जल प्रदुषण पर एक विचारशील निबंध- Jal pradushan par nibandh

दोस्तो, आज हम जल प्रदुषण पर निबंध (Jal pradushan par nibandh) के बारे मे विस्तृत मे जानेगे । यह निबंध आपको स्कूल के हर क्लास ओर कॉलेज मे काम आने वाला है ।

हम इस निबंध मे जानेगे की आखिर जल प्रदुषण से हमारी पृथ्वी को कितना नुकसान हो रहा है ?

और अगर हमने इस का जल्द ही कोई समाधान नहीं निकाला तो हमारी आने वाली पेढ़ी का पृथ्वी पर रहना बहोत मुश्किल हो जाएगा ।

हमने इस निबंध मे कुछ उपाय भी बताए है, अगर आप इनका उपयोग करेंगे तो कुछ हद तक हम जल प्रदूषण को रोक सकते है ।

हम पर भरोसा करें, Jal pradushan par nibandh को पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है ।

 

Essay on water pollution in Hindi- जल प्रदुषण पर निबंध

 

प्रस्तावना :-

मनुष्य की जीवन ज़रूरियात चीज़ों मे सबसे पहले वायु और उसके बाद जल है । और ये तो आपको भी पता हे की जल के बिना सृष्टि की कल्पना करना कितना मुश्किल है ।

इसी कारण जल को अमृत कहा जाता है । लेकिन यही अमृत मे जब हानिकारक और खतरनाक पदार्थ मिल जाए तो उसे विष बनने मे देर नहीं लगती । उसी को जल प्रदूषण कहते है ।

मानव द्वारा उत्पन्न कचरा जब पानी मे मिलता हे, तब उसकी रसायनिक, भौतिक और थर्मल विशेषता को कम कर देता है ।

उसके साथ-साथ पानि के ऑक्सीजन को भी कम करता है । जिसके कारण पानी के अंदर रहे जीव को भी बहोत भुगतना पड़ता है ।

लेकिन इसके बावजूद भी हम पानी को प्रदूषित करने का एक भी मौका नहीं छोड़ते । इसीलिए आज पृथ्वी पर जल प्रदूषण एक वैश्विक समस्या बन गयी है ।

अनेक बीमारियाँ और करोड़ो लोगों की मौत इसके कारण हुई है । आंकड़ो की बात करे तो जल प्रदूषण से विश्व मे करीब 14000 लोगो की मोत प्रतिदिन हो रही है । और भारत मे 580 लोग प्रतिदिन अपनी जान गवा रहे है ।

जल का हमारे जीवन में क्या महत्व है ?

मनुष्य के शरीर में 60 फीसदी और वनस्पतियों में 95 प्रतिशत जल होता है । दुनिया मे बसे हर जीव के लिए स्वच्छ जल का होना अति-आवश्यक है ।

दुनिया मे जल तो बहुत ज्यादा मात्र मे उपलब्ध है । लेकिन पीने लायक जल की मात्रा 2 से 7 प्रतिशत ही है । बाकी का पानि खारा है जो पीने लायक नहीं है ।

essay on water pollution in hindi

2 से 7 प्रतिशत पीने लायक पानी मे भी तीन चौथाई जल तो हिम नदी ओर बर्फीली चट्टानों के रूप में है । यानि हम सोच सकते हे की पृथ्वी पर पीने लायक पानी कितना कम है ।

जल प्रदूषण क्या है :-

मनुष्य अपने दैनिक जीवन के दरमियान विभिन्न क्रिया से जल के जैविक, भौतिक और रासायनिक गुणो को नुकसान पहोचाता हे, तो ऐसे जल को प्रदूषित जल कहते है ।

किसी भी मनुष्य के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जल का स्वच्छ होना अति-आवश्यक है । स्वच्छ जल के अभाव से जीवन तो क्या किसी देश की सभ्यता का कल्पना करना भी बहोत मुश्किल है ।

मनुष्य जल का प्रदूषण आज से नहीं आदिकाल से ही करता आया है । हम आपको जल का प्रदूषण, जापान के एक उदाहरण से समजाते है ।

causes of water pollution in hindi

साल 1953 में जापान के मिनिमाता शहर मे एक बड़ी जबरदस्त घटना हुई । घटना एसी घटी की, इस शहर का एक रसायन उद्योग विनाइल क्लोराइड नाम के पदार्थ का निर्माण करता था ।

लेकिन विनाइल क्लोराइड को बनाने के लिए एक घातक पदार्थ मरक्यूरिक क्लोराइड का बड़ी मात्रा मे उपयोग किया जाता था । यह एक एसा पदार्थ हे जो मानवो की जान भी ले सकता है ।

लेकिन इन उधोग वाले अपना बचा हुआ सारा जल एक बड़ी जिल मे डाल दिया करते थे ।

अब हुआ यू की इस जिल मे रहने वाली मछलियाने इस जहरिला पदार्थ को खा लिया । इसके कारण कई मछलियो की मौत हो गयी । और उन मरी हुई मछलियो को मछुआरे ने पकड़ लिया ।

उसके बाद इन मछलियो को खाने वाले सब लोगो को बहोत गंभीर बीमारी हुई ओर 43 से ज्यादा लोगो की मोत हो गई ।

कुछ दिन बाद जाँच-पड़ताल से पता चला की इन सभी ने यहाँ पाई जाने वाली मछलियों का सेवन किया था । जल प्रदूषण की इस दुर्घटना ने दुनिया भर का ध्यान अपनी और खींचा ।

हमारे देश मे केरल की चालियार नदी मे भी मरकरी युक्त दूषित जल पाया गया था । लेकिन इस से कोई जान हानी नहीं हुई थी ।

स्वच्छ जल की गुणवत्ता मापदंड :-

जल की शुद्धता को पहचान ने के लिये साल 1971 मे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ ऐसे मापदंड तैयार किए, जिनसे हम पता लगा सकते हे की जल कितना प्रदूषित है ?

w.h.o के अनुसार पीने का पानी स्वच्छ, स्वादयुक्त और गंधरहित होना चाहिए । इसीलिए स्वच्छ जल की गुणवत्ता को तीन वर्गो मे बाटा जाता है । भौतिक मापदंड, रासायनिक मापदंड और जैविक मापदंड ।

भौतिक मापदंड मे रंग, प्रकाशवेधता, तापमान, संवहन और कुछ ठोस पदार्थ शामिल होते है । जिसके द्वारा जल की गुणवत्ता का मापन किया जा सकता है ।

about water pollution in hindi

रासायनिक मापदंड के अंदर घुला हुआ ओक्सीजन, पी.एच.मान, खारापन या क्षारीयता, रेडियोधर्मी पदार्थ, क्रोमियम, भारी धातुएँ, मर्करी और सीसा द्वारा जल की गुणवत्ता का मापन किया जाता है । (Jal pradushan par nibandh)

जैविक मापदंड के अंदर कोलीफार्म, वायरस, शैवाल और बैक्टीरिया द्वारा जल की गुणवत्ता का मापन किया जाता है ।

जल प्रदूषण के कारण :-

आपके मनमे यह सवाल तो जरूर आया होगा की, आखिर एसे कोन से कारण हे जिनसे जल प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है ? तो चलिये जानते है ।

बड़े-बड़े विद्धवानों ओर संशोधकों ने जल प्रदूषण के मुख्य दो कारण बताए है । प्राकृतिक और मानव ।

  1. प्राकृतिक कारण :-

क्या इसे जानकार आप हैरान तो नहो हो गए ? जी हा प्रकृति भी जल को प्रदूषित करती है । लेकिन कैसे ?

प्रकृति भू-क्षरण यानि की मिट्टी के कटाव की वजह से पानी को प्रदूषित करती है ।

इसके अलावा पेड़-पौधों की सड़ी हुई पत्तिया, मिट्टी और प्राणिया का मल-मूत्र जब जल के साथ मिश्रण होता हे तब बड़े पैमाने पर जल का प्रदूषण होता है ।

जब पानी एक जगह बहोत ज्यादा समय के लिए जमा हो जाए तो उसमे कैडमियम, सीसा, पारा और आर्सेनिक जैसे जहरीले पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है । जिस से भी अधिक मात्रा मे जल प्रदूषित होता है।

  1. मानवीय कारण :-

प्रकृति के साथ-साथ मनुष्य का भी बहोत बड़ा हाथ है जल को प्रदूषित करने मे । क्योकि मानवी अपने घर से ही जल को प्रदूषित करना शुरू कर देता है ।

मानव की अपनी कई गतिविधियों से जल को प्रदूषित करता है । हम बारी-बारी सबको जानते है ।

घरेलू कार्यों जैसे खाना पकाना, नहाना, कपडे धोना ओर घर की सफाई करना इन सब मे पानी का भरपूर उपयोग करते है ।

लेकिन इन कार्यो से निकला हुआ पानी बहोत ज्यादा मात्रा मे अपशिष्ट पदार्थों से भरा होता है । हम उस पानी को घरेलू नालियों में बहा देते है । जो अंत मे नदि और तालाब मे जाकर जल को प्रदूषित करता है ।

दूसरा है मानव मल । एसा माना जाता है की, मानव मल से जल में हो रहा प्रदूषण के लिए ही जल प्रदूषण शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया गया था ।

Jal pradushan par nibandh hindi

भारत में एक लाख से भी अधिक जनसंख्या वाले 142 नगर है । एक अनुमान से ये पता चला की, इन 142 नगरो मे से मात्र 8 ही ऐसे नगर हैं जिनमें मानव मल को ठिकाने लगाने की पूर्ण व्यवस्था है । (Jal pradushan par nibandh)

62 ऐसे नगर हैं जहाँ थोड़ी व्यवस्था है, और बाकी बचे 72 नगरो मे मानव मल को ठिकाने लगाने की कोई भी व्यवस्था नहीं है ।

पूरे विश्व की बात करे तो, करीब 10 लाख व्यक्ति एक वर्ष में 5 लाख टन से भी ज्यादा मल उत्पन्न करते है । आपको जानकार हेरानी होगी की ये मल का अधिकांश भाग समुद्र और नदियों में डाला जाता है ।

इसीलिए आज भी मानव मल से बड़ी मात्रा मे जल प्रदूषित हो रहा है । क्योकि उसे ठिकाने लगाने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है ।

इसका तीसरा मुख्य कारण है औद्योगिक बहिःस्राव । आपने अक्सर देखा होगा की उद्योगो में जो उत्पादन होता हे उसके साथ अनेक अनुपयोगी पदार्थ बचे रहते है ।

यही बचे हुए पदार्थ को औद्योगिक अपशिष्ट कहते है । उसमे अनेक तरह के तेल, अम्ल, वसा, क्षार, जैसे विषैले तत्त्व ओर रासायनिक पदार्थ शामिल होते है ।

एसे पदार्थ जल में मिलकर अधिक मात्रा मे जल को प्रदूषित करते है । रासायनिक उद्योगचमड़ा उद्योगकागज उद्योगचीनी उद्योगशराब उद्योगवस्त्र उद्योग, और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ज्यादा मात्रा मे अपशिष्ट पदार्थ उत्पन्न करते है ।

कानपुर मे चमड़े के कारखानों द्वारा कचरे को गंगा नदी में फेकने से कानपुर के 10 km दूर तक गंगा नदी का रंग बिलकुल बदल चुका था ।

चोथा मुख्य कारण है कृषि बहिःस्राव । वर्तमान मे ज्यादा-से-ज्यादा उत्पादन प्राप्त करने के लिए कृषि में कई तरह की पद्धतियों का प्रयोग किया जा रहा है । हरित क्रांति इसी की तो देन है ।

इन नई-नई पद्धतियों से सिंचाई में तो वृद्धि हुई, लेकिन दूसरी तरफ रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं में भी वृद्धि हुई ।

इन दवाओ मे अकार्बनिक फास्फेट और नाइट्रोजन होता है, जो बड़े खतरनाक पदार्थ है । यह भी जल को बहोत प्रदूषण करता है ।

जब एसे पदार्थ जल स्रोतो मे पहुँचते हे तो जल मे शैवाल मर जाती है । शैवाल के मृत होने से अपघटक बैक्टीरिया भारी संख्या में उत्पन्न होते हैं ।

जो धीरे-धीरे जल मे ऑक्सीजन की मात्रा को बहोत कम कर देता है । जिससे जलीय जीवों की मृत्यु होने लगती है । और यही से जल बड़ी मात्रा मे प्रदूषित होता है ।

पांचवा मुख्य कारण है तापीय प्रदूषण । विभिन्न बम और रियेक्टर मे ऊष्मा यानि गर्मी बहोत ज्यादा होती है ।  और इस गर्मी को कम करने के लिए नदी ओर तालाबों के जल का उपयोग किया जाता है ।

उनकी ठंडा होने की प्रक्रिया के बाद उपयोग किया हुआ जल फिर से जल स्रोतों में डाला जाता है । इस से जल स्रोतों के ताप में वृद्धि होती हे और जल प्रदूषित हो जाता है । (Jal pradushan par nibandh)

छठा मुख्य कारण है तैलीय प्रदूषण । नदी ओर अन्य जल स्रोतों में तैलीय पदार्थों के मिलने से तैलीय प्रदूषण होता है ।

एक देश से दूसरे देश तक तेल पहोचाने के लिए बड़े-बड़े जहाजों का उपयोग किया जाता है । लेकिन कई बार इन के साथ दुर्घटना हो जाती हे जिससे तेल समंदर मे मिल जाता है ।

कई बार तो आग भी लग जाती है जैसे अमरीका की क्वाहोगा नदी ओर भारत में बिहार राज्य के मुंगेर के पास गंगा नदी में भयंकर आग लग चुकी है ।

आंकड़ो के मुताबिक लगभग प्रतिवर्ष पेट्रोलियम 50 लाख से 1 करोड़ टन से भी ज्यादा समुद्र में मिल जाता हैं ।

इसके अलावा भारत के कई राज्यो मे मानव और पशुओं के शव को नदियों में बहा दिया जाता है । इस के बाद वो शव सड़ के पानि मे गल जाता हे ओर पानी में जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि करता है ।

और एसे कई कारण है, जिनसे जल प्रदूषित होता है ।

जल प्रदूषण के प्रभाव :-

भारत मे नदियो को मातृ-शक्ति का दर्जा दिया जाता है ओर  पूजा जाता है । भारत की पाँच नदियों ने पंजाब की भूमि को हरी-भरी फसलों की उपहार देकर वहाँ के किसानों की झोली भर दी ।

लेकिन फिर भी आज हम सभी भारत की नदियो और जल स्त्रोतों को बड़े पैमाने पर प्रदूषित क्यो कर रहे है ?

solution of water pollution in hindi

किसी भी झील, नदी या तालाब मे पोषक तत्वों की संख्या पानी की गुणवत्ताआस-पास की मिट्टी ओर उसमें उपस्थित अपशिष्ट पर निर्भर करती है ।

जल स्त्रोत का पानी अगर थोड़ा भी प्रदूषित होता हे तो उसके आसपास रहने वाले प्रत्येक जीवन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।

तो आइए जानते है की, क्या-क्या प्रभाव जल प्रदूषण का हम पर पड़ता है ।

  1. मानव पर प्रभाव :-

किसी भी जल का प्रदूषित होना मानवो के लिए सबसे बाद खतरा है । 

W.H.O की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया मे हर वर्ष 1,50,00000 व्यक्ति प्रदूषित जल के कारण मर जाते है ।

अरे विकसित देशो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहा के सारे रोगियो में से 50 फीसदी रोगी ऐसे है जिनके रोग का कारण प्रदूषित जल है । और ये तो विकसित देशों की स्थिति है । (Jal pradushan par nibandh)

अगर हम विकासशील और अल्प-विकसित देशो के आंकड़े जानेगे तो हम और भी चोंक जाएंगे । एसे देशो के कुल रोगी दर्दीओ मे से 80 प्रतिशत रोगों की जड़ प्रदूषित जल होता है ।

एक अनुमान के मुताबिक भारत के 34000 गांवो के लगभग 2.5 करोड़ से भी ज्यादा व्यक्ति हैज़े नामक बीमारी से पीडि़त हे, जो जल के प्रदूषण से होती है ।

राजस्थान के कई आदिवासी गांवों मे करीब 1,90,000 से ज्यादा लोग गंदे तालाबों का पानी पीते है । जिसके कारण उन्हे नास नामक रोग हो रहा है ।

इसके अलावा पीलियामियादी बुखारहैजापोलियोपेचिसवायरल फीवर आदि खतरनाक बीमारियां जल प्रदूषण होती है ।

  1. जलीय जीवो ओर जन्तुओं पर प्रभाव :-

जल प्रदूषण से अगर मानव के बाद किसी पर बुरा प्रभाव पड़ता हे तो वो जलीय जीव-जन्तु है ।

जल प्रदूषण से जल में शैवाल की मात्रा बढ़ जाती है । जिसके कारण ऑक्सीजन मात्रा कम हो जाती है। और जब ऑक्सीज़न की मात्रा कम होती हे तो जलीय जीवो की मृत्यु होगी ही ।

एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 1940 मे एक लीटर पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 2.5 घन सेमी थी । जो वर्तमान मे घट कर 0.1 घन सेमी रह गई है ।

जल प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले जीव-जन्तुओं में मछलियाँ सबसे पहले है । इसको हम लखनऊ के एक उदाहरण से समजेंगे ।

लखनऊ की मुख्य नदीओ मे से एक, यानि गोमती नदी । अब हुआ यू की इस नदी के आस-पास वाले कारखाने हमेशा प्रदूषित जल इस नदी मे छोडते थे ।

लेकिन एक बार जल इतना ज्यादा प्रदूषित हो गया की गोमती नदी के किनारे पर हजारो की संख्या मे मरी हुई मछलियाँ पाई गई । (Jal pradushan par nibandh)

मरी हुई मछलियो की संख्या इतनी ज्यादा थी की, उस नदी का पूरा किनारा उनसे भर गया था ।

भारत और विश्व में जल प्रदूषण का समाधान (निदान) :-

संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही मे एक रिपोर्ट जारी की जीसमे उन्होने कहा कि, अगर पर्यावरण को बचाने के लिए जल्द ही कोई कठोर कदम नहीं उठाए गए तो साल 2050 तक सिर्फ जल और वायु प्रदूषण की वजह से लाखों-करोड़ो लोगों की मौत हो जाएगी ।

हर साल विश्व में करीब 90 लाख लोगों की मौत सिर्फ जल और वायु प्रदूषण से हो जाती है । इस से आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हे की 2050 तक ये कितना खतरनाक बन जाएगा ।

जल प्रदूषण को रोकने लिए हमे सबसे पहले उसको बढ़ावा देने वाली प्रक्रियाओं पर ही रोक लगा देनी होगी ।

जैसे, किसी भी प्रकार के अपशिष्ट युक्त जल को जलस्रोतों में नहीं मिलने दिया जाएगा ।

उसके बाद घरों से निकलने वाले दूषित जल ओर वाहित मल को हमे संशोधन संयन्त्रों में भेजना चाहिए । ताकि उसका पूर्ण उपचार करके फिर से जलस्रोतों में छोड़ा जाए ।

और पीने लायक पानी को हर प्रकार की गंदगी ओर अपशिष्ट से रोका जाना चाहिए ।

इसके लिए हमे लोगो को जल स्रोतों के आस-पास गंदगी करने पर और नहाने, कपड़े धोने आदि पर भी रोक लगानी होगी ।

उसके साथ-साथ नदी-तालाबो में पशुओं को स्नान कराने पर भी रोक लगानी चाहिए ।

कृषि कार्यों में भी आवश्यकता से अधिक कीटनाशक दवाओ के प्रयोग को हमे कम करना चाहिए ।

कई जगहो पे कीटनाशक दवाओ को एकदम से रोकना संभव नहीं है । तो एसी जगहो पे हमे नियंत्रित ढंग से इसका उपयोग करना चाहिए ।

इसके अलावा हमे समय-समय पर जलाशयों के अंदर अनावश्यक जलीय पौधों और कीचड़ को निकालकर जल को स्वच्छ बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए । (Jal pradushan par nibandh)

मछलियों की कुछ ऐसी भी जाती हे जो मच्छरों के अण्डे, लार्वा और कचरे को खा जाती है । हमे एसी मछलियों को पालना होगा जिस से जल के अंदर स्वच्छता कायम रहे ।

और सबसे बड़ा काम भारत और पूरे विश्व मे जल प्रदूषण के लिए जागरूकता बढ़ानी चाहिए ।

हमे लोगो को बताना चाहिए की, उसकी वजह से कितने लोग मर रहे है ? उसके प्रभाव से कितना नुकसान हो रहा है ?

अगर लोगों को इसके बारे मे पता होगा तो लोग कम-से-कम जल को प्रदूषित करेंगे । इसके अलावा हमे कूड़े-कचरे को किसी गड्ढे में डालना चाहिए ।

उधोगों की विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों से बड़े पैमाने पर जल दूषित होता है ।

लेकिन उसमे भी कुछ उद्योगों से उत्पन्न होने वाला जल अत्यंत प्रदूषणकारी होता है । जबकि कुछ उद्योगों का जल इतना ज्यादा प्रदूषित नहीं होता ।

जैसे बायलर ब्लोडाउन और शीतलन से निकलने वाला जल लगभग सामान्य होता है । क्योकी ऐसे जल को या तो किसी कार्य में उपयोग किया जा सकता है या एसे जल को पुनर्चक्रित किया जा सकता है ।

लेकिन हमे हर उधोग से निकालने वाले जल को या तो पुनर्चक्रित करना होगा या उसको स्वच्छ जलस्रोतों में मिलने से रोकना होगा ।

भू-क्षरण यानि मिट्टी के कटाव की वजह से भी जल प्रदूषित होता है । उसके लिए हमे ज्यादा-से-ज्यादा पेड़-पौधे लगाने होंगे । क्योकि पेड़-पौधे ही मिट्टी के कटाव को रोक सकते है ।

हमे समजना होगा की जल प्रदूषण का निवारण किया जा सकता है । लेकिन इस के लिए हमें खुद से ही प्रयास करने होंगे ।

निष्कर्ष :-

अब आपको पता चल गया होगा की, जल प्रदूषण विश्व के लिए कितनी गंभीर समस्या है ।

क्योकि अगर इस समस्या से दुनिया की महासत्ता कहने वाले तीन देश अमेरिकारशिया तथा चीन भी डर जाए तो आप समज सकते हो की जल प्रदूषण कितनी बड़ी समस्या है ।

इसीलिए तो बड़े-बड़े विधवान कहते है की तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा । कंही यह भविष्यवाणी सच ना हो जाए ।

इसलिए आज से ही जल को प्रदूषित करना कम करदे । अब मे आपसे पूछना चाहता हु की क्या आप जल को प्रदूषित करेंगे ? या अपने आस-पास जल प्रदूषण होने देंगे ? (इसका जवाब मुजे yes ओर no मे comment मे जरूर दे ।)

और आपको ये जल प्रदुषण पर निबंध (Jal pradushan par nibandh) कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे जल प्रदुषण पर निबंध को दे सके ।

लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email जरूर करे । आपको और भी किसी विषय पर निबंध चाहिए तो कॉमेंट मे जरूर बताए ।

और अगर आपको लगता हे की हमारे आस-पास कोई एसा व्यक्ति हे जो जल का बहोत प्रदूषित करता है, तो एसे व्यक्तियो तक यह निबंध जरूर पहुंचाए । (please share)

Thanks for reading Jal pradushan par nibandh

 

READ MORE ARTICLES :-

 

जल प्रदूषण निवारण संशोधन अधिनियम और जलप्रदूषण स्रोत के बारे मे जानने के लिए – click here

मोर के बारे मे हेरतंगेज़ तथ्य

आखिर क्या था स्वच्छ भारत अभियान

इंटरनेट पर जबरदस्त निबंध 

समय के महत्व पर निबंध

Leave a Comment