हिन्दी दिवस पर भाषण- hindi diwas speech in hindi

आज हम hindi diwas speech in hindi यानि हिन्दी दिवस के बारे मे जानेगे ।

हिन्दी दिवस के मौके पर स्कूल, कॉलेज ओर विश्वविद्यालय में स्पीच-भाषण का आयोजन किया जाता है । लेकिन आप भी हिन्दी दिवस पर स्पीच देने का विचार कर रहे है ओर इसकी तलाश मे हैं तो यहां हम आपकी मदद करेंगे ।

हम पे विश्वास रखिए, यदि आपने हमारे दिये गए इस hindi diwas speech in hindi लेख को पूरा पढ़ा तो आपके भाषण (स्पीच) से सारे लोग बहोत खुस होंगे ओर चारो तरफ तालियों की आवाज गूंज उठेगी ।

आपके स्कूल, कोलेज, यूनिवर्सिटी आदि जगह पर अगर आपको बोलने का अवसर मिलता हे तो इसे जाने न दे । क्योकि इस से आपके अंदर लोगो के सामने बोलने की skill develop होगी ओर communication भी आपकी बेहतर होगी ।

आप चिंता न करे एक सुनियोजित स्पीच कैसी होती है, आपको स्पीच मे क्या बोलना हे ओर कैसे आपको लोगो का पूरा ध्यान अपने तरफ रखना है वो सब कुछ हम आपको सिखाएँगे ?

अपनी स्पीच को शुरू करने से पहले आप मंच पर जाकर सभा में उपस्थित सभी लोगों का अभिवादन करें । उसके बाद अपना परिचय दें, अपना नाम ओर कौन-सी कक्षा में पढ़ते हैं वो भी बताएं ।

लेकिन आप स्कूल मे नहीं किसी अन्य आयोजन में स्पीच दे रहे हैं तो अपनि संस्था का नाम भी बताएं । वहा पे मोजूद सभी लोगो को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं दें ।   

उसके बाद आप अपने आयोजनकर्ता या शिक्षक का धन्यवाद करें जिन्होंने इस महान अवसर पर मंच पर आकर बोलने का मौका दिया ।

अपने स्पीच के दरमियान अपने हिन्दी दिवस से जुड़ी किसी घटना को भी अपनी स्पीच में बता सकते हैं ।

इसके अलावा अपनी स्पीच मे ये भी बताए की हिन्दी दिवस की अहमियत हर भारतीय के जीवन में क्या होती है । हिन्दी भाषा के क्षेत्र में जिन हस्तियो का अतुलनीय योगदान है उनके बारे मे भी बता सकते है ।

तो चलिये,

अब अपनी स्पीच शुरू करे :

सम्मानित मुख्य अतिथि, शिक्षकगण और मेरे प्यारे दोस्तों । सबसे पहले मैं आपको हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं देता/देती हूं ।

हिन्दी दिवस पर कुछ भी बोलना ये मेरे लिए सौभाग्य है । इसीलिए मे आप सब को धन्यवाद करना चाहूंगा । मेरा नाम ______ है और मैं कक्षा __ में पढ़ता हूँ ।

मैं आभारी हूं उन सभी शिक्षको का जिन्हों ने आज के इस अवसर पर मुझे अपने विचार रखने का मौका दिया ।

भारत देश में हर साल शिक्षक दिवस, बाल दिवस, स्वतंत्रता दिवस आदि जैसे अलग अलग दिवस मनाए जाते हैं ।

इसी तरह से भारत में हिन्दी दिवस भी मनाया जाता है । हमारे भारत में सबसे अधिक बोली जानें वाली मातृभाषा हिन्दी है ।

हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी ने हिन्दी भाषा को जनमानस की भाषा कहा है ।

hindi diwas ka itihas

मंदारिन चाइनिस, अंग्रेजी ओर स्पेनिश के बाद हिन्दी दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है ।

आपको क्या लगता है की हिन्दी सिर्फ एक भाषा है ? बिलकुल नहीं, हिन्दी भावनाओं का उमड़ता सैलाब है जो हररोज अपनी सफलता के सोपान चढ़ता है ।

देश में हिंदी भाषा को राज भाषा का दर्जा प्राप्त है क्योकि करीब भारत के 77 प्रतिशत से भी ज्यादा लोग हिंदी बोलते हैं ।

हिंदी के विकास में काका कालेलकर, भारतेंदु हरिश्चन्द्र, मैथिलीशरण गुप्त, देवकीनंदन खत्री, प्रेमचंद, आचार्य हजारी प्रसाद दिवेदी, महादेवी वर्मा, शेठ गोविंददास, रामचन्द्र शुक्ल जैसे लेखको ने अमूल्य योगदान दिया है ।

चलो अब हम हिन्दी दिवस के इतिहास के बारे मे जानते है ।

ये बात हे साल 1918 की । इस साल बड़े पैमाने पर हिन्दी साहित्य सम्मेलन हो रहा था ओर उस वक्त सबसे पहले गांधीजी ने हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था ।

लेकिन उस वक्त ब्रिटिश लोगो का शासन था । इसीलिए हिन्दी दिवस के बारे मे लोगो को ज्यादा पता नहीं चला ।

लेकिन जब हमने अंग्रेज़ो को भारत से निकाल दिया ओर उसके बाद जब हमारे देश का संविधान बन रहा था तब हिन्दी को राष्ट्रभाषा के लिए चुना गया ।

14 सितम्बर 1949 को काफी विचार के बाद हमारे संविधान मे भाग 17 के अनुच्छेद 343(1) में यह निर्णय लिया गया की, अब भारत देश की राष्ट्रभाषा हिन्दी ओर लिपि देवनागरी है ।

14 सितम्बर को हिन्दी के बड़े साहित्यकार राजेन्द्र सिंहा का 50वा जन्मदिन था इसीलिए हिन्दी दिवस 14 सितम्बर को श्रेष्ठ माना गया ओर तभी से हिन्दी दिवस 14 सितम्बर को मनाया जाता है ।

लेकिन इसका फेसला देश के पहले प्रधान मंत्री यानि जवाहरलाल नेहरू ने लीया था साल 1953 मे पहली बार हिन्दी दिवस हमारे देश मे मनाया गया था ।

200 साल की ब्रिटिशरो की गुलामी के बाद आज़ाद भारत के हर व्यक्ति ने सपना देखा था कि, एक दिन पूरे भारत मे एक ही भाषा होगी, जिसके कारण देश के हर कोने मे वाद-संवाद होगा ।

लेकिन जब हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में चुना गया तभी से गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोग इसका विरोध करने लगे । इसीलिए अंग्रेज़ी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा ।

लेकिन हिन्दी दिवस के दिन हमारे देश मे क्या-क्या कार्यक्रम होते है ओर कैसे हिन्दी दिवस को मानते है ।

हिन्दी दिवस के दिन स्कूल, कॉलेज, युनिवेर्सिटी ओर ऑफिस में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है ।

इस दिन शिक्षक अपने विद्यार्थियों को हिन्दी का महत्त्व समझाते हैं ओर इस से सम्बंधित कई प्रतियोगिता की जाती हैं जैसे निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिता आदि  ।

hindi diwas ke din karykram

इस दिन विध्यार्थीओ को दैनिक जीवन में हिन्दी के उपयोग करने की शिक्षा दी जाती है ।

इस दिन पर हिन्दी के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए एक सम्मान की शुरुआत की गई है ।

यह सम्मान हर साल उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसने हिन्दी भाषा के प्रयोग एवं सुधार के लिए विशेष योगदान दिया है । सम्मान स्वरूप उस व्यक्ति एक लाख एक हजार रुपये दिये जाते हैं ।

इसके अलावा भी हिन्दी भाषा के प्रति लोगों को उत्साहित करने के लिए पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जाता है । जिसमें अलग-अलग कार्य मे सबसे अच्छी हिन्दी का उपयोग करने वाले व्यक्ति को यह पुरस्कार दिया जाता है ।

इस पुरस्कार का नाम पहले राजनेताओं पर था । लेकिन अब इन पुरस्कारों का नाम बदलकर राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरस्कार और राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार कर दिया है ।

लेकिन इसमे जो राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार है वो लोगों को दिया जाता है जबकि राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरस्कार  किसी समिति या विभाग को दिया जाता है ।

भारत के राष्ट्रपति भी हर साल हिंदी दिवस पर हिंदी भाषा में सर्वश्रेष्ठ योगदान देने वाले लोगों को राजभाषा पुरस्कार से सम्मानित करते हैं ।

भारत के सभी शिक्षण संस्थानों ओर सरकारी कार्यालयों में 15 दिनों तक हिंदी पखवाड़ा मनाया जाता है । इन 15 दिनो मे सभी कार्य हिंदी में किये जाते हैं, उसके साथ-साथ कई प्रतियोगिताएं ओर साहित्यिक कार्यक्रम भी कराए जाते हैं ।

लेकिन फिर भी इतने पुरस्कार, आयोजन करने के बाद भी कई लोग हिन्दी को बोलने मे शर्मिंदगी महसूस करते है आखिर क्यो ? इसका जवाब आप मौजे कमेंट मे जरूर दे ।

यहा पर मोजूद कई लोगो के मनमे प्रश्न होता होगा की, हिन्दी दिवस को एक उत्सव के तरह मनाने के पीछे उद्देश्य क्या है ?

पूरी दुनिया मे सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओ मे से चीनी, अंग्रेजी ओर स्पेनिश के बाद हिन्दी चोथी सबसे बड़ी भाषा है । लेकिन हिन्दी को अच्छी तरह से समझने, पढ़ने और लिखने वालों की संख्या बहुत कम है ।

इसका मुख्य उद्देश्य इसी से संबन्धित है । आज हम इस बात से जरा भी इन्कार नही कर सकते कि हिंदी भाषा पर दिन-प्रतिदिन संकट बढ़ता जा रहा है ।

भारत के ज़्यादातर लोग यही चाहते कि, उनके बच्चे अंग्रेजी के विद्यालयों में पढ़े और अच्छी तरह से अंग्रेजी को जाने । ये बात प्रमाणित करती है कि हिंदी भाषा हमारे देश में ही दूसरे दर्जे की भाषा बनकर रह गयी है ।

hindi diwas ka udeshya

अगर सच कहे तो हिन्दी भाषा की समस्या हम भारतीय ही हैं ।

इस से मुझे चाणक्य का कथन याद आता है । उन्होंने कहा था कि, जब तक कोई राष्ट्र अपने संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करता है तब तक उस राष्ट्र को कोई पराजित नहीं कर सकता ।

लेकिन क्या आज हम पश्चिमी संस्कृति को अपनाने नहीं लगेगे ? क्या आज हमने अपने मूल्यो को दाव पर नहीं लगाया है ?

आज हम सभी ने, ना सिर्फ अग्रेंजी भाषा बल्के अंग्रेजी के तौर तरीके को भी अपनाने लगे है । जिसके कारण हम अपने मूल भाषा और रहन-सहन को भी छोड़ने के लिए तैयार हो गये हैं ।

लेकीन याद रखना अगर आज हम अपनी संस्कृति ओर मूल्यो की रक्षा नहीं करेंगे तो हम विकसित नहीं हो सकते । क्योकि आप किसी दूसरे देश की संस्कृति को अपना रहे है ।

आज हमारे देश की स्थिति ऐसी हो गयी है कि लोग अपने बच्चो को हिंदी विद्यालयो मे दाखिला दिलाने में भी संकोच महसूस करते है ।

क्योकि अधिकतर माता-पिता यह चाहते हैं कि उनका बच्चा पहले अंग्रेजी लिखना-बोलना सिखे ओर फिर हिन्दी ।

संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाओ मे आज तक हिन्दी को स्थान नहीं मिला आखिर क्यो ? अगर हमारे देश के योग को 177 देशों का समर्थन मिल सकता है तो क्या हिन्दी के लिए 129 देशों का समर्थन हम नहीं मिल सकता ?

लेकिन आज के समय में युवाओं को हिन्दी भाषा बोलने में शर्मिंदगी होती है, जो कि बिलकुल सही नहीं है ।

भारत के कई बड़े साहित्यकारों ने अपनी बातें कहने के लिए हिंदी भाषा को चुना क्योंकि हिन्दी के शब्द ही नहीं, इसके भाव भी लोगों के दिल को छू जाते हैं ।

लेंकीन अब आपके मनमे प्रश्न होता होगा की क्या अब हम हिन्दी भाषा की उन्नति कर सकते है ?

जी हा, ऐसे कई तरीके है जिनकी वजह से हम भारत के लोगो को हिन्दी भाषा के महत्व को समझा सकते है । तो चलिये जानते है ।

अंग्रेजी ही आधुनिक समाज में सबकुछ है, सबसे पहले हमें लोगो की इस मानसिकता को बदलना होगा । इस मानसिकता को बदलने के लिए हमे लोगो के अंदर जागरुकता लानी होगी ।

hindi diwas par bhashan

हमें लोगो को समजाना होगा की, भारत को अगर विकसित राष्ट्रो की सूची में शामिल होना हे तो हम सबको हिंदी को अपनाना होगा ।

क्योकि किसी भी देश की पहचान उसकी मातृभाषा होती है । हमे अंग्रेजी के पीछे ऐसा भी पागल नहीं होना जिसकी वजह से हम अपने संस्कृति, विचारों, मूल्यो और भाषा को ही भूल जायें ।

यदि अंग्रेजी ही तरक्की ओर विकास का कारण होती तो जापान, जर्मनी और इटली जैसे देश इतने विकसित नही होते । ये देश अपनी मातृभाषा को शिक्षा के साथ अन्य क्षेत्रों में भी महत्व देते है ।

हिन्दी भाषा की उन्नति के लिए हमे सरकार का भी थोड़ा साथ चाहिए । अगर हमारी सरकार देश मे मोजूद सभी अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों को बता दे की आपको अंग्रेजी के साथ हिंदी को भी बराबरी का स्थान देना होगा ओर अंग्रेजी जितना ही महत्व देना होगा ।

आधुनिक युग मे हम सब भारतीयो को सोशल मीडिया का फाइदा उठाना चाहिए । सोशल मीडिया के माध्यम से भारत के हर व्यक्ति को हमे ये संदेशा पहुंचाना चाहिए की हिंदी भाषा को ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल करें ।

हिन्दी भाषा का विकास करना हे तो कुछ लोगों के कार्य करने से कोई लाभ नहीं होगा । इसके लिए हम सभी को एक साथ रहना होगा ताकि हम हिन्दी भाषा का विकास कर सके और विलुप्त होने से हिन्दी भाषा को बचा सके ।

मेरा आप सभी से यही निवेदन है कि बोल-चाल और लिखते वक्त हिंदी भाषा का इस्तेमाल ज्यादा-से-ज्यादा करे ।

आज के युग में हमें अंग्रेजी भाषा सीखना जरूरी है लेकिन अपनी मातृभाषा हिंदी को कभी नहीं भूलना चाहिए ।

अंत मे आप सभी से यही कहना चाहते हु की, जिस भाषा में हम ओर आपने सारा जीवन बिताया उस हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अपना सहयोग जरूर दे ओर देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाएँ ।

इस सभा का हिस्सा बनने के लिए और मुझे इतने धैर्य से सुनने के लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।

जय हिंद जय भारत।

अब मे आपसे पूछना चाहता हु की आपको ये लेख hindi diwas speech in hindi कैसा लगा । हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे हिन्दी दिवस के विषय पर भाषण (स्पीच) दे सके ।

लेकीन फिर भी आपको hindi diwas speech in hindi मे कोई समस्या हो तो आप हमे email करे ।

आपको ओर किसी विषय पर स्पीच चाहिए तो कॉमेंट मे जरूर बताए । ओर इसे शेर जरूर करे ।

मुझे अपना बहुमूल्य समय देने और सुनने के लिए आप सभी का धन्यवाद ।

Thank you to all my readers

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