2021 मे नैतिकता ओर सदाचार वाली मज़ेदार कहानिया

दोस्तो, आज हम मज़ेदार बोध वाली कहानिया जानेंगे । यह कहानिया क्लास 7-8-9-10 (Moral stories in Hindi for class 8) के लिए उपयोगी है ।

आज हम उस विषय पर बात करेंगे जिस पर पढ़ना ओर देखना लोगो को बहोत अच्छा लगता हे ओर उसे पाना तो लोगो की ज़िंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य होता हे । यानि की धन ।

मनुष्य अपने जीवन में अधिक से अधिक संपत्ति लेना चाहता हे ओर अधिक से अधिक धनी बनना चाहता है। लेकिन वो सब उतनी मेहनत नहीं करना चाहते जितना एक धनी व्यक्ति करता हे ।

लिखने वाले ने क्या खूब लिखा हे की, गरीब आदमी वह नहीं है जिसके पास बहुत कम धन है, लेकिन जो आदमी धन के लिए ज्यादा तरसता है, वह गरीब है ।

धन एक ऐसी चीज है जिससे मनुष्य कभी भी इसके प्रत्यक्ष उपयोग से संतुष्ट नहीं हो सकता है । चाहे उसके पास पूरी दुनिया का धन ही क्यो न आजाए ।

लेकिन क्या आपको पता है की शास्त्रो मे धन की तीन गति बताई गयी हैं । जिसमे दान, उपभोग ओर विनाश शामिल है । यही तीन गति के आस-पास हमारे धन चलता रहता है ।

इसमे दान ओर उपभोग धन का एक सरल उपयोग है । जबकी विनाश धन का गैर-उपयोग है ।

वर्तमान मे सभी लोगो की यही सोच हे की, धन के माध्यम से दुनिया की हर चीज खरीदी जा सकती है । लेकिन क्या सच मे पैसो से हर चीज़ पाना आसान है ? ( इसका जवाब comment मे जरूर दे )

अगर मेरे मंतव्य से कहू तो हरगिज़ नहीं । क्योकि आप पैसे के जरिये अच्छा बाइक, कार ओर अच्छे ब्रांडेड कपड़े ओर भी कई सारीचिजे खरीद सकते हो ।

 

dhan kaise kamaye

 

लेकिन क्या माँ-बाप का प्यार उनके आखो की रोनाक खरीद सकते हो ? अपने बच्चे ओर बीवी के प्यार को पैसे सो पा सकते हो ? या पैसो से पुण्य की प्राप्त की जाती हो ?

सम्पूर्ण प्राप्ति यानि जीवन का हर सुख आप धन से पा सकते हो । लेकिन एक दूसरा रास्ता भी हे जिससे भी आप सुख ओर वैभव पा सकते हो ओर वो रास्ता हे सिद्ध कर्मों का ।

सिद्ध कर्मो से मतलब यह हे की अपने जीवन मे खुश रहो ओर बाकी लोगो मे भी खुशी बाटते रहो । दूसरों के बारे मे कभी भी गलत न सोचो, अपनी नियतो को साफ रखो ओर हमेशा दूसरों की मदद करते रहो ।   

याद रखना की खुशी केवल पैसे में नहीं है । जीवन के जोखिम ओर खतरनाक प्रयास के रोमांच में, ओर उसकी उपलब्धि मे भी खुशी निहित है ।

गीता में काम, क्रोध और लोभ को नरक का द्वार, काम-वासना को इच्छा, क्रोध को अभिमान ओर लालच को धन कहा गया है । क्योकि इन सभी का बीज धन के स्वामित्व में बोया जाता है ।

एक बार महिलाने भगवान बुद्ध को आदेश देने के आग्रह किया । उसके जवाब मे उन्होने उपदेश देते हुए कहा की द-द-द

महिला को ये बात समझ में नहीं आई, इसलिए वह बुद्ध के एक शिष्य के पास गई और उसे द-द-द का सार समझाने को कहा ।

 

dhan ka arth kya he

 

शिष्य ने तीन बार का अर्थ समजाते हुए कहा कि, आत्म-कल्याण के लिए दया करो, दान करो और दमन करो

हृदय में करुणा से जागृत प्रेम दूसरों के लिए सहानुभूति पैदा करता हे ओर वो दान की भावना को जन्म देता है ।

इस प्रकार यह निश्चित है कि जीवन से जुड़े धन के सदुपयोग से ही आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सकती है।

ज़िंदगी मे एक बात याद रखना मेरे दोस्त की यदि धन आपकी स्वतंत्रता ओर एसो-आराम के लिए है, तो आपके पास यह कभी नहीं होगा ।

इसीलिए हमेशा अपने अंदर ज्ञान, अनुभव और क्षमता के भंडार को बढ़ाते रहे है । तभी पैसा हमारे पास होगा भी ओर रहेगा भी ।

तो अब आपको पता चला होगा की शास्त्रों में धन की कितनी गति बताई गई हैं ?

अब मे आखिर मे आपसे पूछना चाहता हु की आपको ये Moral stories in Hindi for class 8 कैसा लगा ।  

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको मज़ेदार कहानी Moral stories in Hindi for class 8 के लिए दे सके ।

लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email करे । आपको ओर भी किसी विषय पर कहानी चाहिए तो कॉमेंट मे जरूर बताए ।

ओर इस Moral stories in Hindi for class 8को अपने दोस्तो के साथ जरूर शेर करे । (please share)

Thanks for reading Moral stories in Hindi for class 8

 

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