गांधी जयंती पर भाषण (बापू)- gandhi jayanti speech in hindi

आज हम gandhi jayanti speech in hindi यानि गांधी जयंती के बारे मे जानेगे ।

गांधी जयंती के मौके पर स्कूल, कॉलेज ओर विश्वविद्यालय में स्पीच-भाषण का आयोजन किया जाता है । लेकिन आप भी गांधी जयंती पर स्पीच देने का विचार कर रहे है ओर इसकी तलाश मे हैं तो यहां हम आपकी मदद करेंगे ।

हम पे विश्वास रखिए, यदि आपने हमारे दिये गए इस पोस्ट को पूरा पढ़ा तो आपके भाषण (स्पीच) से सारे लोग बहोत खुस होंगे ओर चारो तरफ तालियों की आवाज गूंज उठेगी ।

आपके स्कूल, कोलेज, यूनिवर्सिटी आदि जगह पर अगर आपको बोलने का अवसर मिलता हे तो इसे जाने न दे । क्योकि इस से आपके अंदर लोगो के सामने बोलने की skill develop होगी ओर communication skill भी बेहतर होगी ।

आप चिंता न करे एक सुनियोजित स्पीच कैसी होती है ? आपको स्पीच मे क्या बोलना हे ? ओर कैसे आपको लोगो का पूरा ध्यान अपने तरफ रखना है वो सब कुछ हम आपको सिखाएँगे ?

इन बातो का ध्यान रखे :

अपनी स्पीच को शुरू करने से पहले आप मंच पर जाकर उपस्थित सभी लोगों का अभिवादन करें । उसके बाद अपना परिचय दें, अपना नाम ओर कौन-सी कक्षा में पढ़ते हैं वो भी बताएं ।

लेकिन आप स्कूल मे नहीं किसी अन्य आयोजन में स्पीच दे रहे हैं तो अपनि संस्था का नाम भी बताएं । वहा पे मोजूद सभी लोगो को गांधी जयंती की शुभकामनाएं दें ।   

उसके बाद आप अपने आयोजनकर्ता या शिक्षक का धन्यवाद करें जिन्होंने इस महान अवसर पर मंच पर आकर बोलने का मौका दिया ।

अपनी स्पीच मे ये भी बताए की गांधी जयंती की अहमियत हर भारतीय के जीवन में क्या होती है ।

तो चलिये,

अब अपनी स्पीच शुरू करे :

आज दो अक्टूबर को महात्मा गाँधी की जयंती है और आज ही हैं अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस । प्रथम मैं आप सभी को इसकी हार्दिक बधाई देता हूँ 

सम्मानित मुख्य अतिथि, शिक्षकगण, आदरणीय प्राचार्य महोदय और मेरे प्यारे दोस्तों । सबसे पहले मैं आपको गांधी जयंती की शुभकामनाएं देता/देती हूं ।  

गांधी जयंती पर कुछ भी बोलना ये मेरे लिए सौभाग्य है । इसीलिए मे आप सब को धन्यवाद करना चाहूंगा । मेरा नाम ______ है और मैं कक्षा __ में पढ़ता हूँ ।

मैं आभारी हूं उन सभी शिक्षको का जिन्हों ने आज के इस अवसर पर मुझे अपने विचार रखने का मौका दिया ।

जब हम भारतवासी राष्ट्रीय एकता के बारे में बात कर रहे हो तब, हमे सबसे पहले एक व्यक्ति जरूर याद आता है ।

क्योकि उस व्यक्ति ने न सिर्फ हमारे देश को आजादी दिलाने मे महत्व का योगदान दिया बल्के हमारे समाज ओर कुटुंब मे फैले कुरीतिया ओर भेदभाव को उखाड़ फेकने मे भी सबसे अहम भूमिका निभाई थी ।

हम सबको पता हे की, वह कोई और नही हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी है । उन्होने भारत के कई स्वतंत्रा आंदोलनो में महत्व की भूमिका निभाई ।

motivational speech on gandhi jayanti in hindi

उनके एसे कई महान कार्यो को याद करने के लिए और उनके उच्च विचारों को नई पीढ़ी के सामने दर्शाने के लिए हर साल गांधीजी के जन्मदिन पर गांधी जयंती मनायी जाती हैं ।

गांधी जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य ही यही है की, गांधीजी के कार्यो से हम आधुनिक पेढ़ी को अवगत कर सके ।

15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गांधीजी के जन्मदिन 2 अक्टूबर को अंतराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई । इसी दिन देश राष्ट्रीय अवकाश दिन भी मनाया जाता है ।

चलो अब हम गांधीजी के प्रारंभिक जीवन के बारे मे थोड़ा जानते है ।

2 October 1869 यानि आज से करीब 150 साल पहले गुजरात के पोरबंदर में करमचंद और पुतलीबाई गांधी के घर पर एक संतान का जन्म हुआ । जिसका नाम उन्होने मोहनदास रखा ।

गांधीजी का बचपन प्रहलाद, श्रवण कुमार और हरिश्चन्द्र की बोधिक कहानियां सुनने बिता । लेकिन वो खेल-कूद ओर पढाई-लिखाई मे एक साधारण बालक थे ।

उनका विवाह मात्र 13 साल की उम्र में कस्तूरबा से करा दिया गया जो उनसे 1 साल बडे थे ।

गांधीजी पहले से ही डॉक्टर बनने का सपना देखते थे ओर वही बनना चाहते थे । लेकिन वैष्णव कुटुंब मे चीरफाड़ की अनुमति नहीं थी ।

इसीलिए उनको वकालत की पढाई करने का कहा गया । साल 1888 में अपने पुत्र हरिलाल जो अभी कुछ ही महीने पहले पैदा हुए थे, और उनकी पत्नी कस्तूरबा को छोड़कर गांधीजी वकील बनने के लिए इंग्लैंड चले गए ।

इंग्लैंड मे 4 साल बाद वकालत की पढाई पूरी करने के बाद गांधीजी भारत लौटे । कुछ दिनों तक राजकोट ओर बॉम्बे जैसे बड़े शहरो में वकालत की प्रैक्टिस की लेकिन उनको भारत मे अधिक कामयाबी नहीं मिली ।

साल 1893 में दादा अब्दुल्लाह नाम के एक व्यापारी ने एक केस के लिए उन्हें साउथ अफ्रीका बुलाया तब वो 23 साल के थे ।

उस वक्त साउथ आफ्रिका मे भी ब्रिटिश हुकूमत थी । इसीलिए उनको साउथ अफ्रीका के प्रवास दौरान कदम-कदम पर भेदभाव का सामना करना पड़ा ।

गांधीजी के पास ट्रेन की सही टिकट होने के बावजूद भी उनको सिर्फ रंग और नस्ल के कारण ट्रेन के प्रथम दर्जे से फेंक दिया गया । एसे कई भेदभाव उनके साथ किए गए ।

अगर गांधीजी की जगह कोई आम इंसान होता तो भारत वापस आ जाता । लेकिन एसी कई घटनाए, कुरीतिया ओर अत्याचारों के बावजूद भी 21 साल तक गाँधीजी न सिर्फ साउथ अफ्रीका में रहे बल्के उनके खिलाफ लड़ते रहे ।

गांधीजी ने एक बार अपने भाषण मे ये कहा था की, I was born in India but was made in South Africa .

इस से हम समज सकते हे की गांधीजी ने आफ्रिका मे बिताए 21 साल कितने महत्वपूर्ण है ।

ये तो था की गांधी जी का बचपन ओर उनका साउथ आफ्रिका का प्रवास लेकिन उन्होने भारत मे वापस आकार देश की स्वतंत्रता के लिए क्या-क्या संघर्ष किया ओर कैसे भारत को स्वतंत्रता दिलाने मे उन्होने महत्व योगदान दिया ? चलो अब जानते है ।

साल 1915 मे गोपाल कृष्ण गोखले के निवेदन पर गांधीजी भारत आए । इसका मुख्य उदेश्य भारत को अंग्रेजी हुकूमत से स्वतंत्र कराने का था ।

भारत आने के बाद गांधीजी ने सबसे पहले साल 1917 मे एक आंदोलन चलाया जिसका नाम चंपारण सत्याग्रह था । इस सत्याग्रह का नाम बिहार के चंपारण जिले के नाम से चंपारण सत्याग्रह  था ।

वहा के किसानो को अंग्रेजों ने जबरदस्ती नील की खेती कराने पर मजबूर किया था । गांधीजी के पहले ही आंदोलन मे सफलता मिली ओर किसानो को नील की खेती से मुक्ति दिलाई ।

इस के बाद गांधीजी ने 1917 मे ही दूसरा सत्याग्रह गुजरात मे किया । उस साल गुजरात के खेड़ा जिले में खतरनाक बाढ़ आगयी थी ।

एसी स्थिति मे भी अंग्रेज़ो ने कर माफ नहीं करा बल्के जबरन कर वसूलने लगे । लेकिन गांधीजी ने अहिंसक विरोध करके अंग्रेजों को सुलह करने पर मजबूर कर दिया ।

इन दो सफल आंदोलनो कि वजह से गांधीजी पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गए । इसीलिए रबीन्द्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को महात्मा और सुभाषचन्द्र बोस ने राष्ट्रपिता की उपाधि दी । ओर आम जनता गांधीजी को महात्मा और बापू कह कर पुकारने लगी ।

फिर अंग्रेजोने हिन्दू-मुसलमान के दंगे करवाना शुरू कीया ताकि बापू के आने से देश के लोगो मे जो एकता बनी थी उनको तोड़ा जाए ।

लेकिन बापू कहा रुकने वाले थे । उस वक्त हमारे देश मे खिलाफत मूवमेंट चल रहा था जिसे भारतीय मुसलमानों का बड़ा समर्थन था ।

इस आंदोलन मे गांधीजी ने अपना सहयोग देकर मुसलमानों को अपने पक्ष में ले लिया और इस से देश में चल रहे हिन्दू-मुस्लिमानो के दंगों पर थोड़े वर्ष तक लगाम लग गयी ।

अब भारत मे बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय आंदोलन हो रहे थे । इन आंदोलनो को कुचलने के लिए साल 1919 मे ब्रिटीशरो ने रॉलेट ऐक्ट नामक कानून लाया ।

इस एक्ट के मुताबिक किसी भी भारतीय व्यक्ति को अंग्रेज़ बिना किसी मुकदमा चलाये ओर बिना बताए जेल मे बंद कर सकते थे ।

गांधीजी ने देश के लोगो को इस एक्ट के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने को कहा । इस आन्दोलन का नाम उन्होने असहयोग आन्दोलन रखा ।

13 अप्रैल 1919 को इस आंदोलन से संबन्धित विरोध प्रदर्शन अमृतसर के जालियांवाला बाग़ में किया जा रहा था ।

तब अंग्रेज़ जनरल डायर ने बिना बताए लोगो पर गोलीया बरसाना चालू किया ओर सैकड़ों भारतीय लोगों को गोलियों से भुन दिया ।  

इतनी बड़ी हिंसा के बावजूद गाँधीजी अहिंसा के मार्ग से जरा भी डग मगाए नहीं । धीरे-धीरे पूरा भारत इस आंदोलन का हिस्सा बना गया था ।

उस वक्त अंग्रेज परेशान हो गए थे लेकिन तभी 5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा कांड हुआ जिसमे पोलिसथाने के साथ कई पुलिस वालों को जिंदा जला दिया । इस की वजह से गाँधीजी कुछ सालों तक जेल में रहे ।

साल 1930 में अंग्रेज जब नमक पर ज्यादा टैक्स लगाने लगे तब बापु ने इसका विरोध करते हुए गुजरात के अहमदाबाद से दांडी तक 400 km की यात्रा की और नमक का कानून तोड़ दिया । इसे दांडी यात्रा भी कहते है ।

साल 1942 में फिर गाँधीजी के नेतृत्व में एक आन्दोलन हुआ जिसे भारत छोड़ो आंदोलन कहा गया ।

इसी समय गांधीजी ने देशवासियों को करो या मरो का नारा दिया । अंतिम अहिंसावादी आंदोलन को जारी रखने ओर एकजुट रहने को गांधीजी ने लोगो को कहा ।

भारत छोड़ो आंदोलन के लिए गांधीजी को दो साल के लिए जेल में बंद किया गया । लेकिन इस आंदोलन ने पूरे देश को एकजुट ओर संगठित कर दिया था ।

200 सालों की गुलामी और न जाने कितने लोगो के बलिदानों के बाद आखिर 15 अगस्त 1947 को हमारा प्यारा देश भारत आज़ाद हो गया ।

ये व्यंग्यता ओर ताना ही हे हमारे देश के लिए क्योकि, पूरे विश्व को अहिंसा का पाठ सीखाने वाले हमारे बापु को हिंसा के द्वारा ही मारा गया । नाथूराम गोडसे ने गोली मार कर 30 जनवरी 1948 को बापु की हत्या करी ।

मोहनदास करमचंद गांधी, एक ऐसा नाम जो हर भारतीयो को दिल मे आज भी अमर है । इस पर मे एक पंक्ति कहना चाहूँगा की, दे दी हमें आज़ादी बिना खडग बिना ढाल, ए साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

speech on gandhi jayanti for school in hindi

यह वास्तव में विश्वास से परे था कि, कैसे एक वकील लंदन की अदालत में स्पीच देने के लिए घबराता है, लेकिन जब उसे अपने देश को बचाने का जुनून चड़ा तब उसने विश्व की सबसे बड़ी ताकत को जुका दिया था ।

एक पतले-दुबले आदमी ने बिना शस्त्र उठाये विश्व की ताकतवर कोमो मे से एक अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया यह कमाल नहीं तो ओर क्या है ।

अल्बर्ट आइंस्टीन, नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर ओर स्टीव जॉब्स जैसी विश्व की बड़ी-बड़ी हस्तिया मे एक समानता थी । 

आप चोक जाएंगे की, ये सभी दिग्गज हस्तिया मोहनदास करमचंद गाँधी के अनुयायी थे ओर उनको फ़ॉलो करते थे ।

विश्व के सबसे बड़े विज्ञानिओ मे से एक अल्बर्ट आइंस्टीन ने बापू के लिए कहा था कि,

हमारी आने वाली पीढियां बड़ी मुश्किल से यकीन कर पाएंगी कि, मांस और रक्त से पूर्ण एक ऐसा इंसान था जो इस धरती पर चला था ।

लेकिन इस महान व्यक्ति की जयंती पर भारत मे क्या-क्या कार्यक्रम किए जाते क्या आपको पता है ? अगर नहीं पता तो चलिये जानते है । (gandhi jayanti speech in hindi)

गांधी जयंती के दिन सरकारी अधिकारियों द्वारा बापू के समाधि स्थल राजघाट को फूलों से सजाया जाता है । 2 अक्टूबर की सुबह को समाधि के स्थान पर प्रार्थना की जाती है ।

उस दिन देश के सभी छोटे-बड़े नेता बापू के समाधि स्थल पर आकर देश के राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते है । गांधीजी के बलिदानो को याद किया जाता है ।

इस दिन स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी ओर सरकारी दफ्तरों में कई कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है ।

जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम, नारा लेखन, निबंध लेखन, गांधीजी पर भाषण ओर पोस्टर मेकिंग आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है ।

कई राज्यो मे गांधी जयंती पर धार्मिक किताबों से प्रार्थना, दोहा ओर भजन पढ़ा जाता है । जिसमे खासतौर से बापू का सबसे प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम को अवश्य पढ़ा जाता है ।

देश के हर राज्यों की राजधानियों में प्रार्थना सभाओ का आयोजन किया जाता है । ओर ऐसे कई कार्यक्रम भारत मे हर जगह मनाए जाते है ।

हमे गांधीजी के जीवन से बहोत कुछ सीखना चाहिए ।

गांधीजी एकदम सरल जीवन जीते थे लेकिन उनके विचार उच्च थे । भारत की वर्तमान और भविष्य की पीढ़ीया बापू के विचारों पर चले तो कुछ सालो मे हमारा भारत एक विकसित ओर सुनहरा भारत बन सकता हैं ।

आज हम लोगो को हमारे देश मे चल रहे दंगे ओर हिंसा को रोकना होगा । अमन और शांति देश मे लाने के लिए हमें गांधीजी के विचारों को अपनाना ही होगा  ।

सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन ओर यही मेरा धर्म ।

देश को अंग्रेज़ो से स्वतंत्रता करने के लिए गांधीजी ओर बाकी सभी स्वातंत्रसेनानीयो को देश की आने वाली पीढ़ीया हमेशा ऋणी रहेंगी । इन सभी के बलिदान को ना ही हम भूले हैं ना भूल सकते हैं ।

महात्मा गाँधी की यह बातें आप सभी के जीवन में प्रेरणा का स्त्रोत बनेगी । इस सभा का हिस्सा बनने के लिए और मुझे इतने धैर्यपूर्वक से सुनने के लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद ।

जय हिंद जय भारत।

अब मे आपसे पूछना चाहता हु की आपको ये लेख gandhi jayanti speech in hindi कैसा लगा ।

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे गांधी जयंती के विषय पर भाषण (स्पीच) दे सके ।

लेकीन फिर भी आपको gandhi jayanti speech in hindi मे कोई समस्या हो तो आप हमे email करे । आपको ओर भी किसी विषय पर स्पीच चाहिए तो कॉमेंट मे जरूर बताए । ओर इसे शेर जरूर करे ।

मुझे अपना बहुमूल्य समय देने और सुनने के लिए आप सभी का धन्यवाद ।

Thank you to all my readers

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