कचरा प्रबंधन पर निबंध (हेरतंगेज़ और खतरनाक तथ्यो के साथ)

दोस्तो,आज हम कचरा प्रबंधन पर निबंध (kachra prabandhan par nibandh ) को विस्तृत मे जानेगे । यह निबंध आपको स्कूल के हर क्लास ओर कॉलेज मे काम आने वाला है ।

हम इस निबंध मे जानेगे की आखिर कचरे को प्रबंधन करना क्यो जरूरी है ?

क्यो आज एसा कहा जाता है की, आने वाले कुछ सालो मे अगर हमने कचरे का प्रबंधन ना किया तो हम प्रकृति के कुछ एसे भयानक रूप देखेंगे जो आज से पहले हमने कभी नहीं देखे होंगे ?

लेकिन इन चीज़ों से आपको डर ने की जरूरत नहीं है । क्योकि हमने यहा कुछ उपाय भी बताए है । जिससे आप आराम से कचरे को प्रबंधन कर सकते है ।

हम पर भरोसा करें, कचरा प्रबंधन पर निबंध को पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है ।

 

Essay on waste management in hindi- कचरा प्रबंधन पर निबंध

 

प्रस्तावना :

आपको लगता होगा की, हम जो दैनिक जीवन मे कचरा उत्पन्न करते हे वो सामान्य है । और उस कचरे को कही भी फैक देना हमारे लिए सामान्य होगा ।

लेकिन वर्तमान मे आपकी यह दोनों सामान्य बाते विश्व के लिए खतरा बन गयी है । इसकी वजह से आज प्रकृति बेकाबू हो रही है ।

एक रिपोर्ट से पता चला की दुनिया के किसी-न-किसी देश मे मे हररोज बाढ़, भूकंप या और कोई कुदरती समस्या होती ही है । यह प्रकृति का गुस्सा नहीं तो और क्या है ?

और प्रकृति का सबसे बड़ा दुश्मन है कचरा (अपशिष्ट) ।

इस समस्या से ना केवल गरीब और पछात देश शामिल है, बल्के दुनिया के विकसित देश भी इस से जुज़ रहे है ।

क्योकि दुनिया का सबसे विकसित देश यानि अमेरिका ही 277 मिलियन टन से भी ज्यादा कचरा सालाना उत्पन्न करता है, तो हमारे जैसे देशो की तो बात ही क्या रही ।

इसीलिए हमे कचरे को प्रबंध करने की बहोत जरूरत है । 

कचरा प्रबंधन का अर्थ या कचरा प्रबंधन क्या है ?

किसी भी कचरे को सही तरह से निपटाने के लिए उसे संग्रह, परिवहन, निगरानी और उस पर कुछ खास प्रक्रिया करनी पड़ती है । उसे ही कचरा प्रबंधन या अपशिष्ट प्रबंधन कहते है ।

यह कचरा मानव और प्रकृति के दैनिक कामकाज से उत्पन्न होता है । इसी कचरे को प्रबंध ना किया जाए तो पूरी दुनिया के लिए खतरा है ।

kachra prabandhan kya hai

लेकिन फिर भी मनुष्य, कचरे का निपटान या प्रबंधन करने के बजाय उसका तेजी से उत्पादन कर रहा है ।

यह पद्धति विकसित और विकासशील देशो के लिए, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए और आवासीय और औद्योगिक उत्पादकों के लिए अलग-अलग होती है ।

कचरा प्रबंधन के प्रकार :-

वैसे तो कचरा प्रबंधन के कई प्रकार है, लेकिन हम यहा मुख्य चार प्रकार को जानेगे ।

लैंडफ़िल :-

कचरा प्रबंधन का पहला, प्रमुख और सबसे लोकप्रिय तरीका है लैंडफिल

सामान्य भाषा मे समजे तो, जमा हुए कचरे को जब भूमि में दफन करके कचरे का निपटान किया जाए उसे लैंडफ़िल कहते है ।

kachra prabandhn ka arth

लैंडफिल एक जगह है जहां कूड़ा-कचरा रखा जाता है । लेकिन जहा लोग रहते है वहा हम लैंडफिल को नहीं रख सकते । क्योकि उसमे बहोत दुर्गंध होती है ।

कचरे को लेंडफिल मे लाकर सबसे पहले छांटा जाता है । ताकि हर वो चीज़ को पुनर्चक्रित कर सके जो काम की है । उसके बाद कचरे को छोटे टुकड़ों में कुचल कर दफनाया जाता है ।

कई जगहो पर लेंडफिल से मीथेन नामक खतरनाक गैस बनाई जाती है । और कचरे मे से मीथेन गैस बनने की प्रक्रिया को एनारोबिक पाचन कहा जाता है ।

मीथेन गैस का उपयोग ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए भी किया जाता है ।

लेकिन वर्तमान मे यह प्रकिया कम होती जा रही है, क्योकि विश्व मे मानवो की संख्या बढ़ने के कारण कचरे को दफन करने की जगह ही नहीं है ।

भस्मीकरण :-

कचरा प्रबंधन का दूसरा प्रकार है, भस्मीकरण या दहन । इसमे कचरे को उच्च तापमान मे जलाकर अवशेषों और गैसीय उत्पादनो में परिवर्तित किया जाता है ।

इस प्रक्रिया से हम मुख्य ठोस प्रकार के कचरे को ही निपटान कर सकते है । ठोस कचरा यानि मानव और जानवरों की विविध गतिविधियों से उत्पन्न होने वाला कचरा ।

kachra prabandhan ka mahatv

जिसमे औद्योगिक, आवासीय और वाणिज्यिक गतिविधियों से उत्पन्न होने वाला कचरा शामिल है । जैसे कागज, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी सामग्रिया ।

एसा कहा जाता है की, पर्यावरण को बचाने के लिए हमे ठोस कचरे को व्यवस्थित रूप से प्रबंधित करना ही होगा । क्योकि यह पर्यावरण को बहोत नुकसान पहोचाता है ।

हमारी नगरपालिकाए ठोस कचरे का निपटान करती है । लेकिन इस से असमान स्थिति पैदा होती है । इसीलिए हमे ठोस कचरे का निपटान करने के लिए सही तकनीकी कार्यो को अपनाना होगा ।

और इसमे भस्मीकरण सबसे अच्छी प्रक्रिया है । इस से हम सारे ठोस कचरे को तो समाप्त नहीं कर सकते, लेकिन इसकी मूल मात्रा से 20 से 30 प्रतिशत कचरे को कम कर सकते है ।

यह प्रकिया अमेरिका और जापान जैसे देशो मे बहोत लोकप्रिय है । और वर्तमान मे जिस देश मे भस्मीकरण की प्रकिया उपलब्ध है वहा अब लैंडफिल का कोई उपयोग नहीं करता।  

पुनर्चक्रण :-

कचरा प्रबंधन का तीसरा मुख्य प्रकार है, पुनर्चक्रण । इस प्रकिया मे मुख्य कचरे को पुनर्प्राप्त करके नई सामग्री और वस्तुओं में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर ज़ोर दिया जाता है ।

इस प्रक्रिया की अच्छी चीज़ यह है की, इसमे कम ग्रीनहाउस गैस उत्पन्न होता है । इस प्रक्रिया से उत्पन्न चीजे कई जगह कच्चे माल के लिए उपयोगी होती है ।

पुनर्चक्रण से कचरे की उपयोगी सामग्रियों की बर्बादी को रोक सकते है । इससे ताजा कच्चे माल की खपत को भी रोका जा सकता है ।

पुनर्चक्रण से वायु और जल प्रदूषण को बहोत हद तक रोका जा सकता है ।

खाद :-

कचरा प्रबंधन का तीसरा मुख्य प्रकार है, खाद । यह एक आसान और प्राकृतिक प्रक्रिया है ।

इस प्रकिया मे पेड़-पौधों और रसोई जैसे जैविक कचरे का प्रबंध किया जाता है ।

इसमे जैविक कचरे को एक जगह जमा कर कई महीनों तक रखा जाता है । क्योकि इसकी वजह से इसके अंदर के रोगाणु का विघटन हो जाता है ।

इसे कचरा प्रबंधन की सबसे सर्वोत्तम प्रकिया कहा जाता है । क्योंकि खाद प्रक्रिया असुरक्षित जैविक उत्पादनो को सुरक्षित खाद में बदल देता है ।

लेकिन फिर भी यह प्रक्रिया आज बहोत प्रचलित नहीं है । जो सबसे अच्छी प्रक्रिया है, उसे कोई अपनाना ही नहीं चाहता । आखिर क्यो ?

ई-कचरा निपटान और प्रबंधन :-

(सिर्फ इस भाग को आप ई-कचरा पर निबंध के लिए भी उपयोग कर सकते हो)

ई-कचरा प्रबंधन की आवश्यकता पहले नहीं थी, लेकिन पिछले एक दशक से इसकी आवश्यकता बढ़ने लगी है ।

क्योकि आज हर जगह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने अपनी जगह बना ली है । और उससे कचरा भी बहोत ज्यादा मात्रा मे उत्पन्न होता है । इसीलिए ई-कचरा निपटान भी वर्तमान मे एक बढ़ती समस्या है ।

e-kachra par nibandh

ई-कचरे मे अक्सर पारा, आर्सेनिक, सीसा, ब्रोमिनेटेड और कैडमियम जैसे खतरनाक पदार्थ शामिल होते है ।

एसे पदार्थ एक मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बहोत ज्यादा नुकसानकारक होते है ।

आप यह जानकार हेरान हो जाएंगे की, विश्वभर में पैदा होने वाले कुल ई-कचरे का चार प्रतिशत हिस्सा भारत मे उत्पन्न होता है ।

उसमे भी 70 प्रतिशत हिस्सा कंप्यूटर उपकरणों का, 12 प्रतिशत हिस्सा दूरसंचार उपकरणों का और 8 प्रतिशत हिस्सा बिजली के उपकरणों का है ।

भारत मे भी खास कर ई-कचरा उत्पन्न करने वाले शहरों में मुंबई प्रथम स्थान पर, दिल्ली दूसरा और बंगलुरू तीसरे स्थान पर है ।

और परेशानी की बात तो यह है की, इस ई-कचरे का निपटान और प्रबंधन करने के लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं बनाई गयी ।

इसलिए हमे ही भारत के जिम्मेदार नागरिक बनके ई- कचरे का निपटान करना होगा । तभी हम कुछ इसके बारे मे कोई उचित उपाय निकाल पाएंगे ।

(आखिर क्यो महिला को सशक्ति करना चाहिए पढे- महिला सशक्तिकरण पर निबंध)

भारत में कचरे का प्रबंधन करने के लिए उठाए गए कदम :- 

भारत में कचरा प्रबंधन दो सिद्धांतों पर काम करता है, सतत विकास और प्रदूषण भुगतान । और इन दोनों सिद्धांतों को पूरा करने का काम नगरपालिका और ग्राम पंचायत का है ।

इसके अलावा हमारे देश मे कचरा उत्पादन से निपटने के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 बनाया गया है ।

लेकिन तेजी से हो रहा शहरीकरण हमारे लिए एक और समस्या है । क्योकि हमारे देश मे 378 मिलियन शहरी लोग 7,940 शहरों में रहते है ।

kachra prabandhan का udeshya

सिर्फ ये शहरी लोग ही प्रति वर्ष 62 मिलियन टन कचरा उत्पन्न करते है । उसमे से केवल 43 मिलियन टन कचरे को एकत्र कर किया जाता है ।

जिसमे से मात्र 12 मिलियन टन कचरे को ही उपचार किया जाता है । 31 मिलियन टन कचरे को नगरपालिका द्वारा लैंडफिल साइटों में डंप किया जाता है ।

बाकी का 19 मिलियन टन कचरा आखिर कहा गया ? यह प्रश्न हमे अपने आपसे पूछने की जरूरत है । क्योकि इसके मुख्य जिम्मदार हम है ।

और इस कचरा निपटान की प्रकिया को त्रुटिपूर्ण प्रणाली भी कहा जाता है ।

IIT कानपुर ने अपने एक रिपोर्ट मे बताया था की, देश में हर दिन कम-से-कम 15,000 मेट्रिक टन कचरा उठाकर साफ किया जाता है । जिससे 500,000 लोगो को रोजगार के अवसर मिलते है । यह एक इसकी अच्छी बात है ।

इसके अलावा भारत के 100 शहरों को स्मार्ट शहरों के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है । उस से भी कुछ हद तक कचरे के प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा । (कचरा प्रबंधन पर निबंध)

केंद्र सरकार ने देश के 20 प्रमुख शहरों से लैंडफिल साइटों को दूर किया । यह भी एक अच्छा फैसला है, क्योकि लैंडफिल से निकलने वाली मीथेन गैस बहोत खतरनाक है ।

और कचरे का प्रबंधन करने के लिए सरकार ने साल 2014 में स्वच्छ भारत मिशन का उद्घाटन किया ।

जिससे लोगो के अंदर जागरुती ला सके की, कचरा हमारी आने वाली पेढ़ियो को लिए एक खतरा है ।

कचरा प्रबंधन का महत्व :-

कचरा प्रबंधन के महत्व को समजने से पहले हम थोड़ा उसका इतिहास जानते है ।

कई साल पहले मनुष्यों ने बस एक छेद खोदा और उसके अंदर कचरे को दफन कर दिया । इन शुरुआती मनुष्यों के लिए यही कचरा प्रबंधन था ।

यह लोग कचरे को खतम करने की यह एक प्रभावी तकनीक का उपयोग करते थे ।

लेकिन क्या आप वर्तमान मे इस तकनीक का उपयोग कर सकते है, बिलकुल नहीं ?

क्योकि उस समय उनकी आबादी बहोत कम थी । जिसके कारण कचरा भी बहोत कम उत्पन्न होता था ।

लेकिन आधुनिक समय मे अगर मनुष्य कूड़े-कचरे को दफनाए तो उसमे बहोत सारे कीड़े और जीवजंतु उत्पन्न होने लगेंगे । जिससे बड़े पैमाने पर बीमारि फैल सकती है ।

kachra prabandhan kise kahte hai

और आज तो कचरे का उत्पादन भी अधिक मात्रा होता है । और उसे तो सही से प्रबंध भी नही किया जाता । इसीलिए तो वर्तमान मे कचरे को दफनाना एक स्थायी समाधान नहीं है ।

अगर हम कचरा नहीं फेलाएंगे और ज्यादा कचरा उत्पन्न नहीं करेंगे तो हमारा पर्यावरण और हम दोनों सूरक्षित और स्वस्थ रहेंगे ।

कचरे का प्रबंध करने से वायु और जल दोनों प्रदूषण से दूर रहेंगे । और जब तक यह दोनों प्रदूषण से दूर है तब तक प्रकृति हमे कभी नुकसान नहीं पहोचाएंगी । (कचरा प्रबंधन पर निबंध)

अगर हमारे देश मे कचरे का प्रमाण ज्यादा हे तो इसका असर हमारे विदेशी पर्यटकों पर पड़ता है । क्योकि हम भी किसी गरीब और पछात देश मे जाना पसंद नहीं करते ।

एक बात याद रखना की, अगर हमे भारत को विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था वाले विकसित देशो मे शामिल करना है तो हमे नागरिकों के बुनियादी ढांचे में सुधार करना ही होगा ।

और सतत विकास और वैश्विक स्वच्छता के लिए कचरे का प्रबंधन करना बहोत जरूरी है ।

कचरे का प्रबंधन और पुनर्चक्रण से पृथ्वी की सुंदरता को संरक्षित करने मे हमे मदद मिलती है ।

क्योकि प्राकृतिक सुंदरता हमारे लिए एक विरासत है । इसीलिए हम सभी नागरिक को इसका संरक्षण करना चाहिए, यह हमारी जिम्मेदारी है ।

निष्कर्ष :-

तो अब आपको पता चल गया होगा की, आखिर कचरा (अपशिष्ट) प्रबंधन क्यो हम सभी के लिए जरूरी है ।

और किसी ने क्या खूब लिखा है की अगर आप बार-बार असफल हो रहे हो तो आपको परिवर्तन की आवश्यकता है । तभी आप जीवन मे सफलता प्राप्त कर पाएंगे ।

इसी तरह आज से पहले हमने चाहे कितना भी कचरा क्यो न फेलाया हो, लेकिन अगर आज आप परिवर्तन करे तो शायद कचरा उतप्न्न होना तो एकदम से बंद नहीं होगा ।

लेकिन आपको देख कर अगर कुछ लोग भी कचरा प्रबंध करने लगे तो यह आपके लिए बड़ी सफलता होगी ।

और आखिर मे आपसे पूछना चाहता हु की क्या अब आप लोग कचरा प्रबंधन करेंगे या नहीं ? इसका जवाब कमेंट मे जरूर दे ।

और आपको यह कचरा प्रबंधन पर निबंध (kachra prabandhan par nibandh) कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे कचरा प्रबंधन पर निबंध को दे सके ।

लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email जरूर करे । आपको और भी किसी विषय पर निबंध चाहिए तो कॉमेंट मे जरूर बताए ।

और अगर आपको लगता है की हमारे आस-पास कोई एसा व्यक्ति या कोई एसी बस्ती है जो बहोत ज्यादा मात्रा मे कचरा फेला रही है तो एसे लोगो तक यह कचरा प्रबंधन पर निबंध को जरूर पाहुचाए । (please share)

Thanks for reading कचरा प्रबंधन पर निबंध

 

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