अनुशासन पर एक कडक निबंध- Anushasan Essay in Hindi

दोस्तो, आज हम अनुशासन पर निबंध (Anushasan Essay in Hindi) को विस्तृत मे जानेगे । यह निबंध आपको स्कूल के हर क्लास ओर कॉलेज मे काम आने वाला है ।

हम इस निबंध मे जानेगे की आखिर क्यो अनुशासन को सफलता की कुंजी कहा जाता है ? क्यो एक सफल व्यक्ति के पीछे अनुशासन का हाथ होता है ।

यह निबंध आपको अभ्यास मे तो काम आएगा ही, लेकिन आपके जीवन को भी इस से बहोत फाइदा होगा ।

हम पर भरोसा करें, अनुशासन पर निबंध को पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है ।

 

Anushasan ka Mahatva- अनुशासन पर निबंध

 

प्रस्तावना :-

अनुशासन यानि समय के हर पल-पल का सही उपयोग करना । इतिहास गवाह हे की जिसने भी अनुशासन को अपनाया आज उनका नाम बड़ी शान से लिया जाता है ।

इसीलिए दुनिया के किसी भी मनुस्य को अगर अपना जीवन खुशहाली से जीना है, तो उसे अनुशासन अपनाना ही होगा ।

और आज के इस आधुनिक युग मे अनुशासन के बिना सुखी जीवन की कल्पना करना थोड़ा मुश्किल है । क्योकि आज हर क्षेत्र मे आपके हजारो-लाखो प्रतियोगी मिल जाएंगे ।

ये सभी लोग एक साथ तो सफल हो नहीं सकता । इसीलिए इन लाखो लोगो मे वही लोग सफल होंगे जो कडा अनुशासन पालन करते होंगे ।

इसी वजह से ज़िंदगी के सभी पहलू मे अनुशासन बहोत मूल्यवान और जरूरी है ।

अनुशासन का अर्थ क्या है ?

अनु+शासन = अनुशासन, यानि की अनु और शासन शब्दो को मिलाकर अनुशासन शब्द बनता है । इसमे अनु का अर्थ होता हे पालन और शासन का अर्थ होता हे नियम । इस तरह अनुशासन का अर्थ होता हे नियमों का पालन करना

सुबह से लेकर रात तक हर कार्य को एक नियम के तहत करना इसे अनुशासन कहते है ।

इसे खुद पर शासन करना भी कहा जाता है । क्योकि जब आप नियमित और सही रूप से नियमो का पालन करते हे तब आपका दिमाग और शरीर आपके नियंत्रण मे रहता है ।  

अंग्रेजी मे इसे डिसिप्लिन(Discipline) कहा जाता है । डिसिप्लिन शब्द डिसाइपल से बना हे जिसका अर्थ शिष्यो से आज्ञा का अनुसरण करने की अपेक्षा करना होता है ।

anushasan ka mahatva

और संस्कृत मे अनुशासन को शास धातु कहा जाता है । इसका अर्थ होता हे नियमों का पालन करना ।

अनुशासन को साधारण भाषा मे समजे तो, किसी भी काम या कार्य को नियमबद्ध और व्यवस्थित तरीके से करने को अनुशासन कहा जाता है ।

दुनिया के किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए उसके नियमो का सही समय पर पालन करना बहोत जरूरी है । और इसे ही अनुशासन कहते है ।

अनुशासन एक एसी सीढ़ी हे जिसके जरिये हम आसानी से सफलता की मंजिल तक पहोंच सकते है ।

हमारे प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने अनुशासन के बारे मे क्या खूब कहा था कि अनुशासन ही देश को जीवित रख सकता है ।

हमारे देश के लिए अनुशासन उतना ही महत्व हे जितना हमारे शरीर के लिए रक्त (रुधिर) ।

लेकिन वर्तमान मे लोगो ने अनुशासन की अलग ही व्याख्या बना रखी है । आज के युग मे नियम के पीछे चलने को ही अनुशासन कहते है । जबकि समय, परिस्थिति ओर स्थान के अनुसार सही चलने का नाम अनुशासन है ।

हमारे महात्मा गांधीने क्या खूब लिखा था की, अनुशासन हमेशा विपत्ति की पाठशालाओ मे सिखा जाता है ।

अनुशासन के प्रकार क्या है ?

अनुशासन हमे बाहरी समाज, कुटुंब और परिवार द्वारा मिलता है । लेकिन हमारे अंदर से भी अनुशासन की भावना उत्पन्न होती है । इन दोनों तरीको से हमे कई प्रकार का अनुशासन मिलता है ।

उसमे सबसे पहला हे सकारात्मक अनुशासन । इस अनुशासन से व्यक्ति के अंदर एक तरह का सकारात्मक विचार उत्पन्न होता है ।  

जैसे की एक बच्चे को उसके माता-पिता द्वारा यह सिखाया जाए की, किसी समस्या को सकारात्मक रूप से कैसे सुलझाना है ।

अनुशासन सिखाने के लिए माता-पिता अपने बच्चो को शिक्षण संस्थाओ मे भेजते है । यह भी सकारात्मक अनुशासन मे शामिल है ।

anushasan par nibandh

दूसरा है नकारात्मक अनुशासन । किसी व्यक्ति को गलत आदेश देकर उन्हे हमारे नियमो को पालन करने के लिए मजबूर करना इसे नकारात्मक अनुशासन कहा जाता है ।

इसके अलावा अगर हमारे आस-पास का कोई व्यक्ति गलत काम कर रहा हे तो उसका हम पर गलत प्रभाव पड़ता है ।

तीसरा है सीमा आधारित अनुशासन । इसका साधारण सा मतलब यह हे की हमारे समाज, कुटुंब और परिवार ने हम सब के लिए कुछ सिमाए या कुछ नियम निर्धारित कीये है ।

अगर हम उन सीमाओ या नियमो को पार करते हे तो उसका परिणाम हमे खुद भुगतना होगा ।

इस अनुशासन के कारण बच्चे हमारे आज्ञाकारी होते है । और उनके व्यवहार मे सकारात्मकता आ जाती है । (Anushasan Essay in Hindi)

चोथा है व्यवहार आधारित अनुशासन । यह अनुशासन मुख्य तोर पर हमारे व्यवहार पर आधारित होता है । अगर हमारा व्यवहार अच्छा तो हमे प्रशंसा और पुरस्कार मिलते है ।

लेकिन अगर हमारा व्यवहार नकारात्मक और खराब हे तो इसके परिणाम हमारे लिए बहोत नुकसानदायक होंगे ।

अंतिम और पांचवां अनुशासन है आत्म अनुशासन । आत्म अनुशासन यानि हमारे मन और आत्मा को अनुशासित करना ।

अगर हमारा मन और आत्मा अनुशासन मे होगा तो हमारा शरीर हमारे नियंत्रण मे होगा । और अंत मे हमारे विचार और हमारे कार्य दोनों अपने आप ही अच्छे हो जाएंगे ।

इस तरह हमने अनुशासन के पाँच प्रकारो को जाना । अगर हमने इतने अनुशासन अपने जीवन मे अपना लिए तो हमे सफल होने से कोई रोक नहीं सकता ।

आखिर हमे अनुशासन की आवश्यकता क्यों है ?

आप एक बार कल्पना कीजिए की, यदि कोई भी व्यक्ति हमारे देश का संविधान और कानून का पालन न करे तो क्या होगा ?

इसके परिणाम कुछ इस तरह होगे की देश मे हर जगह अपराध का दर बढ़ जाएगा । हर जगह दुर्घटनाओ का माहौल होगा ।

विद्यालय के छात्र आपस में लड़ाई कर रहे होंगे, शिक्षकों का कोई मूल्य नहीं होगा । उनकी बात को कोई मानने के लिए तैयार नहीं होगा । पढ़ाई का तो नामो-निशान नहीं होगा ।

एसे व्यक्ति फिर असफलता, आलस्य और हार से टकराएँगे । इनका कोई सम्मान नहीं करेगा ।

anushasan ka mahatva in hindi

आप सोचिए एक बार की हमारे देश की स्थिति कितनी खतरनाक और भयानक होगी । इसी भयानक स्थिति से हमारे देश को बचाने के लिए हमे हर पल अनुशासन की आवश्यकता है ।

इसीलिए हमे बचपन से ही अनुशासन का पाठ सिखाया जाता है । क्योकि जीवन के हर पहलू मे अनुशासन की हमे जरूरत पड़ती है । (Anushasan Essay in Hindi)

दुनिया के सभी संगठन एक अनुशासन का पालन कर रहे है । अगर इसमे कोई जरा भी अनुशासन की छूट दे तो वो संस्था और संगठन का ज्यादा समय तक टिकना थोड़ा मुश्किल हो जाता है ।

क्योकि फिर लोग अपनी मनमानी करने लगते है । वो सबसे पहले अपने स्वार्थ को देखते है । लेकिन जहा अनुशासन आता हे वहा ये लोग चुप हो जाते है ।

देश के संविधान को नागरिको द्वारा सही तरीके से पालन करना और विद्यालय के नियमो को छात्रों और शिक्षकों द्वारा पालन करना भी एक अनुशासन ही है ।

अनुशासन के लाभ क्या है ?

किसी ने क्या खूब कहा हे कि, आप चाहे कितने भी बुद्धिमान और गुणवान क्यो न हो । लेकिन अगर आपके पास अनुशासन की कमी हे तो वो आपको असफल बना देगी ।

अनुशासन की वजह से ही हमे दुनिया के सबसे अमीर आदमी जेफ बेजोस, दुनिया के सबसे क्रांतिकारी व्यक्ति महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला जैसे लोग मिले ।

इन सब की तरह अगर हमे भी सफलता की ऊँचाइयों तक पहुंचना हे तो अनुशासन को अपनाना ही होगा ।

और अनुशासन के अपनाने से हमे कोई नुकसान नहीं होगा । इसके फायदे-ही-फायदे है । तो चलिये इसके फ़ायदों को हम जल्दी से जानते है ।

इसका सबसे पहला फायदा यह हे की हम अपने काम और लक्ष्य के प्रति पूरा ध्यान केंद्रित कर सकते है । (Anushasan Essay in Hindi)

अनुशासित व्यक्ति का लक्ष्य मजबूत और केंद्रित होता है । वो अपना काम सही समय पर करना जानते है ।

वो आसानी से अपने दिल और दिमाग को नियंत्रण कर सकते है । और इसके कारण मानसिक तनाव की समस्या मे भी घटती है ।

vidhyarthi our anushasan

इसके अलावा अनुशासित व्यक्ति को एक सम्मान मिलता है । एसा माना जाता हे की, अगर आप अनुशासन मे रहते हो तो अन्य व्यक्तियो की नजर में आप एक सम्मान के पात्र बन जाते हो ।

इस से समाज मे कई लोग आपको प्रेरणास्रोत मानने लगते है । कई लोगो को सम्मान पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है । लेकिन अनुशासीत व्यक्ति को सम्मान अपने आप मिलता है ।

इसके अलावा अनुशासित व्यक्ति हमेशा स्वस्थ रहता है । क्योकि उनके हर कार्य नियमित होते है । जैसे की सोना,(नींद) नहाना, खाना, दवा, व्यायाम करना आदि कार्य सही समय करते है ।

समय पर दवा और व्यायाम से कोई भी पुरानी बीमारी ठीक हो सकती है । और समय पर भोजन लेना चाहिए क्योकि वो भी एक दवा ही है ।

अनुशासन हमारे अंदर सकारात्मक दृष्टिकोण लाता है । अनुशासित व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास और उत्साह कूट-कूट कर भरा रहता है ।

आपका जीवन सक्रिय रहता है । एसे व्यक्तियों से आलस और बुरी लते कोषों दूर रहती है ।

वो अपनी हर बात को बड़ी सावधानी से कहते है । कई बार लोगो का व्यवहार ही उनको मूर्खतापूर्ण समस्याओ से बचाता है । लेकिन एसे लोग अपने मन पर बहोत नियंत्रण रखते है ।

अनुशासित व्यक्ति अपने लक्ष्य तक बहोत जल्दी पहोंच जाता है । क्योकि उसके पास कडक अनुशासन है । (Anushasan Essay in Hindi)

वो अपना एक पल भी जाया नहीं करता । इसी कारण वो दूसरो की तुलना में तेजी से लक्ष्य प्राप्त कर सकता है ।

इसके अलावा आप भी समज सकते हो की एक अनुशासन पालन करने वाले व्यक्ति के पास एक अनुशासनहीन व्यक्ति की तुलना में ज्यादा समय होता है ।

क्योकि वो हर काम समय पे कर लेते है । जिसके कारण उनको कभी भी समय की कमी नहीं रहती । अनुशासीत व्यक्ति हमेशा तनाव मुक्त रेहता है ।

अनुशासन सीखे कैसे ? 

हमने यह तो जान लिया की अनुशासन क्या है और इस से एक व्यक्ति को कितना फाइदा होता है ।

लेकिन अगर आप अनुशासित व्यकती नहीं हो और आपको अब अनुशासन सीखना चाहते हो तो क्या करना पड़ेगा ? वो हम अब जानेगे ।

सबसे पहले हमे अनुशासन सीखने की शुरुआत अपने घर से करनी चाहिए ।

अपने माता-पिता, घर के बड़े-बुजुर्ग और विद्यालय के शिक्षको की आज्ञा का हमे पालन करना चाहिए । हमे एसे लोगो के अनुभव, सफलता और असफलताओ से बहुत कुछ सीखना चाहिए ।

हमे अपने सभी कार्यो को पूरी लगन और मेहनत के साथ समय पर पूरा करना चाहिए । अगर अनुशासन को सीखना हे तो हमे एक अच्छी दिनचर्या को पालन करना होगा ।

vidhyarthi our anushasan par nibandh

बुरे काम, बुरी आदतो और बुरे लोगो से हमे बहोत दूर रहना चाहिए । (Anushasan Essay in Hindi)

हमारी कुदरत यानि प्रकृति से हम समय का सही उपयोग करना सीख सकते है । क्योकि सभी मौसम अपने समय पर आते हे और समय पर चले जाते है । इसी कारण हमारी पृथ्वी का संतुलन बना हुआ है ।

हमे भी इस दुनिया मे रहने के लिए प्रकृति जैसी अनुशासन की आवश्यकता होती है ।

पर्यावरण, माता-पिता, शिक्षक, समाज, परिवार, कुटुंब आदि के प्रति हमारी बहुत सारी जिम्मेदारिया होती है । एसी जिम्मेदारियो को हमे समझकर अपने कर्तव्यो का पालन करना होगा ।

हम अनुशासन की आवश्यकता और महत्व को जानना होगा । हमारी जिम्मेदारियो को समजना होगा । और अनुशासन का कडा पालन करके अपने जीवन को सफल बनाना होगा ।

अपने आस-पास हो रही हर चीज़ को हमे बहोत ध्यान से देखना होगा । क्योकि दुनिया की हर चीज हमे कुछ-न-कुछ सबक जरूर देती है ।

अगर पूरे देश मे हमे अनुशासन की स्थापना करनी हे तो हमे नैतिक और चारित्रिक दोनों शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा ।

तभी हम छात्रो के अंदर साहस, उत्साह, धर्य, विश्वास और कर्तव्य परायणता जैसे गुण को ला पाएंगे ।

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व :-

अगर आपको अनुशासन का महत्व पूछना हे तो एसे लोगो से पूछिये जिनहोने अपनी ज़िंदगी मे कुछ बड़ा किया हो ।

जब आप बिल गेट्स, हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी जैसे लोगो के जीवनचरित्र पढ़ेंगे तो आपको कही-न-कही अनुशासन जैसा शब्द जरूर मिलेगा ।

जब इतने बड़े लोग अनुशासन को महत्व दे तो इसमे कुछ तो बात होगी । आप चाहे छात्र हो या शिक्षक, नेता हो या व्यापारी आपको हर जगह अनुशासन की आवश्यकता पड़ेगी ।

एक विद्यार्थी का जीवन किसी भी देश, समाज और मनुष्य का भविष्य तय करता है । इसीलिए विध्यार्थीओ को अनुशासन का महत्व समजाना जरूरी है ।

किसी विध्यार्थी को सिर्फ शिक्षा देना जरूरी नहीं है । उनको अनुशासन भी सीखना चाहिए । इसीलिए तो कहा जाता हे की अनुशासन के बिना शिक्षा अधूरी है ।

जब एक विध्यार्थी समय पर उठकर सुबह स्नान करता हे और समय पर स्कूल जाता है । तो कक्षा मे मन लगाकर पढ़ाइ करता हे तो उसे हर विषय और पाठ्यक्रम को समजने मे मदद मिलती है ।

और ये सब कुछ जब एक छात्र समय पर करे उसे कभी परीक्षा का टेंशन और तनाव नहीं होगा ।

जब छात्रो को कोई मानसिक तनाव नहीं होगा तो वो हमेशा स्वस्थ रहेंगे । उनका मन शांत और शरीर स्वस्थ रहेगा । वो बड़ो का आदर करेंगे और उनकी बातों का अनुसरण करेंगे ।

इसी कारण एक छात्र को बचपन से ही अनुशासन सिखाया जाता है । लेकिन जिस बच्चे ने अनुशासन को अपनाया वो फायदेमंद रेहता है । (Anushasan Essay in Hindi)

और जिसने अनुशासनहीनता को अपनाया उनका भविष्य बहोत खतरनाक और डरावना हो जाता है । छात्रो द्वारा अनुशासनहीनता को अपनाने के पीछे भी कुछ कारण है ।

उसमे सबसे पहला कारण माता-पिता की बच्चो के प्रति ढीलाई । क्योंकि उनके ही संस्कार बच्चो पर पड़ते है । उनकी सबसे पहली पाठशाला उनका घर और पहले गुरु उनके माता-पिता है ।

अगर उनको घर मे ही अच्छे संस्कार ना मिले तो बाहरी स्कूल और कॉलेज क्या कर लेंगे । फिर वही बच्चे बड़े होकर अपने माँ-बाप के साथ ही गंदे व्यवहार करते है ।

तब उनको पता चलता हे की शायद हमने बचपन मे ही उसे अच्छे संस्कार दिये होते तो आज यह दिन देखना ना पड़ता । लेकिन अब पछतावे क्या होत, जब चिड़िया चुग है खेत । (Anushasan Essay in Hindi)

निष्कर्ष :-

इस पूरे निबंध से हमने यह तो सीखा की बिना अनुशासन के सफल होना किसी भी मनुष्य के लिए थोड़ा मुश्किल है । क्योकि हर सफल आदमी के पीछे अनुशासन नाम का शब्द जुड़ा ही होता है ।

और आपको अपने प्रश्न का जवाब भी मिल गया होगा की आखिर क्यो अनुशासन को सफलता की कुंजी कहा जाता है ? 

लेकिन अगर आपके अंदर अनुशासन नहीं हे तो इस निबंध को पढ़ने के बाद क्या अब आप अनुशासन को अपनाएँगे ? क्या अब आप अपने माता-पिता और बड़े-बुजुर्गो को आदर देंगे ?

क्या अब आप नियमित पढ़ाई करेंगे ? और क्या अब आप अपने देश के आगे बढ़ाने का विचार करेंगे ? ये सारे प्रश्न के जवाब कॉमेंट मे आप मुजे yes or no मे जरूर दे ।

अब मे आखिर मे आपसे पूछना चाहता हु की आपको ये अनुशासन पर निबंध (Anushasan Essay in Hindi) कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे Anushasan Essay in Hindi को दे सके ।

लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email जरूर करे । आपको और भी किसी विषय पर निबंध चाहिए तो कॉमेंट मे जरूर बताए ।

और अगर आपको लगता हे की हमारे आस-पास कोई एसा व्यक्ति हे जो अनुशासनहीन हे, तो उस व्यक्ति तक यह निबंध जरूर पहुंचाए । और अपने दोस्त-यारो तक भी यह निबंध शेर जरूर करे । (please share)

Thanks for reading Anushasan Essay in Hindi

 

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