घरेलू हिंसा पर निबंध (2021)- Gharelu Hinsa Par Nibandh

दोस्तो, आज हम घरेलू हिंसा पर निबंध (Gharelu Hinsa Par Nibandh) को विस्तृत मे जानेगे । यह निबंध आपको स्कूल, कॉलेज और कई जगहो पर काम आने वाला है ।

हम इस निबंध मे महिलाओ के प्रति हो रही घरेलू हिंसा के बारे मे जानेगे । आखिर क्यो महिलाओ को घर के बाहर और अंदर इतना परेशान किया जाता है ? 

इसके साथ-साथ हम घरेलू हिंसा से निपटने के कुछ उपाय भी आगे बताएँगे । इसलिए अंत तक इस निबंध को जरूर पढे ।

हम पर भरोसा करें, घरेलू हिंसा पर निबंध को पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है ।

 

घरेलू हिंसा पर निबंध- Gharelu Hinsa Essay in Hindi

 

प्रस्तावना :-

विश्व मे भारत को परंपराओ और संस्कृतिओ का देश कहा जाता है । और दुनिया मे अगर महिलाओ को सबसे ज्यादा कोई देश सम्मान देता है, तो वो भारत है ।

क्योकि हमारे देश मे महिलाओ को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है और पूजा जाता है ।

परंतु फिर भी क्यो महिलाओ पर दिन-प्रतिदिन अपराध बढ़ रहे है । उनके साथ ना सिर्फ घर के बाहर बल्के घर के अंदर भी घरेलू हिंसा के अपराध हो रहे है ।

इसमे बच्चो से लेकर युवा और बूढे व्यक्ति तक सभी शामिल है ।

आए दिन हम दैनिक समाचार मे देखते है की, एक दुल्हन को दहेज के लिए घर मे ही मार दिया गया, एक बूढ़े व्यक्ति ने संपत्ति के विवादो से बाज आकर आपघात किया या पिता ने गुस्से मे आकर अपने ही बेटे की हत्या करदी ।

लेकिन कुछ रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू हिंसा से सबसे ज्यादा महिलाए परेशान है ।

इसलिए अगर हमारे देश मे महिलाओ का विकास करना है, तो सबसे पहले हमे घरेलू हिंसा को जड़ से खतम करना होगा ।

 

क्या है घरेलू हिंसा ?

घरेलू हिंसा को साधारण भाषा मे समजे तो, घर मे ही किया जाने वाला एक प्रकार का हिंसात्मक व्यवहार ।

घरेलू हिंसा का मुख्य उदेश्य दूसरे व्यक्ति को काबू करना और अपनी इच्छाओ को पूरी करना है ।

इसमे घर के कोई एक सदस्य को बाकी के सदस्यो द्वारा शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया जाता है । और इसमे ज़्यादातर महिलाऐ ही शिकार होती है ।

राज्य महिला आयोग के अनुसार यदि परिवार का कोई पुरुष अगर महिला के साथ मारपीट या अन्य रूप से प्रताडित करे तो वह महिला घरेलू हिंसा का शिकार कहलाएंगी ।

gharelu hinsa

संयुक्‍त राष्‍ट्र जनसंख्‍या कोष (unfpa) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की कुल विवाहित महिलाओ मे से दो-तिहाई विवाहित महिला घरेलू हिंसा की शिकार है ।

वर्तमान मे महिलाओ के साथ-साथ पुरुषो को भी घरेलू हिंसा का सामना करना पड रहा है ।

लेकिन भारत मे महिलाओं की तुलना मे पुरुषों के खिलाफ घरेलू हिंसा कम है, परंतु पश्चिमी देशों के कुछ भागो मे पुरुष घरेलू हिंसा ने एक घातक रूप ले लिया है ।

कुछ महीनो पहले चंडीगढ़ और शिमला मे कई पति ने इकट्ठा होकर अपनी पत्नियों और परिवार द्वारा हो रहे घरेलू हिंसा के विरोध मे आवाज़ उठाई थी ।

इन लोगो ने अपने अधिकार और सुरक्षा के लिए अपनी राय दी थी । इसलिए वर्तमान मे पुरुषों के लिए भी एक कानून बनाने की आवश्यकता है ।

महिला और पुरुष के अलावा सामान्य बच्चे भी घरेलू हिंसा के शिकार है ।

एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा मे महिलाओ के बाद दूसरा स्थान बच्चो का है ।

जिसमे माता-पिता, शिक्षक और पड़ोसी लोग ज़्यादातर बच्चो पर मानसिक और शारीरिक हिंसा करते है ।

घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ भी घरेलू हिंसा के कई मामले आए दिन हम दैनिक समाचार मे देखते है ।

इनके साथ घरेलू हिंसा का मुख्य कारण यह है की, बच्चे अपने माता-पिता के दवाई या अन्य खर्चों को नहीं उठा पाते ।

इसके अलावा संपत्ति हथियाने के लिए भी उन्हे बहोत परेशान किया जाता है और पीटा जाता है ।

लेकिन इन सब मे सबसे ज्यादा परेशान और सबसे ज्यादा हिंसा महिलाओ के खिलाफ ही होती है, इसे कोई नकार नहीं सकता ।

 

घरेलू हिंसा के प्रकार :-

वैसे अगर देखा जाय तो घरेलू हिंसा के मुख्य चार प्रकार है । शारिरिक हिंसा, भावनात्मक हिंसा, लैंगिक हिंसा और आर्थिक हिंसा । चलो हम इसको बारी-बारी समजते है ।

 

शारीरिक हिंसा :

महिला के साथ मारपीट करना, उन्हे डराना या धमकाना, उन्हे धक्का देना या ठोकर मारना और लात या मुक्का मारना यह सभी शारीरिक हिंसा मे शामिल है ।

इसके अलावा भी अगर किसी अन्‍य रीत से महिला को शारीरिक पीड़ा या नुकसान पहुंचाए तो यह भी शारीरिक हिंसा मे शामिल होगा ।

 

भावनात्मक हिंसा :

किसी भी जगह महिला का अपमान करना, उसके चरित्र पर उंगली उठाना, दहेज लाने के लिए मानसिक त्रास देना, बार-बार अपमानजनक टिप्पणी करना, सबके सामने उनकी निंदा करना या हंसी उड़ाना,

पुत्र ना होने पर भी उनको परेशान करना, घर से बाहर ना निकलने देना, महिला की पसंदीदा व्यक्ति से शादी ना कराना या किसी और व्यक्ति से शादी कराने के लिए परेशान करना, नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर करना,

पुरुष द्वारा आत्महत्या करने की धमकी देकर मानसिक त्रास देना या अन्य किसी प्रकार का मौखिक दुर्व्यवहार भी भावनात्मक हिंसा मे शामिल है ।

 

लैंगिक हिंसा :

किसी महिला की सामाजिक प्रतिष्ठा को खराब करना, बलात्कार करना, अश्‍लील चीज़ों को देखने के लिए मजबूर करना और इसके लिए उनके साथ दुर्व्यवहार करना लैंगिक हिंसा मे शामिल है ।

 

आर्थिक हिंसा :

महिला और उसके बच्चों की पढ़ाई, कपड़े, खाना और दवाइयां जैसी प्राथमिक जरूरीयाते पूरी न करना, नौकरी न करने देना या उसकी आय को जबरन ले लेना, घर को चलाने के लिए या घर की उपयोगी वस्तुओं को रोकना आर्थिक हिंसा मे शामिल है ।

 

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घरेलू हिंसा के मुख्य कारण :-

घरेलू हिंसा का पहला कारण पुरुषो की मूर्खतापूर्ण मानसिकता ।

पुरुषो को लगता है की, महिलाएँ उनसे शारीरिक और भावनात्मक रूप से बहोत ज्यादा कमजोर होती है । और इसीलिए वह महिलाओ के साथ किसी भी कारण हिंसा कर सकते है ।

कुछ ना मर्द पुरुष का मानना कि, मर्द होने का अर्थ ही यह है की महिलाओ पर नियंत्रण । फिर महिला के साथ हिंसा करना ही क्यो न हो ।

gharelu hinsa essay in hindi

इसके अलावा दहेज भी घरेलू हिंसा का एक बड़ा कारण है । जब एक महिला से मांगी हुई चिजे दहेज मे नहीं मिलती तो पुरुष और उसका परिवार महिला के साथ मारपीट करता है ।

कई जगहो पर दहेज के लिए महिलाओ को जिंदा जलाए जाने की खबरें भी आपने समाचार मे देखि होगी । (Gharelu Hinsa Par Nibandh)

इसके अलावा लगातार ग्रामीण क्षेत्रों मे विधवाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा बढ़ने लगी है । उनके पति की मृत्यु के बाद उचित भोजन, कपड़े और अन्य चीज़ों से वंचित करके परिवार द्वारा परेशान किया जाता है ।

और ज़्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पुनर्विवाह के लिए महिलाओ को अनुमति नहीं दी जाती  ।

जब विवाहित संबंधों मे समस्या आती है, तब भी पुरुष द्वारा महिलाओ को सताया जाता है ।  

कई बार पुरुष अपनी पत्नि या परिवार वालो की बातों को अनदेखा करता है या उसकी आमदनी से घर को चलाने मे समस्या आती हो, तब पुरुषों को भी घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है ।

इसके अलावा जब एक पुरुष घरेलू कामो मे परिवार वालो को मदद नहीं करता या बच्चों की उचित देखभाल नहीं करता, तब भी पुरुषो को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है ।

जब कोई बच्चा अपने माता-पिता के आदेशों को ठुकराता है या पढ़ाई में खराब प्रदर्शन करता है, तब बच्चो के विरुद्ध घरेलू हिंसा होती है । (Gharelu Hinsa Par Nibandh)

कई बार पड़ोस के बच्चों की बराबरी की वजह से भी बच्चो के साथ घरेलू हिंसा की जाती है ।

बूढ़े माता-पिता की दवाईया या अन्य खर्चे जब बढ़ने लगते है, तब उनके ही बच्चे उन पर पैसे खर्च करने मे झिझकते है । जिसकी वजह से इन बूढ़े माता-पिता भी घरेलू हिंसा का शिकार हो जाते है ।

कई बार बच्चे इनसे छुटकारा पाने या उनकी संपत्ति हथियाने के लिये उनको मार भी देते है ।

और इस तरह मनुष्य का हर वर्ग घरेलू हिंसा से परेशान है । परंतु इसमे सबसे ज्यादा महिलाओ को सताया जाता है ।

 

(तोते के बारे मे हेरंतंगेज़ जानकारिया, एक बार जरूर पढे) 

 

घरेलू हिंसा के खतरनाक प्रभाव :-

घरेलू हिंसा से ना सिर्फ पीड़ित व्यक्ति को चोट पहुंचती है, बल्के उसका पूरा समाज और परिवार इससे प्रभावित होता है ।

और जिस व्यक्ति के साथ घरेलू हिंसा हुई है, उसे मानसिक रूप से बाहर आ पाना बहोत ज्यादा मुश्किल है ।

कई जगहो पर यह देखा गया की, घरेलू हिंसा से पीड़ित व्यक्ति की सोच नकारात्मक हो जाती है ।

कई जगहो पर घरेलू हिंसा से पीड़ित व्यक्ति को मानसिक आघात इतना खतरनाक होता है की, वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठते है ।

essay on domestic violence in hindi

एसे लोगो के अंदर आत्मसम्मान जैसे गुणो की कमी हो जाती है । (Gharelu Hinsa Par Nibandh)

इसके अलावा उन्हे घबराहट, चिंता, अकेलापन, भोजन और नींद की समस्याएं भी उत्पन्न होती है । और इन सबकी वजह से धीरे-धीरे वो नशीले पदार्थो का आदि बनने लगता है । एसी स्थितियो मे कई बार व्यक्ति आत्महत्या भी कर लेता है ।

हिंसा का शिकार हुई औरते सामाजिक जीवन की गतिविधियों में भी बहोत कम भाग लेती है ।

जब किसी परिवार मे एसी हिंसा होती है, तब उस घर के बच्चे भी आक्रामक व्यवहार सीखते है । यही बच्चे बड़े होकर घरेलू हिंसा को और बढ़ाते है ।

कुछ लोगो के मुताबिक जिन परिवारों मे घरेलू हिंसा होती है, वहां डर की वजह से बच्चे ठीक से भोजन भी नहीं खाते है । (Gharelu Hinsa Par Nibandh)

एसे बच्चो की वृद्धि और विकास मे देर लगती है । जिसकी वजह उनकी सीखने-समझने की शक्ति बहोत धीमी और कम हो जाती है ।

इसलिए हमेशा किसी भी समस्या को बैठकर सुलजाने की कोशिश करे, क्या पता आपको हिंसा करने की जरूरत ही न पड़े ।

 

घरेलू हिंसा का समाधान :-

घरेलू हिंसा की बढ़ती घटनाओ को देख भारत सरकार ने 2005 मे ही घरेलू हिंसा अधिनियम कानून बनाया था ।

और इसे 26 अक्टूबर, 2006 को संपूर्ण भारत मे लागू किया गया था । इस अधिनियम को महिला एवं बाल विकास आयोग द्वारा संचालित किया जाता है ।

इस अधिनियम के तहत शहर मे कुल आठ संरक्षण अधिकारी नियुक्त किए जाते है ।

इनका काम घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की शिकायत सुनकर जांच पड़ताल करना है । और जांच पड़ताल के बाद ही पूरे मामले को न्यायालय मे भेजा जाता है ।

essay on domestic violence in hindi language

अगर किसी महिला को परिवार द्वारा अपशब्द कहे जाए, उनके साथ मारपीट की जाए या उन्हे हर चीज़ के लिए रोक-टोक की जाए तो एसी महिला घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत उन पर केस दर्ज़ कर सकती है । (Gharelu Hinsa Par Nibandh)

सरकार ने तो इन अपराधीओ खिलाफ कार्यवाही करली, लेकिन सरकार को जब तक सामान्य लोगो का साथ नहीं मिलगा तब तक हम घरेलू हिंसा जैसी समस्याओ को जड़ से खतम नहीं कर सकेंगे ।

इसके लिए हमे खुद एसे आश्रय गृहो की स्थापना करनी होगी, जहा घरेलू हिंसा से पीड़ित व्यक्ति रह सके । 

इससे पीड़ित व्यक्ति के अंदर यह डर खत्म हो जाएगा की, वो घर से भाग कर कहा जाएगी ।

इसके लिए हमे कुछ शक्तिशाली संगठनों को साथ रखना होगा ताकि उस पीड़िता को कोई आश्रय गृहो मे मारने आए तो उसका बचाव हो सके ।

इन सब के लिए हमे तो कार्य करना ही होगा लेकिन इसके साथ-साथ हमे और लोगो को भी जागरूक करना होगा । (Gharelu Hinsa Par Nibandh)

हमे भारत की हर महिला तक उसके अधिकारो की जानकारी देनी होगी । और इनकी सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून भी उन तक पहोचाने होगे ।

बड़े-बड़े नेता और प्रसिद्ध लोग महिलाओ पर अत्याचारों करने वाले लोगो के विरोध मे बोले और उनकी निंदा करे ।

इसकी वजह से अपराधियो पर मानसिक दबाव आएग और कुछ हद तक घरेलू हिंसा शांत होगी ।

और एसे कई तरीके है, जिससे हम महिलाओ पर हो रहे आत्याचार और घरेलू हिंसा को रोक सकते है ।

अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है की, हम किस तरह महिलाओ की मदद कर सकते है और उन्हे हिंसा से बचा सकते है ।

 

निष्कर्ष :-

इतना सब कुछ जानने के बाद शायद अब आप लोगो को पता चल गया होगा की, आखिर क्यो हमे घरेलू हिंसा पर विचार करने की जरूरत है ?

इसमे भी खास कर महिलाओ पर हो रही घरेलू हिंसा, क्योकि वर्तमान मे नारी सुरक्षा हम सब के लिए एक गंभीर समस्या है ।

और इस समस्या का तब तक समाधान नहीं होगा जब तक हम सब एक जुट न हो । सिर्फ सरकार और कानून की वजह से इसमे कोई बदलाव नहीं होगा ।

अब मे आखिर मे आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हु की, क्या अब आप लोग घरेलू हिंसा के विरोध मे आवाज़ उठाएंगे या नहीं ? इसका जवाब कमेंट मे जरूर दे ।

और आपको यह घरेलू हिंसा पर निबंध (Gharelu Hinsa Par Nibandh) कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे घरेलू हिंसा पर निबंध दे सके । लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email करे ।

और अगर आपको इस निबंध से कुछ भी लाभ हुआ हो तो इसे शेर करना न भूले । (please share)

Thanks for reading Gharelu Hinsa Par Nibandh

 

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