भारतीय संस्कृति पर निबंध (2021)- Essay on Indian Culture in Hindi

दोस्तो, आज हम भारतीय संस्कृति पर निबंध (Indian Culture in Hindi) को जानेगे । यह निबंध आपको स्कूल, कॉलेज और कई जगहो पर काम आने वाला है ।

हम इस निबंध मे विश्व की सबसे प्राचीन यानि भारतीय संस्कृति के बारे मे जानने वाले है । इसके अलावा संस्कृति का सही अर्थ और इसकी विशिष्टीताओ को भी समजेगे ।

हम पर भरोसा करें, भारतीय संस्कृति पर निबंध को पढ़ने के बाद शायद ही आपके मनमे इसके बारे मे कोई संदेह रहेगा ।

तो चलिए शुरू करते है ।

 

Essay on Indian Culture in Hindi- भारतीय संस्कृति पर निबंध

 

प्रस्तावना :-

पूरे विश्व मे भारत एकमात्र एसा देश है, जहां अलग-अलग धर्म, जाति, पंथ, संस्कृति और परंपराओ के लोग मिलजुल कर शांति से रहते है ।

इसीलिए भारत को अनेकता में एकता का देश भी कहा जाता है । और आज हम इनहि अनेकताओ मे से एक यानि हमारी संस्कृति के बारे मे जानने वाले है ।

भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृतिओ मे से एक है । सम्मान, आदर, मानवीयता, प्रेम, परोपकार, भाईचारा, भलाई, धर्म आदि हमारी संस्कृति की मुख्य विशेषताएं है ।

आज हर देश आधुनिकता की दौड़ मे है, लेकिन हम भारतीयो ने आज भी अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को नहीं छोड़ा है ।

और इसी की वजह से हम एक ही देश मे विविधताओ के साथ भी एक होकर शांति से रह पाये है ।

 

क्या है संस्कृति का अर्थ :-

हमारे प्राचीन ग्रंथो मे संस्कृति का अर्थ संस्कार बताया गया है ।

इसके अलावा सुधार, शुद्धि और सजावट जैसे शब्द भी प्राचीन ग्रंथो मे संस्कृति के लिए उपयोग किए गए है ।

एसा कहा जाता है की, कौटिल्य ने विनय शब्द के अर्थ मे संस्कृति शब्द का उपयोग किया था । भारत के चार वेदो मे से एक यानि यजुर्वेद मे भी संस्कृति शब्द को सृष्टि कहा गया है ।

संस्कृति को साधारण भाषा मे समजे तो, एक सामान्य मनुष्य को सामाजिक प्राणी बनाने में जिन मूल्यों, तत्त्वों और मान्यताओं का योगदान होता है, उसे ही संस्कृति कहते है ।

bhartiy sanskruti par nibandh

संस्कृति से हमे अपने जीवन के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा मिलती है । इसके अलावा मनुष्य को विरासत में मिली कोई भी चीज़ जैसे शिल्प, कला, वस्तु या विचार भी संस्कृति कहलती है ।

दुनिया के किसी भी देश, समुदाय, जाति और धर्म के लिए संस्कृति एक आत्मा है । और उनकी पहचान उनकी संस्कृति से ही की जाती है ।

लेकिन आधुनिक बनने की दौड़ मे कई देशो ने अपनी ही संस्कृति को मिटा दिया । जबकि भारतीय संस्कृति को न किसी ने मिटाने की कोशिश की, और ना ही कोई मिटा सकता है ।

इसीलिए भारतीय संस्कृति को विश्व की सबसे प्राचीनतम संस्कृति भी कहा जाता है ।

हमारी संस्कृति मे मानव कल्याण की भावना बहोत ज्यादा है । यहा पर हर कार्य लोगो के हित और सुख पर निर्भर होते है ।

भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम जैसे उद्देश्यो पर आधारित है । वसुधैव कुटुम्बकम यानि सभी सुखी और निरोग रहे, सबका कल्याण हो और कोई मनुष्य दुखी न हो ।

 

संस्कृति और सभ्यता मे अंतर :-

भले ही कुछ लोग आज संस्कृति और सभ्यता को एक मानते हो, लेकिन इन दोनों मे काफी अंतर है ।

क्योकि सभ्यता का सबंध मनुष्य के भौतिक विकास से है, जबकि संस्कृति का सबंध मनुष्य की सोच, विचार और अध्यात्मीक चीज़ों के साथ है ।

मनुष्य का रहन-सहन, खान-पान या अन्य कोई बाहरी चीज़ को हम सभ्यता कह सकते है । परंतु संस्कृति का क्षेत्र तो काफी गहन और व्यापक है ।

bhartiya sanskriti in hindi

सभ्यता भौतिक अवस्था को दर्शाती है, जबकि संस्कृति बौद्धिक और आत्मिक अवस्था को दर्शाती है ।

लेकिन इन दोनों के बीच काफी घनिष्ठ संबंध होता है । जैसे एक मनुष्य किसी चीज़ को बनाता है, तो उसमे उसका शरीर और विचार दोनों काम करते है ।

इसीलिए तो सभ्यता को शरीर और संस्कृति को आत्मा कहा जाता है ।

प्राचीन काल से ही विश्व में भारतीय संस्कृति ने सभ्यता के साथ आदरपूर्ण स्थान प्राप्त किया है ।

 

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भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं :-

अति-आधुनिक युग मे भी हम भारतीयो ने कभी अपनी प्राचीन संस्कृति को नहीं छोड़ा, इसकी सबसे बड़ी वजह शायद हमारी संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं है ।

तो चलिये हम बारी-बारी सभी भारतीय संस्कृति की विशेषताएं जानते है ।

 

प्राचीनता :

भारतीय संस्कृति की सबसे पहली विशेषता है, उसकी प्राचीनता ।

मध्य प्रदेश के शैलचित्र और नर्मदा घाटी मे मिले कुछ पुरातत्वीय प्रमाणों से हमे पता चलता है की, भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है ।

इसके अलावा सिंधु घाटी सभ्यता से भी हमे पता चलता है की, हमारी संस्कृति लगभग पांच हजार साल पुरानी है ।

वेदों मे भी हमे भारतीय संस्कृति की प्राचीनता का प्रमाण मिलता है । (Indian Culture in Hindi)

लेकिन कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रमाणों के मुताबिक भारतीय संस्कृति रोम, मिस्त्र, यूनानी और बेबिलोनिया जैसी संस्कृतियों के समकालीन है ।

 

निरंतरता :

भारतीय संस्कृति की दूसरी विशेषता है, निरंतरता ।

हमारी संस्कृति प्राचीनता होने के साथ-साथ निरंतरता भी है । जिसके कारण ही भारतीय संस्कृति रोम, मिस्त्र, यूनानी, ईरान, अक्काद और बेबीलोन जैसी संस्कृतियों की तरह खत्म नहीं हुई ।

सदियो से चली आ रही कई परंपराओ को हम आज भी एसे ही करते आ रहे है ।

जैसे की सूर्य, वट और पीपल को देवी-देवता मानकर उनकी पूजा करना कई सदियो से चला आ रहा है ।

इसके अलावा वेदों और उपनिषदों की आस्था और विश्वास को आज भी माना जाता है । इतनी सदियो बाद भी हमारी संस्कृति के मूल्यों, आधारभूत तत्वों और वचनो मे निरंतरता है ।

 

वसुधैव कुटुंबकम की भावना :

वसुधैव कुटुंबकम का अर्थ है, पूरी दुनिया एक ही परिवार है ।

इस वाक्य के महत्व को देखते हुए, भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष मे ही इसे अंकित किया गया है । (Indian Culture in Hindi)

शुरुआत से ही हमारी संस्कृति अत्यंत उदार और समन्वयवादी रही है ।

हम लोग अपनी उन्नति और विकास के साथ-साथ संपूर्ण विश्व के विकास बारे मे भी सोचते है ।

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हमारे अंदर राष्ट्रीयता की भावना तो होती है, लेकिन जब किसी और राष्ट्र पर भी संकट आ जाए तब भी हम उसकी मदद करने के लिए तैयार रहते है ।

हम सभी मनुष्य को समान समजते है, और उनके कल्याण की कामना करते है ।

यह सब हमे हमारी संस्कृति ने सिखाया है । और इसीलिए तो भारतीय संस्कृति विश्व की बाकी संस्कृतियों से अलग है ।

 

आध्यात्मिकता :

आध्यात्मिकता को भारतीय संस्कृति का प्राण भी कहा जाता है ।

भारत के लोग अलग-अलग धर्मों में विश्वास रखते है । इन लोगो की दृष्टि में ईश्वर ने इस पृथ्वी को बनाया है ।

त्याग और तपस्या आध्यात्मिकता के मुख्य भाग और भारतीय संस्कृति के प्राण है ।

जब एक मनुष्य त्याग को अपनाता है, तब उसे हर चीज़ मे संतोष प्राप्त होता है । उसके अंदर दूसरों के प्रति सहानुभूति होती है ।

त्याग की वजह से मनुस्य के अंदर लालच और स्वार्थ जैसी बुरी भावनाओं का विनाश होता है । (Indian Culture in Hindi)

वो हर काम को संयम के साथ करने की कोशिश करता है । भारत के लोग ना सिर्फ अपने धर्मों में विश्वास रखते है, बल्के दूसरों धर्मो का दील से सम्मान भी करते है ।

यह सब कुछ भारतीय संस्कृति ने हमे दिया है ।

 

अनेकता में एकता :

भारत उत्तर के पर्वतीय भू-भागो से लेकर पूर्व की ब्रह्मपुत्र और पश्चिम की सिंधु नदियों तक विस्तृत है । दक्षिण मे घने वनो से लेकर गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदिया हमारे देश मे शामिल है ।

और पश्चिम के रेगिस्तानो से लेकर दक्षिण का तटीय प्रदेशो तक विशाल भारत फैला हुआ है । इसीलिए भारत मे भौगोलिक रूप से अनेक विविधताओं है ।

भौगोलिक विभिन्नताओ के साथ-साथ भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति मे भी बहोत भिन्नता है । (Indian Culture in Hindi)

क्योकि भारत मे अलग-अलग प्रकार के धर्म, जाति, पंथ, लिंग समुदाय और भाषा के लोग रहते है । इन लोगो के खान-पान, रहन-सहन और बोल-चाल मे भी काफी भिन्नता है ।

लेकिन भले ही धार्मिक और भौगोलिक रूप से भारत मे अनेक विविधताए हो, परंतु सांस्कृतिक रूप से भारत एक ही है ।

इतनी विविधताओ के बाद भी भारत के सभी लोग मिलजुल कर प्रेम से रहते है । इसीलिए भारत को अनेकता में एकता का देश कहा जाता है ।

दूसरों की भावनाओं को शुद्ध रूप से मान-सम्मान कैसा देना, यह हमे भारतीय संस्कृति ने सिखाया है ।

 

सहनशीलता :

सहनशीलता भी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषताओ मे से एक है ।

कई सदियो पहले जब भारत पर विदेशी आक्रमण हुआ करते थे, तब भारत के लोगो पर कई आत्याचार किए जाते थे ।

इसके अलावा जब भारत पर अंग्रजी हुकूमत थी, तब भी हमारे देशवासियों पर बहोत जुल्म किया जाता था ।

लेकिन इस वक्त देश में शांति बनाए रखने के लिए भारतीयों ने इन सभी लोगो के अत्याचारों को सहन किया था । इसका मतलब यह नहीं था की, हम इन लोगो से डरते थे ।

परंतु हमारी संस्कृति ने दी हुई सहनशीलता को हम कैसे भूल सकते थे ।

सहनशीलता का प्रचार करने के लिए और इसका सही ज्ञान लोगो तक पहोचाने के लिए भारत मे कई महापुरुषों जन्मे, जिसमे महावीर, बुद्ध, कबीर, चैतन्य, नानक और महात्मा गांधी जैसे नाम शामिल है ।

 

ग्रहणशीलता :

जब विदेशी आक्रमण भारत पर हुए, तब अनेक जातियों के लोग भारत मे आकर बसे थे । जिसमे शक, हूण, यवन और कुषाण प्रजाति के लोग मुख्य थे ।

इन विदेशि लोगो के साथ-साथ उनकी संस्कृति भी भारत मे आई, लेकिन भारतीय संस्कृति के प्रबल प्रहार ने इन सभी संस्कृतियो को अपनी धारा में प्रवाहित कर लिया ।

यह लोग हमारी संस्कृति मे इतने गुल गए की बाद मे यही लोग भारतीय संस्कृति के प्रचारक बन गए । (Indian Culture in Hindi)

जैसे की, शको के राजा रुद्रदामन् ने वैदिक धर्म, कुषाणो के शासक कनिष्क ने बौद्ध धर्म और हूणों ने शैव धर्म को अपना लिया था ।

इस तरह भारतीय संस्कृति की एक विशेषता उसकी ग्रहणशीलता भी है ।

 

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भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का दुष्प्रभाव :-

अंग्रेज़ो से पहले भारत पर जितनी भी विदेशी प्रजा आई थी, वह सभी प्रजाओ ने भारतीय संस्कृति से प्रभावित होकर उसे अपना लिया था ।

लेकिन अंग्रेज़ोने पहली बार हमारी संस्कृति को दबाने की कोशिश करी थी ।

अंग्रेज़ जानते थे की, किसी भी देश पर शासन करने के लिए सबसे पहले उस देश की संस्कृति को मिटा दो ।

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क्योकि जब लोग अपनी संस्कृति को भूल कर अंग्रेज़ो की संस्कृति अपना लेंगे तो, वह सारे लोग मानसिक रूप से अंग्रेज़ बन जाएंगे ।

इसी चीज़ को अपनाकर अंग्रेज़ोने ना सिर्फ भारत पर शासन किया बल्के विश्व के और भी कई देशो को अपना गुलाम बना लिया था ।

इसीलिए अंग्रेज़ो के समय मे भारत के सामाजिक विचार पर पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव पड़ा था । (Indian Culture in Hindi)

जैसे की, संयुक्त कुटुंब अब कई परिवारों मे विभाजित होने लगे । लोगो के अंदर भौतिकवाद यानि भोग-विलास आने लगी ।

जिसकी वजह से हम सभी लोग भारतीय सांस्कृति के मूल लक्ष्य से भटक गए ।

हमारे समाज आधुनिकतावाद की और आगे बढ़ने लगे । लेकिन उन्हे कोन बताए की, आधुनिकता की जड़ें अंग्रेज़ो से जुड़ी हुई थी ।

अब धर्म और दर्शन मे नए-नए अविष्कार होने लगे, कला और विज्ञान के नाम पर नवीन साधनो का विकास हुआ । 

हमारी सामाजिक और राजनीतिक परिस्थिति मे काफी बदलाव हुए, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिमी संस्कृतियों ने भारत और एशियाई देशो मे कई नवीन चेतनाओ की शुरुआत करी ।

जिससे लोग देश के लिए त्याग और बलिदान को भूलकर सिर्फ अपने स्वार्थ के बारे मे सोचे ।

लेकिन अंग्रेज़ो से आज़ाद होकर फिर से हमारी संस्कृति को लोगो ने पहेचाना और उसे सही अर्थ मे अपनाना शुरू किया ।  

इसीलिए कभी देश की संस्कृति को मिटने न दे, क्योकि संस्कृति के मिटने के बाद देश को मिटने मे देर नहीं लगती ।

 

संस्कृति का संरक्षण कैसे करे ?

अगर किसी देश ने अपनी संस्कृति का संरक्षण नहीं किया तो, शायद आने वाले कुछ सालो मे उसे बहोत बड़ा नुकसान भुगतना पड़ेगा ।

क्योकि इतिहास गवाह है की, जिस देश ने अपनी संस्कृतियों को छोड़ कर आधुनिक बनने की चक्कर किसी और देश की संस्कृति अपनालि वो आज विश्व के नक्शे से गायब हो चुके है ।

उन पर किसी और देश का शासन चल रहा है । इसीलिए हमेशा अपनी संस्कृति का संरक्षण करे । लेकिन कैसे ? (Indian Culture in Hindi)

इसके लिए आप ज्यादा-से-ज्यादा अपनी धार्मिक परंपराओं के बारे में जानें, अपनी राष्ट्रीय भाषा का अधिक उपयोग करे, राजनैतिक और सामाजिक महत्व को समजे, अपनी संस्कृति पर गौरव करे, उसे दैनिक जीवन के आचरण मे लाए और इन सभी चीज़ों को हमारी आने वाले पीढ़ी तक पहोचाए ।

इस तरह अगर हमने इतनी चीज़ों को समज लिया और अपने दैनिक जीवन मे अपना लिया तो हम अपनी संस्कृति का संरक्षण कर सकते है ।

 

निष्कर्ष :-

इतना सब कुछ जानने के बाद शायद अब आप लोगो को पता चल गया होगा की, आखिर क्या है संस्कृति और क्यो हमे इसका संरक्षण करना जरूरी है ?

भारतीय संस्कृति एक विचार है, जिसे कोई भी मनुष्य अपनाकर अपना विकास कर सकता है ।

लेकिन आज की हमारी युवा पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति की और ज्यादा बढ़ रही है । हमे उन संस्कृतियों को छोड़ कर विशालता और उदारता वाली भारतीय संस्कृति को अपनाना होगा । तभी हम भारत को एक विकसित राष्ट्र बना सकेंगे ।

अब मे आखिर मे आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हु की, क्या अब आप लोग हमारी संस्कृति का संरक्षण करेंगे या नहीं ? इसका जवाब कमेंट मे जरूर दे ।

और आपको यह भारतीय संस्कृति पर निबंध (Indian Culture in Hindi) कैसा लगा ?

हमने पूरी कोशिस की है, ताकि आपको सरल ओर साधारण भाषा मे भारतीय संस्कृति पर निबंध दे सके । लेकीन फिर भी आपको कोई समस्या हो तो आप हमे email करे ।

और अगर आपको इस निबंध से कुछ भी लाभ हुआ हो तो इसे शेर करना न भूले । (please share)

Thanks for reading Indian Culture in Hindi

 

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