कचरा एक बरबादी: दुनिया को बर्बाद करने वाला बड़ा कारण

दोस्तो, आज हम कचरा एक बरबादी के मज़ेदार लेख को विस्तृत मे जानेगे । यह निबंध आपको स्कूल के हर क्लास ओर कॉलेज मे काम आने वाला है ।

हम इस लेख मे कचरे से हो रहे नुकसान के बारे मे ओर किस तरह हम एक अंधकार की तरफ जा रहे हे उसके बारे मे जानेंगे । 

हम पर भरोसा करें, कचरा एक बरबादी के लेख को पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह या प्रश्न रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है ।

प्रस्तावना :

यदि आपका परिवार भी  कुछ मेरे जैसा है, तो मुझे यकीन है कि आप बहुत अधिक घरेलू कचरा पैदा करते होंगे ।

ओर आपने शायद अपना सारा अपशिष्ट कचरे के डिब्बा में फेंक दिया होगा, बिना यह सोचे कि इसमे से कुछ भी रिसाइकिल किया जा सकता है या नहीं ?

वैश्विक कचरा की चुनौतियों का समाधान करने के लिए ओर बढ़ती कल्पना और नवीनता के लिए विश्व पर्यावास दिवस 1 ओक्टोबर को मनाया जाता हे ।

ठीक है, चलो हमने इस दिन तो कम से कम एक बार कचरे को प्रबंधन किया । लेकिन कचरे से छुटकारा पाने का ये सही तरीका नहीं है ।

लेकिन अगर यही काम हम हररोज़ करते रहे तो एक ना एक दिन हम इस बरबादी से विश्व को बचा सकते हे ।

कचरा क्या है और यह कितने प्रकार का होता है ?

साधारण भाषा मे समजे तो, हम अपने दैनिक जीवन मे बहोत चीज़ों का उपयोग करते है । उनका उपयोग करके भी जो हिस्सा बच जाए उसे हम फेंक देते है । उसी को कचरा कहा जाता है ।

jalvayu parivartan ke karan kya hai

जो हमारे घर के आसपास कचरा पाया जाता हे उनको पाँच प्रकार में वर्गीकृत किया जा सकता है ।

तरल कचरा :-

तरल कचरा आमतौर पर घरों के साथ-साथ उद्योगों में भी पाया जाता है । इस कचरे में गंदा पानी, जैविक तरल पदार्थ, धोने का पानी, अपशिष्ट डिटर्जेंट और बारिश का पानी शामिल है ।

आपको यह भी पता होना चाहिए कि तरल कचरे को बिंदु और गैर-बिंदु स्रोत कचरे में वर्गीकृत किया जा सकता है ।

सभी तरल कचरे को बिंदु स्रोत कचरे मे ओर प्राकृतिक तरल कचरे को गैर-बिंदु स्रोत कचरे के रूप में वर्गीकृत किया जाता है ।

ठोस कचरा :-

ठोस कचरे में वाणिज्यिक और औद्योगिक स्थानों के साथ-साथ आपके घर में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के बैग, कंटेनर, जार, बोतलें और सभी प्लास्टिक के उत्पादन शामिल है ।

प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं है, लेकिन कई प्रकार के प्लास्टिक को पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है । प्लास्टिक को आपके नियमित कचरे के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए, इसे छांटना (अलग) चाहिए ।

इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री, समाचार पत्र, कार्डबोर्ड और अन्य उत्पादन भी ठोस कचरा मे शामिल है ।

सभी खाद्य कचरा, उद्यान कचरा और सड़े हुए मांस को जैविक कचरे के रूप में वर्गीकृत किया जाता है । समय के साथ जैविक कचरे को सूक्ष्मजीव खाद में बदल देते है ।

रिसाइकिलेबल रबिश :-

रिसाइकेबल रबिश में सभी कचरा पदार्थ शामिल होते हे जिन्हें फिर से उपयोग किए जा सकने वाले उत्पादको में परिवर्तित किया जा सकता है ।

ठोस पदार्थ जैसे कागज, धातु, फर्नीचर और जैविक कचरा सभी को पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है । इन वस्तुओं को नियमित कचरे के साथ फेंकने के बजाय, उन्हें अपने स्थानीय रीसाइक्लिंग डेपो में ले जाएं, ताकि वेस्ट मे से चीज़ों को बेस्ट बना सके ।

खतरनाक कचरा :

खतरनाक कचरे मे ज्वलनशील, विषाक्त, संक्षारक और प्रतिक्रियाशील कचरा शामिल होता है । 

एसे अपशिष्ट आपको पर्यावरण के साथ नुकसान पहुंचा सकते है । इसीलिए इसे सही तरीके से निपटाना चाहिए ।

इसलिए, मैं आपको सभी खतरनाक कचरे के उचित निपटाने के लिए कचरा हटाने वाली कंपनी का उपयोग करने की ही सलाह देता हूं ।

खाद्य कचरे से उत्पन्न मीथेन गैस, CO2 की तुलना में 20 से 25 गुना अधिक मजबूत होती है । प्रत्येक टन कागज जो पुनर्नवीनीकरण किया जाता है, वो लगभग 17 पेड़ों को बचाता है ।

कचरा क्यों ओर कब एक समस्या बन गया ?

मनुष्य पहले से ही अपने स्वभाव से बहुत ही लापरवाह होते थे । यह 20 वीं सदी का लक्षण नहीं है । ये तो गारबोलॉजिस्ट्स ने कई सालो पहले पता लगा लिया था ।

अगर जीवन के अंत का प्रबंधन ठीक से नहीं किया जाता है, तो मनुष्य आर्थिक, स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी मुद्दों को शामिल करते हैं , यानि उनको कारण बनाते है ।

kachre ke prabhav kya hai

जैसा कि कचरा इतिहास की समयावधि बताता है, मनुष्य के शुरुआती समय से ही कचरे की समस्या रही है । इतिहास में कचरे से निपटने के चार बुनियादी साधनों का उपयोग किया गया है ।

  1. डंप करना
  2. जलाना
  3. पुनर्चक्रण
  4. कम से कम करना

मध्य अमेरिका के मेयन भारतीय कचरे को डंप करते थे जो कभी-कभी फट जाते थे । उन्होंने भी पुनर्नवीनीकरण किया ।

कचरे ने इतिहास में एक जबरदस्त भूमिका निभाई है । 

बुबोनिक प्लेग, हैजा और टाइफाइड बुखार, जैस रोग यूरोप की आबादी को बदलने और राजशाही को प्रभावित करने वाले रोग थे ।(मतलब कई बार कुछ खराब घटनाए भी अच्छा कम कर जाती हे)

वे लोग बहुत गंद मचाते थे, और पानी को दूषित करते थे । यूरोपीय लोगों के लिए अपना कचरा और यहां तक ​​कि मानव कचरे को खिड़की से बाहर फेंकना असामान्य था ।

अपशिष्ट (कचरा) एक महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दा है । वैश्विक आबादी और जीवन स्तर में वृद्धि के कारण कचरे की मात्रा बढ़ती ही जा रही हे । इसीलिए पर्यावरण पर इसका गंभीर प्रभाव पड रहा हे ।

इसके प्रभाव को कम करने के लिए केवल बुनियादी या छोटे उपचार काम नहीं करने वाले । इसके साथ-साथ हमे सालाना बड़े पैमाने पर कचरे का उत्पादन को घटाने का उपचार भी करना होगा ।

आइये एक उदाहरण से समजते हे की आखिर कचरा एक बरबादी क्यो है ?

रबर कचरे का महत्वपूर्ण मुद्दा प्रस्तुत करता है । आपको भी पता होगा की रबर मे से टायर बनाया गया है । ओर यह टायर का वपराश खतम होने पर उसे या तो फेक देते हे या जला देते हे ।

ऐसे ही वैश्विक स्तर पर वपराश करके छोड़े गए टायरों की संख्या 1.5 बिलियन से अधिक आंकी गई है ।

इनमें से, सिर्फ 5% ही स्थानीय रूप से पुनर्नवीनीकरण किए जाते हैं । ओर लगभग 32% का पुनर्चक्रण और ऊर्जा वसूली के लिए निर्यात किया जाता है । तो बाकी के टायर कहा गए ? आप इस पर विचार कर सकते हे ।

टायर को जब जलाया जाता हे तो उसमे से जहरीली गैस और रसायन निकलते हे । वे मीथेन गैसों को फँसा सकते हैं, जिससे सतह पर उछाल, या बुलबुले बन सकते है ।

वैश्विक स्तर पर समस्या और भी विकट है । क्योकि जीवन के आधे से अधिक छोर टायर को ईंधन के तोर पर इस्तिमल किया जाता हे, जिससे खतरनाक और जहरीली गैसों का उत्सर्जन होता है ।

ये तो सिर्फ एक चीज़ है । एसे तो कई चिजे हे जो विश्व के आगे बड़ी समस्या बनकर बेठी है । ओर इसमे प्लास्टिक का तो कहना ही क्या ?

हाल के वर्षों में सबसे अधिक जो रीसाइक्लिंग के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया है वो हे प्लास्टिक ।

कचरे के प्रभाव क्या हैं ?

आज बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न हो रहा है । जैसे भोजन और उद्यान कचरा, निर्माण और विध्वंस कचरा, खनन कचरा, औद्योगिक कचरा, कीचड़, पुरानी टेलीविजन, पुरानी कारें, बैटरी, प्लास्टिक बैग, कागज, सैनिटरी कचरा, पुराने कपड़े और पुराने फर्नीचर ।

हम जो भी कचरा फेंकते हैं, उसमें से बहुत कुछ रिसाइकिल किया जा सकता है ।

paryavaran ke liye kachra kitna kharab hai

हम पुनर्चक्रण कचरा को लैंडफिल से दूर करके और नए उत्पादनो के लिए कच्चे माल प्रदान करके पर्यावरण को लाभान्वित कर सकते है । इससे हम रोजगार भी पैदा कर सकते है ।

लैंडफिल को कचरा पदानुक्रम में अंतिम उपाय माना जाता है । जलवायु, परिवर्तन से जुड़ी एक बहुत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस, मीथेन को रिलीज करता है ।

मीथेन बायोडिग्रेडेबल कचरे, जैसे भोजन, कागज और बगीचे के कचरे से लैंडफिल में मौजूद सूक्ष्मजीवों द्वारा बनता है । उनके बनाए रास्ते के आधार पर, लैंडफिल मिट्टी और पानी को भी दूषित कर सकता है।

पर्यावरण अनमोल है । ये हम सब जानते हे लेकिन क्या हमारे कार्य पर्यावरण को नकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करते ? ये हमे अपने आपसे प्रश्न पूछना चाहिए ।

जब खाद्य कचरा को लैंडफिल में भेजा जाता है, तो यह विघटित हो जाता है । यह विघटित होकर मीथेन गैस छोड़ता है । ओर मीथेन गैस कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 84 गुना अधिक शक्तिशाली है ।

यदि आप उन तरीकों की खोज कर रहे हे जो आपके व्यवसाय को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकते हैं, तो सिर्फ अपने भोजन की बर्बादी को पुन: चक्रित करने पर विचार करें ।

किसी ने क्या खूब लिखा हे की, विज्ञान का उचित उपयोग प्रकृति पर विजय प्राप्त करना नहीं है बल्कि उसमें जीना है ।

बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अपशिष्ट पदार्थ पर्यावरण ओर मानवजाती के लिए बहुत हानिकारक है ।

यदि इस अपशिष्ट का गलत तरीके से निपटान किया जाए तो भी इसका परिणाम वायु को प्रदूषित कर सकता है ।

ओर इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मे आर्सेनिककैडमियमलेड और मरकरी जैसी कई खतरनाक सामग्री होती हे जो मानव स्वास्थ्य के लिए खराब है ।

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग से निपटने का महत्व:

जलवायु परिवर्तन का शाब्दिक अर्थ हमारे आसपास की दुनिया को बदलना है । यह मानव प्रजातियों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है ।

जलवायु की जानकारी के आधार पर, 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से ग्रह की औसत सतह के तापमान में लगभग 1.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई थी । ये हमारे लिए बहुत खतरनाक हे ।

kachra kya hai

नाइट्रस ऑक्साइड, जल वाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसे कई अलग-अलग ग्रीनहाउस गैसों के साथ, वायुमंडल ग्रीनहाउस प्रभाव एक गंभीर मुद्दा है जिससे निपटने की आवश्यकता है ।

जलवायु परिवर्तन के कारण क्या हैं ?

जलवायु परिवर्तन के लिए कई अलग-अलग कारण है । इसमे  सबसे अधिक ज्ञात कारणों में से एक जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता है ।

हालाँकि, कचरा निपटान भी हमारे पर्यावरण पर बहुत गंभीर प्रभाव डाल सकता है और अगर जिम्मेदारी से निपटारा नहीं किया जाता तो कचरा हमारे पर्यावरण को बहुत गंभीर तरीके से प्रभावित कर सकता है ।

जलवायु परिवर्तन के बारे में क्या किया जा सकता है ?

जलवायु परिवर्तन के कई अलग-अलग कारण हे जिनमें से कुछ में कचरा निपटान शामिल है ।

अपने आपको नैतिक और जिम्मेदार व्यक्ति समजकर कचरे का निपटान करे । इसके लिए आप एक कचरा प्रबंधन कंपनी से पेशेवर अपशिष्ट निपटान सेवा का उपयोग करना है जो पर्यावरण का सम्मान करती है ।

jalvayu parivartan ke bare me kya kiya jae

कचरे से होने वाला सबसे खतरनाक कारण जो न जाने हर रोज हजारो जानवरो की जान ले लेता हे । ओर हमारे वातावरण-पर्यावरण दोनों को हद से ज्यादा नुकसान पोहचाता हे ,ओर वो कारण हे प्लास्टिक ।

वन्यजीवों पर कूड़े का प्रभाव समुद्री और ग्रामीण क्षेत्र दोनों वातावरण में महसूस किया जाता है ।

समुद्री वातावरण में हर साल लाखों व्हेल, पक्षी, सील और कछुए प्लास्टिक बैग के कूड़े से मारे जाते है । क्योंकि वे अक्सर जेलिफ़िश जैसे भोजन के लिए प्लास्टिक के बैग में गलती करते है ।

प्लास्टिक की थैलियाँ एक बार निगले जाने पर किसी जानवर द्वारा उसे पचाया नहीं जा सकता, इसलिए यह आंत (अंतड़ी) में रहता है ।

एक जानवर की आंत में प्लास्टिक भोजन के पाचन को रोक सकता है । जिसके कारण उनकी बहुत धीमी ओर दर्दनाक मौत हो सकती है ।

क्योकि प्लास्टिक की थैलिया को टूटने में 1,00 साल तक का समय लग जाता है । 6 वर्ग मीटर प्लास्टिक निगलने से एक व्हेल मर जाती है ।

जानवरों में इस तरह के अवरोधों से गंभीर दर्द, संकट और मृत्यु हो सकती है । तो बताओ की कचरा एक बरबादी हे या नहीं ?

ब्रायड की व्हेल बड़ी मात्रा में पानी निगलकर खाने वाली होती है । यदि ब्रायड की व्हेल समुद्र में मर जाए तो वो सड़ जाती । ओर आने वाले कई सालो तक अन्य समुद्री जीव को मारने के लिए प्लास्टिक को छोड़ देती ।

पीट पेलिकन नामक एक समुद्री जीव है । जिसकी मौत 17 प्लास्टिक बैग निगलने के बाद हुई थी । पक्षी भी उनमें फंसकर उड़ने में असमर्थ हो जाते हे ओर अंत मे बिचारे भुखमरी से मर जाते है ।

ओर ऐसे तो हर रोज़ न जाने कितने जानवर अपनी जान प्लास्टिक निगल लेने के बाद दे देते है । हमे इसके बारे मे जरूर सोचना चाहिए ।

कचरे का खतरनाक स्वरूप : प्लास्टिक

ANIMALS STUCK नाम की वेबसाइट यह रिकॉर्ड करती है कि कितने जानवरों की प्रजातियों प्लास्टिक से प्रभावित होती है । यह संख्या अब 2000 से अधिक प्रजातियों की है और लगातार बढ़ रही है ।

इसमें ऐसे जानवर शामिल है जो प्लास्टिक में फंस जाते है । जब ऐसा होता हे तो जानवर अब स्वतंत्र रूप से आगे नहीं बढ़ सकते ओर फिर वे विच्छेदन के कारण घुटते हे, भूखे रहते हे, या अंगों को खो देते है ।

kachra kab or kyo samsya ban gaya

इन बिचारे अबोल प्राणियो की क्या गलती हे जिससे उनको इतनी भयानक मृत्यु मिलती हे।

प्लास्टिक में फंसने से जानवरों के लिए भयानक परिणाम हो सकते हैं जैसे कि कम गतिशीलता, भुखमरी, डूबना या घुटन ।

प्लास्टिक में फंसे जानवर भोजन खोजने में कम सक्षम हो जाते हे और शिकारियों के लिए भी आसान शिकार बन जाते है ।

समुद्री स्तनधारी जैसे समुद्री शेर, डॉल्फ़िन और सील नियमित रूप से अपनी जिज्ञासा के शिकार होते है । और कछुए आसानी से प्लास्टिक में फंसने के लिए भी जाने जाते है ।

वे प्लास्टिक की वस्तुओं के ठीक ऊपर तैरते हे और उनके साथ खेलते है । इन प्रजातियों ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि ये वस्तुएँ मज़ेदार नहीं बल्कि खतरनाक है ।

पक्षी तो बिचारे गुब्बारे से निकले ओर प्लास्टिक में उलझ गए ।  क्योकि गुब्बारे छोड़ना हमारे लिए एक उत्सव हे लेकिन इन पक्षियों के लिए मृत्यु ।

प्लास्टिक सूप फाउंडेशन और अन्य पर्यावरणीय संगठन वर्षों से ये अभियान चला रहे हे की, बैलून गैट नीट ऑप । यानि की गुब्बारे ऊपर नहीं जाते ।

जिसका मुख्य उद्देश्य गुब्बारों के उत्सव को हतोत्साहित करना और रोकना है ।

वर्तमान दरों से अगर देखा जाए तो लोगो को प्लास्टिक से समुद्र की सभी मछलियों को निकालने की उम्मीद 2050 तक सफल हो सकती है ।

21 वीं सदी के पहले दशक मे हमने वर्ष 2000 तक के इतिहास में सभी प्लास्टिकों की तुलना में अधिक प्लास्टिक बनाया है ।

हर साल दुनिया के महासागरों में अरबों पाउंड से भी अधिक प्लास्टिक डाला जाता है । कुछ अध्ययनों के अनुसार दुनिया के महासागरों में अब 15-15 खरब प्लास्टिक के टुकड़े है ।

हमें वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण महामारी को संबोधित करने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है ।

पृथ्वी के प्रमुख पाँच महासागर प्लास्टिक प्रदूषण से प्रभावित है । उत्तरी प्रशांत में मछली हर साल 12,000 से 24,000 टन प्लास्टिक निगल लेती है ।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में समुद्री कछुओं में से आधे ने प्लास्टिक का सेवन किया है।

यह अनुमान है कि सभी समुद्री प्रजातियों में से 60 प्रतिशत प्रजातियों ने प्लास्टिक के टुकड़े खाए है । ओर 2050 तक यह संख्या 99 प्रतिशत तक हो जाएगी ।

मृत समुद्री पक्षी अक्सर प्लास्टिक से भरे पेट के साथ पाए जाते है । यह दर्शाता हे कि हमारे महासागरो मे कचरे की मात्रा कितनी तेजी से बढ़ रही है । ओर कब तक ये बिचारे अबोल जीव अपनी एसे ही देते रहेंगे ।

निष्कर्ष :

अब आप लोगो को पता चला होगा की आखिर कचरा एक बरबादी क्यो है । इसका समाधान करने के लिये ओर कुछ निराकरण लाने के लिए सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डायवर्सिटी जैसी कई संस्था काम कर रही है ।

कई पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने भी सरकार को कहा की आप प्लास्टिक को स्वच्छ जल अधिनियम के तहत प्रदूषक के रूप में विनियमित करे । ताकि प्लास्टिक भी खतरनाक प्रदूषण के रूप मे माना जाए ।

लेकिन हमे भी कचरे (अपशिष्ट) के बारे मे लोगो को जागरूक करना चाहिए । अकेली सरकार से भी कुछ नहीं होने वाला जब तक हम लोग उनको साथ न दे ।

इसीलिए आज से ही स्वच्छता रखे ओर दूसरों को भी कचरा न फैलाने पर ओर स्वच्छता रखने का संदेशा दे ।

अब मे आखिर मे आपसे पूछना चाहता हु की आपको ये कचरा एक बरबादी का लेख कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे कचरा एक बरबादी के लेख को दे सके । कचरा एक बरबादी लेख मे आपको कोनसा टॉपिक अच्छा लगा वो मुजे comment मे जरूर बताए ।

लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email जरूर करे । 

इस लिख यानि कचरा एक बरबादी को पूरा पढ़ने के बाद पर्यावरण से प्यार न करने वाला ही होगा, जो इसे share न करे । इसीलिए इसे अपना कर्तव्य समजकर अपने दोस्त-परिवार मे जरूर शेर करे । (please share)

Thanks for reading कचरा एक बरबादी

 

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