दहेज प्रथा पर निबंध (कष्ट) – Essay on dowry system in Hindi

दोस्तो, आज हम दहेज प्रथा पर निबंध (Essay on dowry system in Hindi) को विस्तृत मे जानेगे ।

यह निबंध आपको स्कूल के हर क्लास ओर कॉलेज मे काम आने वाला है । हम इस निबंध मे समाज के कुरिवाज और महिलाओ पर हो रहे आत्याचार के बारे मे जानेंगे ।

एक महिला को बिना दहेज के कितना जेलना पड़ता है ? और कैसे लोग इस दहेज के कारण बेटियो को जिंदा जला देते है ?

हम इस निबंध मे कुछ उपाय भी बताएँगे की कैसे इस कुरिवाज को रोका जाए ?

हम पर भरोसा करें, दहेज प्रथा पर निबंध को पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है ।

 

about dowry system in Hindi- दहेज प्रथा पर निबंध

 

प्रस्तावना :-

कई सालो पहले एक महिला को उसके शादी के दिन कुछ भेंट-उपहार दिये जाते थे । लेकिन बदलते समय लोगो के अंदर लालच जागी और इस प्रथा ने एक बुराई का रूप धारण कर लिया । जिसे आज हम दहेज के नाम से जानते है ।

दहेज को सामान्य भाषा मे समजे तो, शादी के दौरान एक लड़की को उसके परिवार द्वारा पैसे, संपत्ति, आभूषण और अन्य कीमती वस्तुए दूल्हे के परिवार को देना इसी को दहेज कहते है ।

भारत में यह प्रथा सदियों से चली आ रही है । कई समाज द्वारा इसकी निंदा भी की जाती है लेकिन कई समाज आज भी दहेज के बिना महिला को नही अपनाते ।

इसी के कारण योग्य महिलाए को अयोग्य पति के साथ शादी करनी पड़ती है ।दहेज के इन भूखे व्यक्तियो के कारण ही गरीब परिवार अपनी बेटियों का विवाह नही करपाता ।  

दहेज प्रथा का अर्थ :-

दहेज शब्द की उत्पती अरबी भाषा मे हुई थी । उसके बाद यह शब्द रूपांतरित होकर उर्दू और हिंदी भाषा में आया है । दहेज का अर्थ होता है सौगात यानि भेट-उपहार ।

दहेज को आप एक सामाजिक अभिशाप भी समज सकते हो । क्योकि यहा पर एक महिलाका विवाह ना होकर उसका सोदा हो रहा है । अगर आपको अपनी बेटी की शादी करवानी हे तो आपको दहेज देना ही पड़ेगा ।

भले ही हमारे देश मे ये प्रथा गैर कानूनी है । लेकिन आज भी हमारे परिवार और समाज मे ये प्रथा खुली तौर पर चल रही है ।

about dowry system in hindi

दहेज का साधारण सा अर्थ यह हे की लड़के का मूल्य लड़की से ज्यादा है । और दोनों के मूल्य को समान करने के लिए लड़की वालो को पैसे, आभूषण, जमीन और भी कई प्रकार की चिजे देनी पड़ती है । नहीं तो लड़कियो की शादी नहीं हो पाती ।

लेकिन हमे यह नहीं भूलना चाहिए की, एसी नीच सोच हमारे देश के भविष्य को खराब कर रही है । यह हमारे देश के विकास और उन्नति पर एक बड़ा तमाचा है ।

इसीलिए तो हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने कहा था की, जो भी पुरुष दहेज को अपने विवाह के लिए जरुरी शर्त बनाता हे वो अपने देश की शिक्षा को बदनाम और महिलाओ का अपमान कर रहा है ।

इस बात को गाँधीजी ने आजादी से पहले कही थी । लेकिन आजादी के इतने सालो बाद भी ये प्रथा को बड़े जोरों-शोरों से निभायी जाती है ।

लेकिन कई जगहो पे दहेज को इसलिए महत्व दिया जाता हे ताकी पति-पत्नी दोनों अपने नए जीवन की शुरुआत करे । लेकिन वर्तमान मे एसा विचार करने वाले लोग बहोत कम है।

दहेज प्रथा का इतिहास ?

हम सबको पता हे की हमारा समाज पुरुष प्रधान है । बचपन से ही महलाओ के ये कहा जाता हे की लडके ही हर जगह प्रधान है । इसीलिए एक औरत को पुरुष का सम्मान करना चाहिए ।

इसी सम्मान की वजह से महिलाए अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार को सहन करती है । इसी अत्याचार को सहन करते-करते इस दहेज प्रथा का जन्म हुआ ।

essay on dahej pratha in hindi

आपको लगता होगा की यह प्रथा कुछ सालो पहले ही किसी की बनाई चाल थी, जिस से वो लोग धन लूट पाये । लेकिन एसा नहीं है ।

यह प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है । ऋगवैदिक काल मे तो नही लेकिन उत्तरवैदिक काल मे इस प्रथा का थोड़ा-थोड़ा प्रचलन शुरू हुआ था ।

परंतु इसका स्वरूप आज की दहेज प्रथा से बिलकुल अलग था । क्योकि उस समय महिलाओ को उसके पिता द्वारा कुछ भेट-उपहार दिये जाते है ।

पिता द्वारा जो भी उपहार दिये जाते उसे वर पक्ष खुशी-खुशी स्वीकार कर लेता । और इन सारे उपहार पर आधिकार सिर्फ उस दुल्हन का होता था ।

लेकिन समय धीरे-धीरे चलता गया और मध्य काल में इस प्रथा को स्त्रीधन का नाम मिला । इस समय पिता को अपनी काबीलियत और योग्यता को देखकर बेटी को धन या उपहार देना पड़ता ।

किन्तु इस समय भी इस प्रथा का उदेश्य यह था की किसी परेशानी में बेटी को यह धन काम आएगा । इस समय मे भी बेटी के धन पर ससुरालवालो का कोई संबंध नही था ।

लेकिन आधुनिक काल मे यानि वर्तमान समय में इस प्रथा ने खतरनाक रूप ग्रहण कर लिया है । क्योकि आज एक माता-पिता को अपनी लड़की की शादी करने के लिए दहेज मे धन देना ही पड़ता है ।

और उनके धन-दौलत पर ही ये निर्भर करता हे की उनको कैसा दामाद मिलेगा । अगर धन नहीं हे तो ससुराल मे लड़कियो को मारा जाता है और उनको हद से ज्यादा परेशान किया जाता है ।

प्राचीन प्रथा के नाम पर लड़की के परिवार वालों पर दबाव डाला जाता है । एसे लोगो का मानना हे की, धन और भेट-सौगात देंगे तो समाज मे उनका मान-सम्मान बढ़ेगा । और साथ-साथ बेटी को भी एक अच्छा जीवन मिलेगा ।

किन्तु हर परिवार तो सुखी और अमीर नहीं हो सकता । और एसे परिवारों को अपनी बेटियो का विवाह करना बहुत मुश्किल हो जाता है ।

एसे परिवार जानते हे कि अगर बिना दहेज के विवाह किया तो ससुरालवाले हमारी बेटी का जीना मुश्किल कर देंगे ।

भारत के सबसे बड़े पौराणिक ग्रंथ रामायण और महाभारत मे भी माता-पिता द्वारा बेटियो को दहेज देने का उदाहरण मिलता है ।

क्या दहेज प्रथा से कोई लाभ होता है ?

कई लोग इस गेरकानूनी कार्य को लाभकारी भी बताते है । उनका यह मानना हे की एक नया दंपति इस दिनों स्वतंत्र रहना ज्यादा पसंद करता है ।

इस वक्त पति-पत्नी दोनों अपने नए जीवन की शुरूआत करते है । परंतु इस समय वो आर्थिक रूप से इतने अच्छे ना होने की वजह से ज्यादा खर्चे एक बार में नहीं कर सकते ।

dahej pratha par nibandh

इसीलिए अगर दहेज मे कुछ पैसे, फर्नीचर और अन्य कुछ घर काम की चिजे मिल जाए तो शुरुआती जीवन मे उनको सहायता मिल जाती है ।  

लेकिन खर्चे का सारा बोज लड़की के परिवार पर ही क्यो डाला जाता है, ये प्रश्न हमे इन लोगो से पूछने की जरूरत है । अगर दोनों परिवार खर्चा करे तो किसी को भी ज्यादा निवेश नहीं करना पड़ेगा । लेकिन वर्तमान मे एसी मानसिकता वाले लोग भी बहोत कम है ।

कई लोगो का यह भी कहना है कि जो लड़किया अपंग हो या कुछ ओर शरीर की समस्या हो या दिखने मे अच्छी ना हो तो इनको पति मिलना थोड़ा मुश्किल हो जाता है ।

एसी लड़कियो की शादी कराने के लिए लड़के वालो को दहेज की लालच दी जाती है । अगर किसी को बहोत ज्यादा धन-दोलत मिले तो क्यू शादी नहीं करेगा ?

तो दहेज से एसी महिलाओ का फाइदा होता हे एसा लोगो का मानना है । और अब तों लोग यह भी मानते हे की दहेज देने से लड़की के परिवार वालो का समाज मे सम्मान बढ़ेगा । और इस खतरनाक बीमारी को भी लाभकारी बता रहे है ।

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दहेज प्रथा के कारण क्या है ?

किसी ने क्या खूब लिखा हे की, समाज जिसे अपना ले वह दोष भी गुण मे बदल जाता है । और इसका सीधा सा उदाहरण है दहेज ।

हमारे समाज ने एक कुरिवाज को अपने लाभ के लिए अपना लिया । जिसके कारण आज न जाने कितनी बेटियो की ज़िंदगी बर्बाद हो गयी है ।

लेकिन वो कोनसे कारण थे, जिनकी वजह से यह प्रथा हमारे देश मे बहोत जड़ तक पहोंच गयी । चलिये जानते है ।

दहेज को बढ़ावा देने वाले सबसे पहला कारण पुराने रीति रिवाज है । यह दहेज पाने का सबसे आसान तरीका है ।

अगर लड़की वाले दहेज देने से मना करे तो सिर्फ आपको यह कहना हे की यह तो हमारे पूर्वजो की परंपरा है । इसीलिए आपको दहेज देना ही पड़ेगा, नहीं तो हम शादी नहीं करेगे।

अंत मे लड़की वालो के पास कोई रास्ता नहीं होता और वो दहेज दे देते है ।

लेकिन एसे हरामि लोगो को कोन समजाए की, हमारे पूर्वजो के समय दहेज नहीं इच्छा अनुसार उपहार दिये जाते थे । लेकिन इन राक्षसो ने इस प्रथा को अपने स्वार्थ के लिए उपयोग किया है ।

dahej pratha ke karan

दहेज को बढ़ावा देने वाला दूसरा कारण हमारा पुरुष प्रधान समाज है । पुरुष प्रधान समाज यानि एसा समाज जहा एक महिला को अपनी बात रखने का कोई अधिकार नही होता ।

एसे समाज मे महिलाओ का मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से शोषण होता है । उन्हें अपने घर से दहेज लाने के लिए प्रताड़ित किया जाता है । और उसके विरुद्ध मे महिला आवाज़ भी नहीं उठा सकती ।

अशिक्षा भी दहेज को फैलाने वाला बड़ा कारण है । अशिक्षित लोगो की संख्या भारत मे बहोत बड़ी है । और एसे लोगो की सोच अंधविश्वास को परखने मे धोका खा जाती है । (दहेज प्रथा पर निबंध)

बिना पढ़े-लिखे लोग यही सोचते हे की, दहेज के बिना हमारी बेटियो का विवाह होना मुश्किल है । एसे लोगो को समजाया जाता हे कि दहेज तो एक पति का अधिकार है ।

इसके अलावा उन लोगों को यह भी पता नहीं होता की दहेज एक अपराध है । और इनको यह भी नहीं पता की इसके खिलाफ हमारी सरकार ने कानून भी बनाया है ।

लड़कियो का अशिक्षित होना भी दहेज को बढ़ावा देता है । कई लोग एसा मानते हे की अशिक्षित लड़कि से शादी करके उनकी ज़िंदगी भर देखभाल करनी है । इसलिए उनको दहेज देकर लड़की के परिवार सहायता करते है ।

इन भोले लोगो को क्या पता की यह लोग सहायता के नाम पर अपनी दहेज की लालच को पूरा कर रहे है ।

अरे कई जगहो पे तो दहेज को सम्मान का विषय बताया जाता है । एसा माना जाता हे की जो व्यक्ति जितना ज्यादा दहेज देगा उतना ही ज्यादा लोग उनको सम्मान और इज्जत देंगे । जिसकी वजह से भी इस गेरकानूनी प्रथा को बढ़ावा मिल रहा है ।

जब के कई लोगो की सोच यह भी हे की अगर दहेज नहीं लेंगे तो समाज में उनको अलग नज़ारो से देखा जाएगा और कोई उनको सम्मान नही देगा । कई लोगो को इस कारण के वजह से भी दहेज लेना पड़ता है ।

इसके बारे मे हमने पहले भी बात करी के किसी लड़की का सांवला रंग हो या उसके शरीर मे कोई नुकसान हो तो कुछ परिवारो को दहेज की लालच देकर विवाह किए जाते है । 

क्योकि हर पुरुष एक सुंदर महिला को अपने पत्नी के स्वरूप मे देखना चाहता है । लेकिन अगर उसको इतना सारा धन-दोलत मिले तो वो शादी करने के लिए तैयार हो जाता है । इसकी वजह से भी इस प्रथा को गति मिलती है ।

आज तो बेरोजगारी भी इस खतरनाक प्रथा को बढ़ावा दे रही है । हम इस बात से अंजान नहीं हे की भारत मे बेरोजगारो की संख्या बहोत ज्यादा है ।

और इनहि बेरोजगार युवको को जब शादी के लिए प्रस्ताव भेजा जाता हे तो उनके मुंह से सबसे पहला शब्द यही निकलता हे कि हमे अपना व्यापार शुरू करने के लिए कुछ धन की आवश्यकता है । (दहेज प्रथा पर निबंध)

यानि वो परोक्ष रूप से दहेज की मांग रखते है । ऐसे लोगो को कभी भी दहेज नहीं देना चाहिए । क्योकि वो ना तो व्यवसाय करते हे और ना ही नौकरी ।

और जब दहेज के पैसे खत्म हो जाए तो वो बिचारी महिलाओ को परेशान करने लगते है । और इस तरह भी दहेज को बढ़ावा मिलता है ।

इसके अलावा कई लोग शादी कराने के लिए इंटरनेट पर अपना बायो-डाटा देते है । इसमे ज़्यादातर लोग बढ़ा-चढ़ाकर ही अपना बायो-डाटा देते है ।

और इसमे कई लोग कमाई और संपति को देख कर लड़की से शादी करते है । अंत मे वो लोग दहेज की मांग करते है । जिसके कारण भी दहेज को बढ़ावा मिलता है ।

( इंटरनेट के फायदे और नुकसान पर निबंध, जानने के लिए- click here

दहेज प्रथा से हानि या दुष्परिणाम :-

आप सोच भी नहीं सकते, कीतने खतरनाक परिणाम हे दहेज प्रथा के । आप इसको मानवजाति का अभिशाप भी कह सकते हो ।

अगर कोई व्यक्ति सिर्फ दहेज के लिए आपकी बेटी से शादी करता हे तो आपकी बेटी एसी जगह कभी खुश नहीं रह सकती ।

जब तक आपका दिया हुआ धन उनके पास हे तब तक आपकी बेटी सुखी है । लेकिन दहेज खत्म होने के बाद ये लोग अपना असली रूप दिखाते है । वो हर तरह से महिला को परेशान करने की कोशिश करते है ।

दहेज के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है । एसे समाज मे रहने वाले हर माता-पिता लड़की के जन्म से ही थोड़ी-थोड़ी बचत करना शुरू कर देते है ।

क्योंकि लड़की के शादी मे सजावट, खानपान, रिश्तेदारों को भारी मात्रा में उपहार और दहेज तक की सारी जिम्मेदारी उसके माता-पिता पर होती है ।

essay on dowry system in hindi

लेकिन फिर भी पैसे कम हो तो वो रिश्तेदार, मित्रों और ब्याज देने वाले लोगो से पैसे उधार लेते है । और ऐसे अपनी बेटी की शादी के लिए माता-पिता खुद एक बड़े कर्जे के नीचे दब जाते है ।

एसे कई माता-पिता हे जिनका पूरा जीवन ब्याज चुकाने मे चला जाता है । लेकिन अगर ब्याज ज्यादा हो तो उनको आत्महत्या करने के दिन आ जाते है ।

दहेज के कारण कई लोग भ्रष्टाचार का सहारा लेते है । क्योकि अगर आपके घर मे एक बेटी ने जन्म लिया हे तो उसकी शादी के लिए आपको अधिक धन चाहिए होगा ।

इसकी वजह से वो ज्यादा-से-ज्यादा पैसा जमा करना चाहते है । लेकिन इसके लिए वो लोग फिर भ्रष्ट तरीको को अपनाते है । उदाहरण के तोर पर रिश्वत लेना, टैक्स का चोरी करना आदि ।

इसके कारण हमारे देश मे भ्रष्टाचार का प्रमाण बढ़ता है । और अंत मे इस से हमारे ही देश का विकास खराब होता है ।

दहेज के कारण कई जगहो पे बहू को तनाव देते है । क्योकि ससुराल वाले अक्सर अपने बहू के दहेज की तुलना आस-पास की अन्य बहू से करते है ।

एसे लोगो का मुख्य उदेश्य अपनी बहू को व्यंग्यात्मक टिप्पणी करके नीचा दिखाना होता है । और इस तरह एक महिला को दहेज के कारण मानसिक त्रास दिया जाता है । (दहेज प्रथा पर निबंध)

कई जगहो पे इन महिलाओ को शारीरिक त्रास भी दिया जाता है । जब कुछ लोग बहू को मानसिक दबाव देने से नहीं थकते तो वो अब बदसलूकी पर उतर आते है । कोई मौका वो बहू को अपमानित करने का नही छोडते ।

दहेज के कारण अब तो महिलाओं को मारा जाता हे और कई जगहो पे तो बहू को जलाने के किस्से भी सामने आए है ।

अगर कोई महिला इतना सहने के बाद अपने पति और ससुराल को छोड़कर अकेला जीवन व्यतीत करे तो हमारा कठोर समाज उसे बुरी दृष्टि से देखता है ।

और जब कष्ट न जेलपाए तो कोई डूब कर मर जाती हे तो कोई रेल के नीचे कटकर मर जाती है । उनको आत्महत्या करना ही अंतिम विकल्प बचता है । आप अक्सर दैनिक समाचार मे ये खबरे पढ़ते होंगे ।

इसके अलावा कन्या भ्रूण हत्या भी कुछ हद तक दहेज का कारण होती है । कन्या भ्रूण हत्या यानि माँ के पेट मे ही बच्चे या बच्ची का परीक्षण करना । और अगर बच्ची हो तो उसको पेट मे ही मार देना ।

अरे हद तो तब हो जाती है जब एक कन्या को कचरे के डिब्बे मे या किसी सुमसाम जगहो पे फेंक देते है । क्या आज इंसानियत मर गयी है ?

दहेज के कारण आज योग्य लड़कीयो की उम्र होने के बाद भी शादी नहीं हो पाती । और अंत मे अयोग्य वर के साथ एसी योग्य कन्याओ का विवाह किया जाता है । (दहेज प्रथा पर निबंध)

इसकी वजह से ये दोनों जीवन के अंत तक किसी प्रकार के सुख को नहीं पा सकते । उनकी आने वाली पेढ़ी पर भी इसका बहोत गहरा असर पड़ता है ।

दहेज प्रथा को रोकने के उपाय क्या है ?

इस दहेज प्रथा ने हम मनुष्य जाती को ऐसा डंक मारा हे की हम इंसानियत को ही भूल गए।

वर्तमान मे इसका कम होना तो दूर की बात इसको सिर्फ धीमा करना ही हमारे लिए सबसे बड़ी बात है । क्योकि दिन प्रतिदिन ये बड़ी तेजी से फैल रहा है ।

कई लोगो का मानना हे की यह तो सिर्फ एक उदाहरण है । अगर इस दहेज प्रथा को रोका नहीं गया तो यह हमारे पूरे देश को खा जाएगा ।

अब आपके मनमे प्रश्न आता होगा की क्या अब हमे इस समय सिर्फ हाथ पर हाथ धरे दहेज द्वारा महिलाओ पर हो रहे आत्याचार को देखते ही रहना है ?

बिलकुल नहीं । हमने यहा कुछ उपाय बताएँ है । अगर हम इन सबका उपयोग करे तो हम इस गंभीर बीमारी से बच सकते है ।

dahej pratha ko rokne ke upay

इसका सबसे पहला उपाय यह हे की, हमे अपने घर से ही इस प्रथा का बहिष्कार करना है । हमे आज से ही यह शपथ लेना हे की ना हमे दहेज लेना है और ना ही हमे दहेज देना है ।

इसके अलावा अगर हमारे युवा पुरुष और महिलाओ को समजाए और वो इसका विरोध करने लगे तो तो इस प्रथा की हम कमर तोड़ सकते है । क्योकि दहेज के ये दो ही मुख्य किरदार है ।

कसी भी महिला को कभी ऐसे परिवार मे शादी नहीं करनी चाहिए जो दहेज की मांग करते हो । अगर आज आप शुरू करेंगे तो कल आपके साथ हजारो-लाखो महिलाए होंगी । (दहेज प्रथा पर निबंध)

और अगर इतने बड़े पैमाने पर महिलाए साथ होगी तो किसी परिवार या समाज की ताकात नहीं हे की दहेज की मांग कर सके ।

पुरुष की भी कुछ ज़िम्मेदारी बनती है की, वो भी अपने घरवालों से कह दें कि मे तभी विवाह करूगा जब आप लड़की वालों से दहेज ना ले । क्योकि आज नहीं तो कल हमारे घर बेटी का जन्म होना ही है ।

आप यह सोच कर दहेज लेने से इंकार कर दे की मे अपनी बेटी को बिना दहेज के शादी करा रहा हु ।

इसके अलावा दहेज प्रथा के खिलाफ कडक कानून बनाकर भी हम इसको रोक सकते है । हमे अपनी सरकार से अनुरोध करना चाहिए की वो इस प्रथा के खिलाफ कठोर-से-कठोर कानून बनाए ।

एसा नहीं हे की दहेज के खिलाफ कोई कानून नहीं है । वर्तमान में ऐसे कुछ कानून हे जो इस प्रथा को रोकने के लिए बनाए गए है । जैसे की दहेज प्रतिबंध अधिनियम 1961

यह कानून के अंतर्गत दहेज किसी को देना और लेना दोनों अपराध है । अगर आप दहेज देते या लेते पकड़े जाते हो तो आपको कम-से-कम 5 वर्ष की जेल और 15,000 रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा ।

इसके अलावा अगर किसी महिला को उसके ससुराल वाले से दहेज की मांग करके भावनात्मक और शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार कर रहे हे तो आपको घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत संरक्षण मिला हुआ है ।

आप इनके खिलाफ शिकायत करके उनको जेल भेज सकती हो ।

इन कानून के अलावा अगर हम ज्यादा-से-ज्यादा लड़कियों को शिक्षित कर पाये तो भी इस प्रथा को हम कुछहद तक रोक सकते है ।

इसके लिए हमे लोगो को जागरूक करना होगा । हमे लोगो को बताना होगा की लड़किया जितनी ज्यादा पढ़ेगी उतना ही वो सक्षम हो पाएगी ।

और एक पढ़ी-लिखी लड़की कभी भी दहेज नहीं देगी । फिर चाहे वो एक बेटी के स्वरूप मे हो, किसी की सास हो या किसी की बहन ।

किसी ने क्या खूब लिखा है की, शिक्षा हर विनाशकारी और खतरनाक बीमारी का तोड है । और अब तो बेटियों को पढ़ाने के लिए सरकार ने शिक्षा भी निशुल्क करदी है । अब किस बात का डरना ।

इसके अलावा हमे लड़का-लड़की के भेदभाव को बंद करना होगा । याद रखना की जब तक हम लड़की-लड़का में भेदभाव करेंगे तब तक इस प्रथा को और ज्यादा ताकात मिलेगी । (दहेज प्रथा पर निबंध)

हमे दोनों को समान अधिकार, समान प्यार और समान इज्जत देनी होगी ।

और अगर हम दहेज प्रथा के खिलाफ सामाजिक जागरूकता फेलाए तो एक बड़े स्तर पर हम इस प्रथा से लोगो को जागरूक कर सकेंगे ।

हम सभी भारतवासियों को मिलकर इस प्रथा का विरोध करना होगा । इसके लिए हम सभी को एक-होकर जो भी व्यक्ति दहेज ले या दहेज दे उनके घर नहीं जाना है । उनके किसी प्रसंग मे नहीं जाना है ।

किसी ने क्या खूब लिखा है की मत जलाओ बेटियों को मान, सम्मान, धन और दौलत के लिए । नहीं तो एक दीन आप की बेटियां भी जल जाएंगी । यह छोटा सा वाक्य हमे हर समाज, परिवार और घर तक पहुंचाना है ।

निष्कर्ष :-

इतना सब कुछ जानने के बाद अब तो आप लोगो को पता चल ही गया होगा की, दहेज हमारी पवित्र भारतीय संस्कृति पर एक बड़ा कलंक है । ये किसी अभिशाप से कम नहीं है।

इस प्रथा ने कई हसते-खेलते परिवारों को निर्जन कर दिया है । इसने कई ज़िंदगीयो को उजाड़ा है । अरे आज तो लोगों की सोच इतनी गिर गई हे कि वो दहेज लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है ।

फिर चाहे वो बेटीकी हत्या करना हो या उनको जलाना । इसी घटनाए हम आए दिन अखबारों मे पढ़ते है । इसी कारण अब हमे इसके खिलाफ आवाज़ उठानी होगी ।

और हमे लोगो को समजाना होगा की, दहेज सिर्फ एक प्रेम का उपहार है । जबरदस्ती से खींच लेने वालो संपत्ति नहीं । 

अब मे आखिर मे आपसे पूछना चाहता हु की आपको ये दहेज प्रथा पर निबंध (Essay on dowry system in Hindi) कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे दहेज प्रथा पर निबंध को दे सके ।

लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email जरूर करे । आपको और भी किसी विषय पर निबंध चाहिए तो कॉमेंट मे जरूर बताए ।

अगर आपको लगता हे की हमारे आस-पास या कोई और महिलाओ को दहेज के लिए परेशान कर रह है तो एसे लोगो तक इस इस निबंध को जरूर पाहुचाए । और अपने दोस्त-यारो के साथ भी इसे शेर करे । (please share)

Thanks for reading दहेज प्रथा पर निबंध

 

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