स्वामी विवेकानंद पर निबंध (2021)- Essay on Swami Vivekananda in Hindi

दोस्तो, आज हम स्वामी विवेकानंद पर निबंध (Essay on Swami Vivekananda in Hindi) जानेगे । यह निबंध आपको स्कूल, कॉलेज और कई जगहो पर काम आने वाला है ।

हम इस निबंध मे विश्व के सबसे बुद्धिमान और प्रसिद्ध व्यक्तियों मे से एक यानि स्वामी विवेकानंद के बारे मे जानेगे ।

इसके साथ-साथ हम यह भी समझेगे की, आखिर स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व इतना जबरदस्त कैसे था ?

हम पर भरोसा करें, स्वामी विवेकानंद पर निबंध पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है ।

 

Essay on Swami Vivekananda in Hindi- स्वामी विवेकानंद पर निबंध

 

प्रस्तावना :-

 

भारत की भूमि पर अनेक विद्वानों, ऋषि-मुनियों और महान पुरुषों ने जन्म लिया है । इन लोगो की वजह से ही आज विश्व मे भारत का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है ।

इन महापुरुषों मे स्वामी विवेकानंद का नाम भी शामिल है ।

स्वामी विवेकानंद ने अपने कार्यो से पूरे विश्व मे भारत को प्रसिद्ध किया था ।

उन्होने वेद और सनातन धर्म के साथ-साथ अमन और भाईचारे का संदेश लोगो तक पहोंचाया था ।

और इसीलिए तो आज के आधुनिक युवा भी स्वामी जी को अपना आदर्श मानकर उनका अनुसरण करते है ।

 

स्वामी विवेकानंद का शुरुआती जीवन :-

 

12 जनवरी 1863 को स्वामी जी का जन्म कलकत्ता के शिमला पल्लै मे हुआ था । शुरुआती दिनो मे उनका नाम नरेन्द्र दत्त था ।

उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था । स्वामी जी के पिता कलकत्ता उच्च न्यायालय मे वकालत करते थे ।

स्वामी विवेकानंद बचपन मे ही अपने पिता के तर्कपूर्ण मस्तिष्क और माता के धार्मिक स्वभाव से बहोत प्रभावित थे ।

swami vivekananda par nibandh

उन्होंने अपनी माँ से आत्म नियंत्रण का पाढ़ सीखा था । आत्म नियंत्रण का उपयोग करके वह बहोत ही आसानी से समाधी की परिस्थिति मे प्रवेश कर सकते थे ।

स्वामी जी को सिर्फ 5 साल की उम्र मे ही मेट्रोपॉलिटन इंस्टीट्यूट में प्रवेश दिलाया गया ।

उसके बाद साल 1879 मे उच्च शिक्षा के लिए उनको जनरल असेम्बली कालेज मे प्रवेश दिलाया गया । यही पर स्वामी जी ने साहित्य, इतिहास और दर्शन जैसे विषयों का अध्धयन किया था ।

अपनी युवा अवस्था मे स्वामी विवेकानंद ब्रह्मसमाज से परिचित हुए और वही श्री रामकृष्ण के संपर्क में आए थे ।

रामकृष्ण दक्षिणेश्वर काली मंदिर के एक पुजारी और उच्च कर्म के एक आध्यात्मिक व्यक्ति थे ।

उनकी यही आध्यात्मिकता से प्रभावित होकर स्वामी विवेकानंद ने श्री रामकृष्ण को अपना गुरु स्वीकार कर लिया था ।

स्वामी विवेकानंद भी एक सच्चे गुरुभक्त थे । क्योंकि उनको प्रसिद्धि मिलने के बाद भी वह कभी अपने गुरु रामकृष्ण को नहीं भूले थे ।

उन्होने अपने गुरु के नाम से ही रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और गुरु का नाम पूरे विश्व मे रोशन किया ।

कुछ समय बाद वह बोरानगर नामक एक मठ मे अपने साधु-भाईयों के साथ रहने लगे । उसके बाद स्वामी जी ने पूरा भारत भ्रमण करने का फैसला किया था ।

हिन्दू धर्म को आधुनिक भारत में पुनर्जीवित करने का श्रेय स्वामी विवेकानंद को जाता है ।

 

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स्वामी विवेकानंद के विचार :-

स्वामी विवेकानंद को भारतीय शास्त्रीय संगीत, हिन्दू शास्त्र, खेलजगत, और शारीरिक व्यायाम मे बहोत ज्यादा रुचि थी ।

वह एक धार्मिक व्यक्ति थे । उन्होने ना सिर्फ भारत मे बल्के पूरे विश्व मे हिंदू धर्म का सही ज्ञान फैलाया था ।

जिसकी वजह से स्वामी जी ने लोगो मे एक नई सोच का निर्माण किया था ।

इसके अलावा जब स्वामी जी के पिता की मृत्यु हुई, तब उनके घर की हालत बहोत खराब हो गयी थी ।

अब उनके घर मे कोई कमाने वाला नहीं था । इसलिए घर की सभी ज़िम्मेदारी स्वामी विवेकानंद पर आ गई ।

परंतु एसी हालत मे भी उन्होने अपने धर्म को नहीं छोड़ा । कई बार वो खुद भूखे रहते, लेकिन गरीबो को खाना खिलाना नहीं भूलते थे ।

स्वामी विवेकानंद कई बार खुद वर्षा मे भीग कर अथिति को विश्राम के लिए अपना बिस्तर दे देते थे ।

हर मनुष्य के प्रति उनका व्यवहार बहोत ही सरल और विनम्र था ।

यह सभी चिज़े दर्शाती है की, स्वामी विवेकानंद के विचार और उनका चरित्र कैसा था ।

उनके यही राष्ट्रवादी विचारों ने भारत के बड़े-बड़े नेताओं का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया था । इसीलिए तो हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने भी उनकी प्रशंसा की थी ।

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने स्वामी जी के बारे मे कहा था की, स्वामी विवेकानंद वह व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत और हिन्दू धर्म को बचाया था ।  

सुभाष चन्द्र बोस ने भी स्वामी विवेकानंद को आधुनिक भारत का निर्माता कहा था ।

इसके अलावा भी जमशेद जी टाटा, अरबिंदो घोष और सर रवीन्द्रनाथ टैगोर ने स्वामी विवेकानंद को भारतीय राष्ट्रवाद का मसीहा कहा है ।

सच मे, स्वामी विवेकानंद के विचार और उनका व्यक्तित्व बहोत ही जबरदस्त था ।

 

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स्वामी विवेकानंद और विश्व धर्म सम्मेलन :-

साल 1893 मे अमेरिका के एक शिकागो शहर मे विश्व धर्म सम्मेलन हो रहा था ।

वहा पर स्वामी विवेकानंद को भारत के प्रतिनिधि के तौर पर खेतड़ी के महाराज ने भेजा ।

स्वामी जी शिकागो के लिए 31 मई 1893 को रवाना हुए और वहा पर उन्होने बहोत ही जबरदस्त भाषण दिया ।

उन्होने अपने भाषण की शुरुआत प्रिय बहनों एवं भाइयों के वाक्य से करी । यह सुनकर सारे लोग आश्चर्यचकित हो गए ।

भाषण के प्रारंभ से ही सारे दर्शको ने तालियों की गड़गड़ाहट शुरू करदी ।

वहा पर मौजूद कई लोग सोच ने लगे की, इस व्यक्ति से ना कभी हमारी मुलाकात हुई और ना ही जान-पहचान ।

लेकिन फिर भी इसने हमे अपना भाई और बहन कहकर संबोधित किया । और उसमे भी खासकर पहले स्त्रियों को संबोधित किया ।

उसके बाद स्वामी जी ने भारत की संस्कृति, सभ्यता, अध्यात्म और हिन्दू धर्म के बारे में बोलना शुरू किया । उन्होने बहोत ही गहराई से इन चीज़ों को समझाया ।

स्वामी विवेकानंद जब भाषण दे रहे है, तब वहा मौजूद सभी लोग इसे चुपचाप सुनते रहे ।

11 सितंबर से शुरू हुआ यह सम्मेलन ठीक 17 दिनो के बाद यानि 27 सितंबर को खत्म हुआ ।

इन 17 दिनो मे स्वामी विवेकानंद पूरी दुनिया मे प्रसिद्ध हो गए थे । इसके साथ-साथ उन्होने विश्व मे भारत का मान भी बढ़ाया था । (Essay on Swami Vivekananda in Hindi)

विश्व धर्म सम्मेलन खतम होने के बाद स्वामी विवेकानंद ने विश्व के कई देशो की यात्रा की । स्वामी जी जिस देश मे जाते, वहा उनका आदर और सम्मान के साथ स्वागत किया जाता ।

इसीलिए वर्तमान मे भी स्वामी विवेकानंद ना सिर्फ भारत बल्के पूरे विश्व मे प्रसिद्ध है ।

 

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स्वामी विवेकानंद द्वारा किए गए मुख्य कार्य :-

स्वामी जी ने मनुष्य जाती की बहोत सेवा करी थी । इसके साथ-साथ उन्होने समाज में फैली कुप्रथाओं का विरोध करने मे भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी ।

उन्होने अशिक्षा, गरीबी और भुखमरी को देश से दूर हटाने के बहोत प्रयास किए थे ।

स्वामी विवेकानंद अक्सर कहा करते थे की, मंदिरों में दान देने के बजाय भूखे लोगों को खाना खिलाना बहोत जरूरी है ।

उनका मानना था की, हर मनुष्य के मन मे सेवा की भावना होनी चाहिए । और इसीलिए उन्होने 5 मई 1897 को कलकत्ता के वेल्लूर मे रामकृष्ण मिशन की स्थापना की ।

वर्तमान मे इस रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएँ पूरे विश्व मे स्थित है । (Essay on Swami Vivekananda in Hindi)

इस मिशन का मुख्य उदेश्य यह था की, भारतीय लोग आध्यात्मिकता के मार्ग को अपनाए और जीवन मे बहोत उन्नति करे ।

जब लोग यह दोनों कार्य अपनाएँगे तो, लोगो के अंदर समाजिक जागरूकता आएगी ।

इसके अलावा स्वामी विवेकानंद ने भारत मे रामकृष्ण मठ और बेलूर मठ जैसे अनेक मठो की स्थापना करी थी ।

स्वामी विवेकानंद ने आध्यात्मिक और धार्मिक शिक्षाओं का प्रसार पूरे भारत देश मे किया था ।

उन्होने महिलाओं का सम्मान और उत्थान करने के लिए कई प्रयास किए थे । स्वामी विवेकानंद ने कहा था की, महिलाओ की उन्नति के बिना देश का विकास करना बहोत मुश्किल है ।

वो भारतीय संस्कृति तथा पाश्चात्य संस्कृति के समन्वय स्थापित करना चाहते थे । और एसे कई विकास के कार्य हमारे स्वामी जी ने करे थे ।

स्वामी जी भारत मे छुआछूत और जाति प्रथा को बिलकुल खतम करना चाहते थे । इसीलिए तो उन्होने छुआछूत, जाति प्रथा और समाज मे फैले ऊँच-नीच के भेदभाव का बहोत विरोध किया था ।

उनके मुताबिक दुनिया के हर मनुष्य को सामाजिक समानता मिलनी ही चाहिए । (Essay on Swami Vivekananda in Hindi)

इसके अलावा स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और धार्मिक सहिष्णुता पर बल दिया था । 

 

स्वामी विवेकानंद का निधन :-

स्वामी जी बहोत ज्यादा परिश्रमी थे । जिसकी वजह से उनका स्वास्थ्य अच्छा नही रहता था । और अंत मे 4 जुलाई 1902 में ही स्वामी विवेकानंद ने जीवन की आखरी साँसे ली ।

स्वामी जी का अंतिम संस्कार बेलूर मठ में किया गया था । (Essay on Swami Vivekananda in Hindi)

इस समय स्वामी जी की उम्र केवल 39 वर्ष थी । परंतु इतनी कम ज़िंदगी मे भी उन्होने एसा कमाल कर दिया जो कोई लंबा जीवन गुजारने के बाद भी ना कर पाता ।

अगर हम यह कहे तो गलत नहीं होगा की, स्वामी विवेकानंद ने अपना जीवन पूरी तरह से इस देश को समर्पित कर दिया था ।

 

निष्कर्ष :-

स्वामी विवेकानंद ने धर्म की सही व्याख्या देते हुए कहा था की, सच्चा धार्मिक व्यक्ति वह नहीं है जो सबसे ज्यादा भगवान को दान दे ।

बल्के सच्चा धार्मिक व्यक्ति तो वह है, जो भूखों को अन्न दे और दुखियों के दुख दूर करे ।

इसीलिए तो स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष बार-बार नही आते बल्के सदियो मे एक-बार आते है । एसे महापुरुषों को हमे कभी भूलना नहीं चाहिए ।

हमे एसे लोगो की सही कद्र करके उनके जीवन का अनुसरण करना चाहिए । क्योकि एसे लोगो की हर चीज़ मे सफलता और हर बात मे सच्चाई होती है ।

इतना सब कुछ जानने के बाद शायद अब आपको पता चल गया होगा की, आखिर क्यो स्वामी विवेकानंद इतने बुद्धिमान और प्रसिद्ध व्यक्ति थे ।

 


 

अब मे आखिर मे आपसे पूछना चाहता हु की, आपको ये स्वामी विवेकानंद पर निबंध (Essay on Swami Vivekananda in Hindi) कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे स्वामी विवेकानंद पर निबंध दे सके । लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email करे ।

और अगर आपको इस निबंध से कुछ भी लाभ हुआ हो तो इसे शेर करना न भूले । (please share)

Thanks for reading Essay on Swami Vivekananda in Hindi

 

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