महात्मा गांधी पर निबंध – Essay on Mahatma Gandhi in Hindi

दोस्तो, आज हम महात्मा गांधी पर निबंध (Essay on Mahatma Gandhi in Hindi) को विस्तृत मे जानेगे ।

यह निबंध आपको स्कूल के हर क्लास ओर कॉलेज मे काम आने वाला है ।

हम इस निबंध मे हमारे देश की आजादी के महानायक ओर हम सबके राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गाँधी को जानेगे ओर समजेगे ।

हम इस निबंध से अहिंसा, शांति ओर एक महान व्यक्तित्व के गुणो को सीख सकते है ।

हम पर भरोसा करें, महात्मा गांधी पर निबंध को पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है।

Best Essay on Mahatma Gandhi in Hindi

 

प्रस्तावना :

आज के इस आधुनिक युग मे कोई व्यक्ति विचार भी नहीं कर सकता की सिर्फ सत्य और अहिंसा के बल पर कोई देश को आज़ाद करा सकता है ।

लेकिन हमारे बापू ने ये कर दिखाया । बापू ने सिर्फ शांति का मार्ग पकड़ कर अंग्रेजों को हमारा देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया । उनके इस योगदान को हम भारतवासी कभी नहीं भूल सकते ।

गांधीजी के त्याग और बलिदान की वजह से ही आज हम लोग अपने-अपने घर मे आराम से जी रहे हे ओर चेन की सांस ले रहे है ।

इसीलिए तो गांधीजी दुनिया मे हर किसी के लिए प्रेरणास्त्रोत है । उनके इन विचारो ओर सिद्धांतों को देख कर ही दुनिया के अलग-अलग देशो मे कई लोग स्वतंत्र आंदोलन के लिये प्रेरित हुए ।

उनके जैसा एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी, जबरदस्त राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक व्यक्ति इस दुनिया को मिलना थोड़ा मुश्किल है ।

गांधीजी का प्रारंभिक जीवन :-

मोहनदास करमचंद गाँधी यानि हमारे प्यारे बापू का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर जिले मे एक साधारण परिवार मे हुआ था ।

उनके पिता का नाम करमचंद था, ओर वो अंग्रेज़ो के शासनकाल दरमियान राजकोट जिले के दीवान थे ।

ओर पुतलीबाई उनकी मा का नाम था, जो एक कर्तव्यनिष्ठ ओर धार्मिक विचारों वाली महिला थी । गांधीजी पर उनकी माता के विचारों का ओर उनके मूल्यों गहरा असर पड़ा था ।

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गांधीजी ने अपनी माता से सहिष्णुता, अहिंसा, शाकाहार ओर आत्मशुद्धि जैसे गुण सीखे थे ।

गांधीजी की एक बड़ी बहन थी जिनका नाम रलियत था । ओर उनके दो बडे भाई थे जिनका नाम  लक्ष्मीदास ओर कृष्णदास था । गांधीजी अपने परिवार में सबसे छोटे थे ।

गांधीजी को 13 साल की उम्र मे ही कस्तूरबा से शादी से करा दी गई । आखिर गांधीजी भी बाल विवाह जैसे कुरिवाज से बच नहीं पाये । (बचपन मे)

गांधीजी की पहली सन्तान का जन्म तब हुआ था जब वो सिर्फ 15 साल के थे । परंतु वह केवल कुछ ही दिन जीवित रह पायी ।

उसके बाद गांधीजी के चार पुत्र हुए । जिनका नाम हरिलाल, मणिलाल, रामदास ओर देवदास गांधी था । ओर उनके 13 पोते-पोतिया थी ।

महात्मा गांधी की प्रारंभिक शिक्षा :-

गांधीजी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गुजरात मे पूरी की । साल 1887 में गांधीजी ने अपनी मैट्रिक तक की शिक्षा अहमदाबाद से प्राप्त करी थी । उन्होने अपनी कॉलेज की पढ़ाई शामलदास कॉलेज में प्राप्त करी ।

गांधीजी बनना तो चाहते थे डॉक्टर । लेकिन वो वैष्णव परिवार से थे, ओर वैष्णव समाज मे चीर-फाड़ की बिलकुल इजाजत नहीं थी । इसीलिए उन्हें बैरिस्टर बनना पड़ा ।

इसीलिए साल 1888 में गांधीजी कानून की पढ़ाई करने के लिए अपने एक पुत्र हरिलाल ओर पत्नी कस्तूरबा को छोड़कर इंग्लैंड पहुंचे । ओर वहां की इनर टेंपल कानून महाविद्यालय मे उन्होने अपना दाखिला लिया ।

गांधीजी ने चार साल तक वकालत की पढाई की, ओर उसके बाद गांधीजी भारत लौट आए । उन्होने भारत आकर वकालत की प्रैक्टिस शुरू करी लेकिन उनको यहा अधिक कामयाबी नहीं मिली ।

उसके बाद साल 1893 में दादा अब्दुल्लाह नाम के एक व्यापारी के केश के लिए वो अफ्रीका पहुंचे । ओर यही से शुरू होता हे उनका राजनीतिक जीवन ।

गांधीजी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत :-

साल 1906 मे अफ्रीका की टांसवाल सरकार ने दक्षिण अफीका मे रहे भारतीय लोगो के बारे मे अपमान जनक आदेश जारी किया ।

गांधीजी के नेतृत्व मे भारत के लोगो ने अफ्रिका के जोहेन्सबर्ग मे एक विरोध सभा का आयोजन किया । जिसका उदेश्य टांसवाल सरकार के आदेश का उल्लंघन करना था ।

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सरकार ओर सामान्य लोगो के बीच यह संघर्ष सात वर्ष तक चला ।

भारतीय लोग अपनी आजीविका ओर स्वतंत्रता की बलि चढ़ा सकते थे लेकिन इस कानून के सामने झुकना उनको बिलकुल पसंद नहीं था । ओर इस तरह गांधीजी के पहले सत्याग्रह का जन्म हुआ ।

क्योकि जब वो पढ़ाई करते थे तब भी उनको काले-गोरे के भेदभाव का सामना करना पड़ा था । इस से पहले भी वो कइ बार अलगाववाद के शिकार हुए थे । यानि की कदम-कदम पर उनको भेदभाव का सामना करना पड़ता था ।

एक बार गांधीजी के पास ट्रेन की सही टिकट होने के बावजूद भी उनको ट्रेन के प्रथम डिब्बे से बाहर फेंक दिया । ओर वो भी सिर्फ रंग और नस्ल के कारण ।

इस के अलावा कई जगहो पर उनको बडी होटलों में जाने से रोक दिया जाता, । ओर एसे कई भेदभाव उनके साथ किए गए ।

यही रंग और नस्ल के भेदभाव को खतम करने के लिए गांधीजी ने राजनीति में प्रवेश किया । अपने कार्य कुशलता से वो एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उभरे ।

लोगो ने अफ्रीका मे ही कह दिया था की गांधीजी एक आदर्शवादी नेता है । इसीलिए तो लोग उन्हें महात्मा कह कर पुकारते थे ।

वो राजनीति मे सिर्फ दो हथियार लेकर आए थे ओर उनही दो हथियार से उन्होने अंग्रेज़ो को भारत से बाहर किया । ओर वो दो हथियार थे सत्य और अहिंसा ।

आप उन्हे एक सामाजिक कार्यकर्ता भी कह सकते है । क्योकि उन्होने भारत ओर अफ्रीका मे छुआछूत, जातिवाद ओर लैंगिक भेदभाव जैसे कई कुरिवाज़ों को निकालने का प्रयास किया था ।

अगर गांधीजी की जगह कोई आम इंसान होता तो भारत वापस आ जाता । लेकिन एसी कई घटनाओ के बावजूद भी गाँधीजी 21 साल तक न सिर्फ साउथ अफ्रीका में रहे बल्के उनके खिलाफ लड़ते रहे ।

गांधीजी का स्वदेश आगमन :-

हमारे गांधीजी ने अफ्रीका मे रंग-भेद के खिलाफ बहोत विरोध किया ओर उसके बाद गांधीजी 1914 भारत लौटे ।

भारत आने से पहले गांधीजी को बहोत से लोग जानते थे । इसीलिए देशवासियों ने उनका बहोत ही जबरदस्त स्वागत किया और महात्मा के नाम से पुकारा । उस वक्त भारत मे अंग्रेज़ो को शासन था ।

गांधीजी ने भारत आने के बाद चार साल तक मौजूद स्थिति का अध्ययन करा । उसके साथ-साथ सत्याग्रह के लिए उन्होने लोगों को तैयार भी किया ।

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साल 1919 मे अंग्रेजों ने रॉलेट एक्ट नामक एक कानून बनाया था । इस कानून के तहत अंग्रेज़ कोई भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए जेल भेज सकते थे ।

गांधीजी ने इस का बहोत विरोध किया ओर सत्याग्रह आंदोलन की घोषणा की । इस आंदोलन मे गांधीजी को सफलता मिली ।

इस से प्रेरणा लेकर महात्‍मा गांधी ने अन्‍य अभियानों ओर सत्‍यागहो को जारी रखा । 1920 मे बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु हो गयी जो कांग्रेस के लीडर थे । उनके बाद गांधीजी को कांग्रेस का मार्गदर्शक बनाया गया । (Essay on Mahatma Gandhi in Hindi)

गाँधीजी के जीवन के सिद्धांत :-

दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिको मे से एक यानि आइंस्टीन ने कहा था कि, कई सालो बाद आने वाली हमारी पेढ़िया मुश्किल से इस बात पर विश्वास करेगी कि हाड़ ओर मांस से बना एक ऐसा इंसान भी इस भूमि पर कभी आया था ।

इस से ही हमको पता चलता हे की गांधीजी कितने सिद्धांतवादी थे ।

वो सत्य और अहिंसा के पुजारी थे । ओर अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए गांधीजी ने इन दो हथियार का ही उपयोग किया । उनके सत्य के आगे हर अंग्रेज़ को झुकना पड़ा ।

उनको हमेशा सादगी वाला जीवन अच्छा लगता था । इसके अलावा वो एक सिद्धांतवादी ओर आदर्शवादी नेता भी थे । इसीलिए तो लोग उन्हे महात्मा कहकर पुकारते थे ।

उन्होने जीवन मे कभी मांस को हाथ नहीं लगाया । वो शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करते थे । ओर उनको खादी के कपड़ो से बहोत ही ज्यादा लगाव था ।

वो हमेशा स्वदेशी चीज़ों के उपयोग पर ज़ोर देते थे । उनके ये तीन वाक्य दुनिया भर मे प्रचलित हे, कभी बुरा मत बोलो, कभी बुरा मत सोचो ओर कभी बुरा मत देखो । 

उनके विचार और उनका व्यत्तित्व इतना जबरदस्त था की, उनसे नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर किंग, अल्बर्ट आइंसटाइन, राजेन्द्र प्रसाद ओर सरोजनी नायडू जैसे महान लोग प्रेरणा लेते थे ओर अपने जीवन मे अनुसरण करते थे ।

गांधीजी ने अफ्रीका के एंग्लो बोयर युद्ध मे एक स्वास्थ्यकर्मि के तोर पर काम करके कई लोगो की मदद करी था ।

बल्के अंत मे तो ब्रिटिश सरकार ने भी गांधीजी के सम्मान के लिए उनके निधन के 21 साल बाद उनके नाम की डाक टिकट जारी की थी । उन्होने जो आंदोलन किए थे वो 4 महाद्वीप और 12 देशों तक पहुंचे थे ।

गांधीजी के प्रमुख आंदोलन :

अफ्रीका के रंग भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करके साल 1915 मे वे अपने देश भारत लौटे ।

जब यह आए तो उन्होंने देखा कि, ब्रिटिशर क्रूर तरीके से हमारे देशवासियों पर अत्याचार कर रहे है । ओर हमारा देश गरीबी और भुखमरी से अंधकार की तरफ जा रहा है ।

जिसके बाद हमारे बापू ने इन अंग्रेज़ो को हमारे देश से बाहर निकाल ने संकल्प लिया ।

फिर वो एक दृढ़ निश्चय के साथ भारत के स्वतंत्रता संग्राम मे कूद पड़े । इस के लिए उन्होने सत्य और अहिंसा का मार्ग पकड़ा ओर कई बड़े-बड़े आंदोलन किए ।

ओर इसी आंदोलन की वजह से अंग्रेज़ सरकार की नींव कमजोर हो गयी ओर वो भारत छोड़ने पर मजबूर हो गए । चलो अब हम इन आंदोलनो को विस्तृत मे जानते है । (Essay on Mahatma Gandhi in Hindi)

चंपारण सत्याग्रह :-

ये सत्याग्रह बिहार के चंपारण मे 1917 मे हुआ था । इस समय अंग्रेज अपनी अत्याचारी नीतियों से चंपारण गाव के किसानों का शोषण करके बहोत ज्यादा कर वसूलते थे ।

लेकिन गरीब किसान इतना कर देने में असमर्थ थे । जिसके कारण उन लोगो मे गरीबी और भुखमरी की हालात पेदा हो गयी ।

गांधीजी ने उनकी हालत देख कर अंग्रेजों के खिलाफ एक शांतिपूर्ण आंदोलन किया । ओर अंत मे इस सत्याग्रह की वजह से उन गरीब किसानों को 25 फीसदी धन वापस दिलाने में गांधीजी सफल रहे ।

खेड़ा सत्याग्रह :-

चंपारण सत्याग्रह के बाद गांधीजी ने जो दूसरा सत्याग्रह किया वो था खेड़ा सत्याग्रह । साल 1918 में गुजरात के एक खेड़ा नामक गाव मे खतरनाक बाढ़ आई, जिसकी वजह से किसानों की सारी फसले खराब ओर बर्बाद हो गई ।

किसानो की इतनी खराब स्थिति होने के बाद भी अंग्रेज़ो ने कर मे छुट ना देकर कर वसूलना चालू रखा ।  किसानों ने यह बात गांधीजी को बताई । गांधीजी ने फिर से अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया ।

उनको सभी किसानों ने बड़ा जबरदस्त साथ दिया, जिसकी वजह से ब्रिटीशरो के तुरंत ही हाथ-पांव फूलने लगे । ओर अंत मे फिर से अंग्रेज़ो ने किसानों का कर माफ कर दिया । (Mahatma Gandhi Essay in Hindi)

असहयोग आंदोलन :-

यह आंदोलन मुख्य दो उदेश्य से शुरू किया गया था । पहले तो अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों ओर दूसरा जलियावाला बाग हत्याकांड ।

असहयोग आंदोलन के जरिये उन्होंने भारत की जनता से यह अपील की के किसी को भी अंग्रेज़ो का समर्थन नहीं देना है । इसको भी भारतवासीयों ने बहोत समर्थन दिया ।

ब्रिटिश सरकार मे काम करते कई लोगो ने शिक्षक, प्रशासनिक और अन्य सरकारी पदों से इस्तीफा दे दिया । इस के अलावा विदेशी कपड़ों को जलाया गया ओर स्वदेशी चीज़ों को अपनाया गया ।

यह आंदोलन सफल ही होने वाला था की चौरी-चौरा कांड हो गया । जिसके चलते अंग्रेज़ो ने गांधीजी को पकड़ लिया ओर 6 साल की सजा दी । (Mahatma Gandhi Essay in Hindi)

नमक सत्याग्रह :-

साल 1930 मे ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नमक सत्याग्रह चलाया गया । इस मे गांधीजी ने नमक के कानून को तोड़ने के लिए पैदल यात्रा की थी ।

गांधीजी ओर उनके कुछ अनुयायियों ने 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से पैदल यात्रा शुरु करी थी ।

ओर 400 KM तक की यात्रा करके 6 अप्रैल को दांडी पहुंचकर गांधीजी ने समुद्र के किनारे नमक के कानून को तोड़ा । उसके बाद भारत के लोग खुद नमक बनाते ओर बेच देते । ओर यह आंदोलन भी सफल रहा । (Essay on Mahatma Gandhi in Hindi)

भारत छोड़ो आंदोलन :-

इस आंदोलन के वक्त द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ हो चुका था । अंग्रेज एसा चाहते थे की भारत भी इस युद्ध मे सहयोग ले ओर हमारा साथ दे ।

लेकिन गांधीजी ने पहले से ही कह दिया था की, आपने तो भारत को आजादी देने से इन्कार कर दिया हे तो हम इस युद्ध मे शामिल क्यो हो ?

जैसे-जैसे द्वितीय विश्व युद्ध आगे बढता गया वैसे-वैसे गांधीजी और कांग्रेस ने भारत छोड़ो आन्दोलन की मांग को तीव्र कर दिया । लेकिन अंत मे इस आंदोलन मे भी व्यापक हिंसा और गिरफ्तारी हुई ।

परंतु इस बार गांधीजी ने कह दिया था कि भले ही व्यक्तिगत हिंसा हो लेकिन यह आन्दोलन बंद नहीं होगा । लेकिन इसकी वजह से अंग्रेजो ने गांधीजी ओर कांग्रेस के कई सदस्यों को मुबंई में गिरफ्तार कर लिया ।

ओर हमारे बापू को पुणे के आंगा-खां-महल मे ले गए वहा उनको दो साल तक जेल मे बंद किया गया । उस समय गांधीजी मलेरिया से पीड़ित हो गए ।

अंग्रेज़ो ने उनकी यह हालत देखकर रिहा कर दिया । इस सत्याग्रह मे पूरा भारत एक हो गया था । ओर विश्व युद्ध का भी अंत हो गया था । उस वक्त ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट कहा की भारत को जल्द ही सत्ता सौंप दी जाएगी ।

दलित आंदोलन :-

इस आंदोलन का मुख्य उदेश्य छुआछूत की समस्याओं को समाप्त करना ओर दलितो को समान आधिकार दिलाना था ।

इसके लिए बापू ने 6 दिन का उपवास रखा ओर दलितों को हरिजन बताया । जिसका मतलब हे भगवान के संतान ।

इस तरह गांधीजी ने शांतिपूर्ण, सत्य ओर अहिंसा के साथ सभी आंदोलन किए ।

(वायु प्रदूषण पर खतरनाक तथ्यो के साथ निबंध जानना ना भूले – click here)

गाँधीजी का महान बलिदान :-

30 जनवरी 1948 को गाँधीजी जब एक प्रार्थनासभा को संबोधित करने जा रहे थे तब नाथूराम गोडसे ने उनके सीने में 3 गोलियां मार दी ।

जिसके कारण हमारे राष्ट्रपिता ओर हमारे प्यारे बापू की दिल्ली के बिरला हाउस मे शाम 5:17 पर मृत्यु हुई । उनके मुख से अंतिम शब्द हे राम निकला था । अंत मे हत्यारे नाथूराम गोडसे को 1949 में मौत की सजा दी गयी ।

एक व्यक्ति जो अपना सारा जीवन देश के लिए कुर्बान कर दे ओर अंत मे उन्हे कोई अपने ही देश का नागरिक मार दे तो कितना दुख होता है ।

(आखिर क्यो समय हमारे लिए इतना महत्व रखता है, जानने के लिए- click here

निष्कर्ष :-

इतना सब कुछ जानने के बाद अब तो आप लोगो को पता तो चल गया होगा की आखिर क्यो गांधीजी को लोग राष्ट्रपिता और बापू कहते है ।

इसीलिए तो आज भारत में 53 ओर विदेश मे 48 सड़कें गांधीजी के नाम पर है । लेकिन गोर करने की बात यह हे की उनको अभी तक शांति नोबेल पुरस्कार नहीं मिला ।

उन्होंने हमे भारत की आज़ादी का सिर्फ सपना नहीं दिखाया बल्के उसे सच्चाई मे भी तब्दील किया । मुजे तो नहीं लगता की अब दुनिया को इतनी महान ओर जबरदस्त शख्सियत देखने को मिलेंगी ।

अब मे आखिर मे आपसे पूछना चाहता हु की आपको ये महात्मा गांधी पर निबंध (Essay on Mahatma Gandhi in Hindi) कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे महात्मा गांधी पर निबंध (Essay on Mahatma Gandhi in Hindi) को दे सके ।

लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email जरूर करे । आपको और भी किसी विषय पर निबंध चाहिए तो कॉमेंट मे जरूर बताए ।

ओर हमारे प्यारे बापू के इस निबंध को ज्यादा-से-ज्यादा लोगो तक जरूर पहुंचाए । (please share)

Thanks for reading Essay on Mahatma Gandhi in Hindi

 

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