(2021) ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर निबंध- Essay on Solid Waste Management

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अपशिष्ट (कचरा) हम सभी के लिए एक खतरनाक समस्या है । क्योकि इसकी वजह से आज हर दिन नयी-नयी बीमारीया और रोग फैल रहे है । इन बीमारीयो के कारण प्रतिदिन लाखो लोगो की जाने जा रही है । अपशिष्ट के आंकड़ो की बात करे तो, वर्तमान समय मे हमारे देश मे लगभग 378 मिलियन लोग शहरो मे रहते है । सिर्फ ये शहरी लोग ही प्रति वर्ष 62 मिलियन टन सार्वजनिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करते है । अगर हम गाव के अपशिष्ट की गणना करे तो शायद यह आंकड़े चौंकाने वाले होगे । इसमे भी खास कर ठोस अपशिष्ट सबसे ज्यादा खतरनाक है ।

इसीलिए अगर हमने जल्द ही अपशिष्ट को प्रबंधन करने के बारे मे कुछ नहीं किया तो, हमारे आने वाले बच्चो के लिए यह अपशिष्ट बहोत घातक साबित हो सकता है ।

 

ठोस अपशिष्ट का अर्थ

साधारण भाषा मे समझे तो हमारे घरो, स्कूलो, कार्यालयो, उद्योगों आदि मे हम जिन कठोर चीज़ों को एक बार उपयोग करने के बाद यू ही फेक देते है, उसे ही ठोस अपशिष्ट कहा जाता है । जैसे प्लास्टिक की चिजे, कांच, धातु, चमडा, दवाई की शीशियाँ, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि कई एसे उत्पाद है, जो कई साल बीत जाने के बाद भी कभी नष्ट नहीं होते ।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर निबंध

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत प्रतिवर्ष 960 मिलियन टन अपशिष्ट उत्पन्न करता है । इसमे सबसे ज्यादा ठोस अपशिष्ट ही होता है और हमारे पास ठोस अपशिष्ट का निपटान करने की कोई व्यवस्था भी नहीं है । क्योकि ठोस अपशिष्ट को फैक देने से जमीन तो खराब होती ही है, लेकिन उसको जलाने से वायु प्रदूषण भी बढ़ता है । इसीलिए हमे वर्तमान मे ठोस अपशिष्ट का सही प्रबंधन करना बहोत जरूरी है ।

 

ठोस अपशिष्ट का प्रबंधन

मनुष्य और पर्यावरण को नुकसान करे बिना ठोस अपशिष्ट का निपटान करने की व्यवस्था को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कहा जाता है । ठोस अपशिष्ट को प्रबंधन करने के लिए कुछ मुख्य तरीके ।

  • अपशिष्ट पुनः प्रयोग

इसमे उत्पादको और उपभोक्ताओ को अपशिष्ट का पुनः उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है । इससे लोग अपने जीवन मे अपशिष्ट को पुनः प्रयोग करना सीखेंगे । अगर भारत के 60 प्रतिशत लोग भी इस तरीके को अपना ले तो शायद 1 साल मे ही हम ठोस अपशिष्ट को भारत मे खतम कर सकते है ।

  • अपशिष्ट का पुनः चक्रण

अपशिष्ट का पुनः चक्रण यानि कचरे को उपयोगी माल के रूप में प्रयोग करना । अगर हम ठोस अपशिष्ट को ही किसी उत्पाद मे कच्चे माल के तौर पर उपयोग करे तो बहोत हद तक हम ठोस अपशिष्ट का निपटान कर सकते है । इसके लिए हमे सबसे पहले सारे संग्रहित कचरे को एकत्रित कर उसका कच्चा माल तैयार करना होगा और उसके बाद उसे नए उत्पाद के लिए तैयार करना होगा ।

  • भस्मीकरण

भस्मीकरण एक सामान्य तापीय प्रक्रिया है । इसमें ओक्सीजन की उपस्थिति मे अपशिष्ट को दहन किया जाता है । इसके बाद अपशिष्ट पानी की भाप, कार्बनडाई ऑक्साइड और राख मे बदल जाता है । इस प्रकिया का उपयोग बिजली को ऊष्मा देने के लिए भी किया जाता है । लेकिन इस प्रक्रिया से मीथेन गैस उत्पन्न होती है, जो वायु को प्रदूषण करती है । इसलिए भस्मीकरण प्रक्रिया का उपयोग थोड़ा कम किया जाता है ।

  • गैसीकरण

इस प्रक्रिया मे ठोस अपशिष्ट को उच्च तापमान मे विखंडित किया जाता है । इसमे अपशिष्ट का दहन बहोत कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्रो मे किया जाता है । इससे भी पर्यावरण को हानी होती है ।

  • पाइरोलिसिस

इस प्रक्रिया मे भी गैसीकरण की तरह ठोस अपशिष्ट को उच्च तापमान मे विखंडित किया जाता है । परंतु इसमे अपशिष्ट का दहन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति मे किया जाता है । पाइरोलिसिस की खास विशेषता यह है कि, इसमे वायु प्रदूषण बिल्कुल नहीं होता ।

इस तरह हम इन सभी प्रक्रियाओ का उपयोग ठोस अपशिष्ट को प्रबंधन करने के लिए कर सकते है । इन प्रक्रियाओ से ना सिर्फ ठोस अपशिष्ट का प्रबंधन किया जा सकता है, बल्कि कच्चा माल और ऊर्जा भी ले सकते है ।

 

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लाभ

  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन करने से जन स्वास्थ्य और पर्यावरण इन दोनों को लाभ मिलता है ।

 

  • जब ठोस अपशिष्ट का प्रबंधन हो जाएगा तब अलग-अलग रोग और बीमारिया फैलने का डर नहीं होगा । जिसकी वजह से हमारे देश के जन स्वास्थ्य में सुधार होगा और लोगो की श्रम करने की क्षमता बढ़ जाएगी ।

 

  • इसकी वजह से जहरीले और खतरनाक पदार्थों की निकास कम हो जाएगी, जिससे जल प्रदूषण को रोका जा सकता है ।

 

  • भस्मीकरण जैसी प्रक्रियाओ से हमे बिजली उत्पादन के लिए सस्ती ऊर्जा प्राप्त होगी ।

 

  • अगर हम ठोस अपशिष्ट का निपटान करेंगे तो हमारी जमीने बंजर नहीं बनेगी । इससे कृषि उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी ।

 

  • इसके अलावा ठोस अपशिष्ट का पुनः चक्रण करने से हमे कच्चा माल मिलता है । इससे बनी चिजे हमे बहोत सस्ती मिलेगी ।

 

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम

भारत मे लगातार बढ़ रहे ठोस अपशिष्ट को रोकने के लिए भारत सरकार ने कानूनी स्तर पर पहल करके 2016 मे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम बनाया था । इस अधिनियम का सबसे ज्यादा प्रभाव नगरीय क्षेत्रों मे होगा । इसके अलावा इस अधिनियम मे सरकार के सभी मंत्रालयो, प्रशासनिक कार्यालयो और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्तव्यो का वर्णन किया गया है ।

इस नियम के मुताबिक बायोडिग्रेडेबल और खतरनाक घरेलू अपशिष्टों को हर घर मे अलग-अलग पात्र मे डाला जाएगा । इसके बाद अपशिष्टों को शहरी निकाय के प्रतिनिधि को सौपा जाएगा । इसके अलावा जो व्यक्ति प्रतिदिन 20 टन या महीने का 300 टन अपशिष्ट का निर्माण करता है, उन्हे स्थानीय निकाय की अनुमति लेनी होगी और कर भी देना होगा ।

 

निष्कर्ष

भारत मे उत्पन्न होने वाला कुल ठोस अपशिष्ट मे से सिर्फ 68 प्रतिशत अपशिष्ट को ही एकत्र किया जाता है । बाकी का 32 प्रतिशत अपशिष्ट आखिर कहा गया ? यह प्रश्न हमे सरकार से पूछने की जरूरत है । क्योकि अगर ठोस अपशिष्ट का सही प्रबंधन नहीं हुआ तो भविष्य मे हमे बहोत नुकसान हो सकता है । इसीलिए आज ही से अपशिष्ट को प्रबंधन करना शुरू करदे ।


 

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