन उत्सव मनाया जाता है जो की बिलकुल होली की तरह है ।

पेरू में पांच दिन तक चलने वाले इनकान उत्‍सव भी होली के जैसा है । इस दिन पेरु के लोग ड्रम बजाकर नृत्‍य करते है ओर रंगीन कपड़े पहन कर में शहर में घूमते हैं ।

इसके अलावा चीन मे पनि फेंकने का उत्‍सव ओर तिब्‍बत मे स्‍नान पर्व भी होली के समान है ।

(ये निबंध पढ़ कर अपने शिक्षको को जरूर share करे – click here

होली का महत्व :

हम ने सब जान लिया की होली कैसे मनाते है ? कहा मनाते है ? क्या विधि है ? लेकिन इन सब का महत्व क्या है ? क्या आपको नहीं लगता की ये सिर्फ पैसे, पानि ओर समय की बरबादी है ?

लेकिन मे इसका जवाब आपको कुछ अलग अंदाज मे देना चाहता हु । तो चलिये जानते है । ( सिर्फ इस टॉपक को आप एक निबंध के तोर पर भी लिख सकते है जैसे – होली का महत्व पर निबंध )

होली का त्यौहार भारतीयो में जोश और उमंग भर देता है । क्योकि इससे लोगों के बिच प्यार बढ़ता है । लोग बहुत ही हर्षोल्लास से अपने परिवार, रिश्तेदार ओर दोस्तों के साथ मिल कर के इस प्यारे त्यौहार को मनाते हैं ।

holi ke bare me jankari

होली के दिन हर व्यक्ति अपनी नफरत, नाराजगी, गम और ईर्षा को भुला कर एक-दुसरे के साथ नए रिश्ते बनाते है । यह पर्व सामाजिक बुराई को मिटा देता है जैसे पंथवाद, जातिवाद ओर रंगवाद

कई लोग यह भी मानते है की, जब होली को जला कर कोई व्यक्ति शाम को पारंपरिक रस्म निभाता है तो उसके जीवन मे आने वाली सभी नकारात्मक चीजें दूर हो जाती है ।

Conclusion:

इस दिन हर भारतीय चाहे छोटे हो या बड़ा, इन सभी को एक-दूसरे के गले मिलकर एकता का उदाहरण देना चाहिए । तभी असली अर्थ में इस त्यौहार को मनाना सार्थक हो पायेगा ।

नहीं तो इस दुनिया मे चारो तरफ द्वेष, अहंकार, नफरत और विषमता तो हे ही । होली वह पर्व है जो भाईचारा, एकता, प्रेम और खुशी देता है । इसीलिए तो बुराई पर अच्छाई की जीत को होली कहा जाता है ।

लेकिन एक बात मे आप सभी को बताना चाहता हु की, जब भी आप होली खेले तो हमें खतरनाक रंगों के बजाए पर गुलाल का प्रयोग करना चाहिए ।

holi ki paribhasha

क्योकि एसे रंग शरीर की त्वचा और आँखों के लिए बहोत हानिकारक होते है । इसके बजाए जब हम गुलाल का उपयोग करे तो वो शरीर ओर पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित होता हैं ।

आखिर मे आपसे पूछना चाहता हु की, क्या अब आप लोगो को होली के बारे मे समज आयी या नहीं ? इसका जवाब मुजे yes ओर no मे comment मे जरूर दे ।

आपको ये लेख यानि essay on holi in hindi कैसा लगा । हमने पूरी कोशिस की है ताकी आपको इस त्यौहार के बारे मे सब माहिती दे सके ।

आज के समय में हमारे देश के भटके हुए युवाओं को इस त्यौहार के महत्व के बारे में हमे बताना चाहिए ताकि उनके विचारो को हम बदल सके ।

इसीलिए essay on holi in hindi पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्त-रिश्तेदारों मे share करे ।

Thanks to all my readers

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