भ्रष्टाचार पर निबंध (देश की बर्बादी) essay on corruption

आज हम essay on corruption in hindi यानि की भ्रष्टाचार पर निबंध को विस्तृत मे जानेगे ।

मेरी आप सभी से एक बिनती हे की आप इस essay on corruption in hindi को पढ़ने से पहले नीचे दियी गयी माहिती पढ़ कर ही आगे बढ़े क्यूकी बाद मे हम नहीं चाहते की आपको कोई प्रोब्लेम हो ।

आप लोग इस लेख को नीचे दिये गए सारे टोपिक्स के लिए उपयोग कर सकते हो ।

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लेकिन आपके मनमे प्रश्न होता होगा की आखिर इन सब के लिए एक ही लेख कैसे काफी हे ?

तो मे आपको बता देना चाहता हु की हमने इसको अच्छी तरह जांच कर सारे टोपिक्स को ध्यान मे रख कर लिखा हे ताकि आपको निबंध, स्पीच, लेख ओर प्रोजेक्ट इन सभी के लिए कही ओर जाना न पड़े ।

तो चलिये शुरू करते हे ।

प्रस्तावना :

हमे सबसे पहले यह जानना होगा की आखिर भ्रष्टाचार किसे कहते हैं ?

भ्रष्ट+आचार = भ्रष्टाचार । भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है भ्रष्ट आचरण । एक ऐसा कार्य जिसे मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए समाज के मूल्यों को दाव पर रखके करता है उसे भ्रष्टाचार कहा जाता है ।

एसा नहीं है की ये सिर्फ विकासशील देशो के अंदर ही होता है । विश्व का हर देश इस खतरनाक बीमारी से प्रताड़ित है ।

हमारे देश में कई IT कंपनियां, बड़े फेक्ट्रिया ओर अच्छी अर्थव्यवस्था भी है । फिर भी क्यो भारत विकसित देशो मे शुमार नहीं है । क्योकि भ्रष्टाचार इसका सबसे बड़ा कारण है ।

वर्तमान मे भारत के सभी क्षेत्र भ्रष्टाचार की जपेट मे है । इसमे समाज के बड़े अधिकारी से लेकर, सरकारी ओर प्राइवेट कर्मचारी, किसान, राजनीतिक नेता आदि शामिल हैं ।

यू कहना गलत नहीं होगा की आज का आधुनिक व्यक्ति भ्रष्टाचार के आदि हो चुका हैं । अब तो एसा लगता है की भ्रष्टाचार के बिना कोई भी काम नहीं हो सकता ।

भ्रष्टाचार का अर्थ क्या है :

मनुष्य जब अपने निजी स्वार्थ और इच्छाओं को पूरा करने के लिए दूसरों को कष्ट पहुँचाता है उसे सामान्य भाषा मे भ्रष्टाचार कहते है ।

मुनाफाखोरों, नेताओं ओर चोर बाजारियों के लिये वर्तमान भारत में यह शब्द बहोत ज्यादा प्रयोग किया जा रहा है । आज कोई एसा क्षेत्र नहीं बचा जहा भ्रष्टाचार न पहुचा हो । इसी हम अंदाजा लगा सकते हे की इसकी जड़ें कितनी गहरी होगी ।

भ्रष्टाचार की संज्ञा राजनेताओं के दुव्यवहार को दी जाती है । क्योंकि उनको जो सत्ता मिली हे उनका उपयोग अपनी निजी कामो को पूरा करने के लिए करते है ।

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भ्रष्टाचार वह बीमारी है जो हमारे कुटुंब, समाज, देश ओर दुनिया को खोखला कर रही है । ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल नामक अंतरराष्ट्रीय सरकारी संगठन ने भ्रष्टाचार के लिए एक रिपोर्ट तैयार किया था जिसमे भारत 78 पायदान पर था ।

भ्रष्टाचार को हम एक राक्षस समज सकते है । जैसे हम भ्रष्टाचारिओ के काला बाजार को राक्षस का ह्रदय और उसमे चल रही मिलावट को राक्षस का पेट समज सकते है ।

सरकारी कर्मचारी की रिश्वत को राक्षस के हाथ हैं, सिफारिश को राक्षस की जीभ ओर गरीबो के शोषण को राक्षस के दांत समज सकते हैं ।

भ्रष्टाचार का इतिहास :

आपको क्या लगता है की भ्रष्टाचार अभी 10-20 सालो से ही चल रहा है ? बिलकुल नहीं ।

ये वर्तमान में होने वाली समस्या नहीं है । अंग्रेज़ो ने जब पूरी दुनिया के 90 प्रतिशत देशों को हथिया लिया था तब मनुष्य कुछ पैसो के लिए अपने देश का सौदा करते थे ।

राजा अपना समाराज्य बचाने के लिए सही या गलत में फर्क नहीं करते थे । तभी से यह भ्रष्टाचार प्रारंभ हो चुका था ।

भ्रष्टाचार के विभिन्न प्रकार :

essay on corruption in hindi हमने अभी तक भ्रष्टाचार के अर्थ ओर इतिहास के बारे मे जाना । लेकिन भ्रष्टाचार कितने प्रकार का है ? ओर कितने तरीको से हमको नुकसान पाहुचा रहा है ? हमे उसको जानना अनिवार्य है ।

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रिश्वत की लेन-देन :

आपको अगर सरकारी कार्यालय में कुछ काम करना हे तो वहा के चपरासी से लेकर उच्च कर्मचारी तक आपको पैसे देने पड़ेंगे । एसे कामो के लिए सरकार उन्हें वेतन देती है ताकि वो लोग हमारी मदद कर सके ।

लेकिन कुछ लोग काम जल्दी कराने के लिए उनको छिपकर पैसे देते हैं ओर यही से शुरू होता है भ्रष्टाचार ।

चुनाव मे घोटाला :

जब भी देश मे चुनाव का समय आता है तब राजनेता सरेआम लोगों को ज़मीन, पैसे, मादक पदार्थ ओर उपहार देते हैं, जिससे वो लोग चुनाव जीते । यह भी एक भ्रष्टाचार ही है ।

टैक्स चोरी :

दुनिया मे हर देश के नागरिक को एक निर्धारित पैमाना यानि टैक्स सरकार को देना पड़ता है । इसमे भी कुछ नागरिक सरकार को सही विवरण न देकर टैक्स चोरी करते हैं । इसे भी भ्रष्टाचार कहा जाता है ।

इसके अलावा भी समाज के हर छोटे-बड़े क्षेत्रों में भ्रष्टाचार है । जैसे की अवैध मकान निर्माण, राशन में मिलावट, स्कूल ओर अस्पताल में अत्यधिक फीस लेते है उसे भी हम भ्रष्टाचार कह सकते है ।

भ्रष्टाचार के कारण क्या है ?

विश्व की हर बड़ी समस्या के पीछे कोई कारण जरूर होता है एसे ही भ्रष्टाचार के पीछे भी कई कारण हैं ।

हम सबको पता है की मनुष्य की इच्छाएं कभी भी पूरी नहीं हो सकती । मनुष्य अपने जीवन भौतिक विलासिता ओर ऐशो-आराम मे बिताना चाहता है । इसीलिए वो ज्यादा पैसा कमाने के लिए भ्रष्टाचार को अपनाता हैं ।

कई लोग समाज मे अपनी प्रतिष्ठा पाने के लिए धन को ही सब कुछ मानते है । फिर ज्यादा-से-ज्यादा धन कमाने के लिए वो अपना मुह भ्रष्टाचार की तरफ फेर लेते है ।

आज मनुस्य की मानसिकता एसी बन गयी है की अगर उसको किसी चीज़ का अभाव होता है या कष्ट होता है तो वह व्यक्ति भ्रष्ट आचरण करने की ओर बढ़ता है ।

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जैसे सामाजिक असमानता, पद –प्रतिष्ठा, आर्थिक स्थिति के कारण भी मनुष्य अपने आपको भ्रष्ट बना लेता है ।

उसके अलावा किसी व्यक्ति से ईर्ष्या की भावना होना भी भ्रष्टाचार का रास्ता अपनाता है ।

कोई भी व्यक्ति इस से अंजान नहीं हे की हमारे देश मे बहोत ज्यादा गरीबी है । ये गरीब लोग अपनी समस्या को बड़े अधिकारी या राजनेता तक नहीं पहुंचा सकते । अगर पहोच भी जाए तो उस समस्या का हल करने के लिए कई साल लग जाते हैं ।

अगर उन बिचारो को उस समस्या से निकल ना है तो अधिकारी के दलाल को कुछ देना पड़ेगा । ये भी एक बड़ा कारण है भ्रष्टाचार फेलने का ।

भारत मे तेजी से बढ़ रही जनसंख्या भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है । क्योकि जितनी ज्यादा जनसंख्या होगी उतना ही ज्यादा उत्पादन हमको करना होगा जोकि भारत नहीं कर पा रहा है ।

जिसकी वजह से भी देश का सामान्य नागरिक अपनी जरूरीयतों को पूरा करने के लिए अधिकारियों को रिश्वत देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता हैं ।

हमारे देश में काफी लोग अशिक्षित हैं । अशिक्षा की वजह से उनको सरकारी सुविधाओं के बारे में पता ही नहीं चलता । सरकारी कर्मचारी भी नहीं चाहते की उनको लाभ मिले ।

क्योंकि अगर उनको पता चल गया तो उनको कुछ भी नहीं मिलेगा । इसीलिए उन सुविधाओं का सारा पैसा बड़े-बड़े अधिकारी हजम कर जाते है ।

अच्छी पोस्ट वाली नौकरियों ओर क्रिकेट मे स्पॉट फिक्सिंग भी भ्रष्टाचार को ताकत देती हैं । इस बात को जन कर बहुत दुख होता है की भारत का हर क्षेत्र, हर तबका इस खतरनाक बीमारी से पीड़ित है ।

किसी कवि ने क्या खूब लिखा है कि, किसी भी देश मे परिजनों का लाभ ओर बाकियों का पक्षपात तो होगा ओर यही भ्रष्टाचार का मूल कारण है ।

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भ्रष्टाचार के प्रभाव क्या है ?

इस दुनिया मे आप कोई भी काम करलों इसका कुछ तो प्रभाव पड़ता ही है । अगर हम काम अच्छा करे तो उसका प्रभाव भी अच्छा ओर अगर काम बुरा करे तो उसका प्रभाव भी बुरा पड़ता है । हम बात करे भ्रष्टाचार की तो उसका प्रभाव तो बहोत बुरा है ।

मनुष्य जब अपने स्वार्थ को देख कर जीवन गुजारता है तब वो पूरी तरह से अभिमानी बन जाता है । वो व्यकती कामवासना मे लग जाता है ।

उसके बाद वो उचित-अनुचित में फर्क नहीं करता, वो धर्म ओर कर्म को छोड़कर नास्तिक जैसे काम करता है । उसके अंदर करुणा और सहानुभूति जैसी कोई भावना नहीं रहती । उसके बजाय वो कठोर ओर बनता है ।

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ईमारत ओर पुल बनाने वाले कॉन्ट्रेक्टर से लेकर ढोंगी बाबा तक चारो ओर भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है । वर्तमान मे मंदिर के पुजारी भी फूल डालते वक्त भक्तों की स्थिति देखते है । क्योकि अमिर ओर अच्छे घराने के भक्त ज्यादा पैसा देकर जाते है ।

भारत मे कई कंपनियों का सामान इतना खराब आता हे के खाने के लायक भी नहीं होता । लेकिन फिर भी सरकारी अधिकारी कुछ पैसो के लिए इन कंपनी की चीज़ों को पास कर देते है । जिसका प्रभाव अक्सर हम जैसे सामान्य आदमी को भुगतना पड़ता है ।

बल्के जो ईमानदार है उनको आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक, मानसिक ओर नैतिक यातनाओ का सामना करना पड़ता है । समाज उनको गलत तरह से देखता है ।

देश के विकास के लिए जितनी भी योजनाए बनाई जाती है, भ्रष्टाचार उनका हनन करके जनता तक लाभ नहीं पाहुचने देता ।

लोग टैक्स की चोरी करते है जिसके कारण देश भयंकर आर्थिक क्षति भुगत रहा है । दूसरे विकसित देशो की नजरों में हमारे भारत देश की प्रतिष्ठा दिन-प्रतिदिन घट रही है ।

भारत मे बहोत कम सरकारी नोकरी की भरतीय की जाती है । उसमे भी गरीब छात्र मेहनत करके भी वो भर्ती को पास नहीं कर सकते जबकि कई अमीर बाप की ओलाद पैसे देकर अव्वल नंबर मिस्टर पास होकर नोकरी ले लेते है ।

आज अमीर-गरीब के बीच की खाई बढ़ती ही जा रही है । इसीलिए तो छूड़ेबाजी ओर लूट की घटनाएं आए दिन बनती रहती है ।

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भारत में हुए सबसे बड़े भ्रष्टाचार के घोटाले :

भारत मे अब तक कई भ्रष्टाचार के घोटाले हो गए है । लेकिन हम यहा भारत के अबतक के सबसे बड़े घोटाले की बात करेंगे ।

जिसमे सबसे पहला घोटाला बोफोर्स घोटाला हुआ था जो 1980 मे हुआ था । इसमे करीब 100 से 200 करोड़ का घोटला हुआ था ।

उसके बाद 1990-91 मे दो घोटाले हुए थे । एक था चारा घोटाला जिसमे 1,000 करोड़ ओर दूसरा था हवाला घोटाला जिसमे 100 करोड़ का घोटाला हुआ था ।

फिर हर्षद मेहता और केतन पारेख आईटी कंपनियां ने 1992 मे 5000 करोड़ का ओर 2002 मे तेलगी घोटाला 20,000 करोड़ का हुआ था ।

फिर आया 2008 जिसमे अब तक का सबसे खतरनाक ओर सबसे बड़ा घोटाला हुआ था । ये घोटाला था 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला जिसमे लगभग 1,76,000 करोड़ का घोटाला हुआ था ।

उसके बाद 20092010 मे सत्यम घोटाला 14,000 करोड़ का ओर राष्ट्रमंडल खेलों के घोटाला 70,000 करोड़ का हुआ ।

फिर 2012 मे दो घोटाले हुए । इसमे वक्फ बोर्ड भूमि घोटाले मे 1.50,000 करोड़ ओर भारतीय कोयला आवंटन घोटाला 1,86,000 का हुआ था ।

भ्रष्टाचार निवारण के उपाय :

हमने सब जन लिया की आखिर भ्रष्टाचार कैसे एक देश को खोखला बना देता है । जैसे हमारे देश को तों खोखला बना ही दिया है ।

लेकिन आपके मनमे प्रश्न होता होगा की क्या भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय है ? वो क्या-क्या तरीके हे जिस से हम भ्रष्टाचार को दूर कर सकते है ? तो चलो जानते है ।

सबसे पहले हमे सरकार के जो कर्मचारि है उनको को अच्छा वेतन देना होगा । अभी केंद्रीय सरकार के जो कर्मचारि हे उनको काफी अच्छा वेतन मिल रहा है ।

लेकिन राज्य सरकार के कर्मचारियों को अभी तक सही प्रकार से वेतन नहीं मिल रहा है । जिसको हमे सुधार ने की जरूरत है ।

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इसके अलावा भारत के कई सरकारी कार्यालयो में बहुत कम आधिकारी नियुक्त किए जाते हैं । जिसकी वजह से कम कर्मचारियों पर काम का भार बढ़ता है ।

लोग काम जल्दी कराने के चक्कर मे इनको रिश्वत दे देते है । जिस से उनका काम जल्दी हो जाता है और जो लोग रिश्वत नहीं दे सकते उनको उनका काम पूरा होने कई महीने ओर साल लग जाता है ।

किन्तु भ्रष्टाचार तो कर्मचारियो की एक आदत बन चुका है । लेकिन अगर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ हर दफ्तर में एक आयोग बना दे तो ऐसे कार्यों पर रोक लगाई जा सकती है ।

भारत के सभी कार्यालयों मे सीसीटीवी कैमरे लगा देने चाहिए ओर एसे आयोगो को संभालने ओर उन पर निगरानी का काम देना चाहिए ।

अगर यह हुआ तो इससे ऑफिस में काम करने वाले अधिकारी रिश्वत लेने से डरेंगे और कोई हरामि ले तो पकड़े जाएंगे ।

हमे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एक भ्रष्टाचार निवारण बिल मे फिर से संशोधन करना होगा । जिस से भ्रष्टाचारयो को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी । हम सबको इसे भी एक आतंकवाद और देशद्रोह के समान मानना होगा है ।

क्योकि इस से हमारा देश उन्नति नहीं कर पा रहा है ओर देश की आर्थिक स्तिथि डूबने के कगार पर है । एसी सजा बनानी होगी की जिस से कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार करने पर 10 बार सोचे ।

भ्रष्टाचार को देश से निकाल ने के लिए हमे जागरूक बनना पड़ेगा भले ही हमारा कोई कार्य पूर्ण न हो हमे कभी भ्रष्टाचार का साथ नहीं देना चाहिए ।

भ्रष्टाचार इसीलिए तो होता है क्योंकि हम उसका विरोध ना करके उसका साथ देते हैं ।

हमे प्रशासनिक जीतने व्ही कार्य हे उनमें पारदर्शिता लनी होगी । हमे लोगो को जागरूक कर सही उम्मीदवार को चुनाव जिताना होगा । तभी हम भ्रष्टाचार को रोक सकते है ।

इसके अलावा हमे भ्रष्टाचारी लोगो का सामाजिक बहिष्कार भी करना चाहिए ताकि समाज के डर से भी भ्रष्टाचारी डरे ।

उपसंहार :

याद रखना की जब तक हम भ्रष्टाचार को जड़-मूल से खत्म नहीं करेंगे तब तक देश की उन्नति नहीं हो सकती । भ्रष्टाचार से देश की स्वतंत्रता पर खतरा मंडरा रहा है ।

हम लोगो को हमेशा ईमानदार बन कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं देना चाहिए । क्योकि हमारे नैतिक मूल्यों पर सबसे बड़ा प्रहार भ्रष्टाचार है ।

हमारे देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए । यह हमारा कर्तव्य है ।

हमे भ्रष्टाचार मुक्त समाज बनाने की कोशिस करनी चाहिए ताकि हमारी आने वाली पेढ़िया इसके जाल मे ना फसकर सलामत रहे ।

आखिर मे आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हु की क्या अब आप लोग भ्रष्टाचार देंगे या भ्रष्टाचार लेंगे ? इसका जवाब मौजे कमेंट मे yes or no मे जरूर दे ।

आप सबको ये लेख essay on corruption in hindi हर उस व्यक्ति तक पाहुचना हे जहा भ्रष्टाचार जैसे काम बहोत ज्यादा हो । इसे ज्यादा से ज्यादा share करके भ्रष्टाचार को रोकने मे हमारी मदद करे । ( please share )

आपको ये essay on corruption in hindi लेख कैसा लगा ? इस लेख मे कोई प्रोब्लेम हो तो हमे ईमेल पे जरूर मैसेज करे ।

Thanks to all my essay on corruption Hindi readers

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